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बीसीसीआई के शीर्ष अधिकारी हटाए जाएं: लोढ़ा समिति SC को सौंपी नई रिपोर्ट

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नई दिल्ली. बीसीसीआई के कामकाज में सुधार के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई जस्टिस लोढ़ा कमेटी ने कोर्ट को अपनी तीसरी स्टेटस रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट में कमेटी ने कहा है कि बोर्ड के तमाम अफसरों को हटाकर पूर्व होम सेक्रेटरी जीके. पिल्लई को ऑब्जर्वर बनाया जाए। रिपोर्ट के मुताबिक, पिल्लई को ही बोर्ड का एडमिनिस्ट्रेशन सौंपा जाए1_1479736888
14 नंवबर को सौंपी गई इस रिपोर्ट के मुताबिक, पिल्लई को ये अधिकार जाएं कि वह आइपीएल के अगले संस्करण में मीडिया अधिकार और बाकी अनुबंध दे सकें। घरेलूऔर अंतरराष्ट्रीय मैचों के आयोजन के अधिकार उन्हें दिए जाएं। साथ ही समिति ने पिल्लई को लेखा परीक्षक नियुक्त करने, बीसीसीआइ प्रशासन का मार्गदर्शन करने खासकर निविदाएं आवंटित करने और पारदर्शिता बनाए रखने का अधिकार प्रदान करने के लिए भी कहा। समिति ने सचिवालय कर्मचारियों और सहायकों की नियुक्ति करने तथा उनका वेतन निर्धारित करने का अधिकार देने का भी न्यायालय से अनुरोध किया। समझा जाता है कि सुप्रीम कोर्ट समिति की रिपोर्ट पर सुनवाई करेगा और उसके बाद अपना फैसला सुनाएगा।
बीसीसीआई और स्टेट बोर्ड पर सवाल
– रिपोर्ट के मुताबिक, बीसीसीआई और स्टेट एसोसिएशंस में कई अफसर ऐसे हैं जो कोर्ट द्वारा दिए गए ऑर्डर और शर्तों को पूरा नहीं करते।
– केस दायर करने वाले बिहार क्रिकेट एसोसिएशन के सेक्रेटरी आदित्य वर्मा ने लोढ़ा पैनल की सिफारिशों का स्वागत किया।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा देश के क्रिकेट प्रशासन में आमूल-चूल सुधार के लिए नियुक्त लोढ़ा समिति की सिफारिशें मानने को लेकर अनुराग ठाकुर के नेतृत्व वाली बीसीसीआइ ने अब तक कड़ा रुख अख्तियार किया हुआ है। सुनवाई केदौरान बीसीसीआइ ने कोर्ट के आदेश मानने की बात स्वीकार की, लेकिन बाद में कहा कि राज्य संघ लोढ़ा समिति की सभी सिफारिशों को मानने के लिए तैयार नहीं हैं। इसलिए उसे सभी सिफारिशों को लागू करने में समस्या आ रही है। समिति की ताजा सिफारिश बोर्ड के लिए बड़ा झटका साबित हो सकती है।
समिति ने सोमवार को सौंपी अपनी स्टेटस रिपोर्ट में बीसीसीआइ के अधिकारियों द्वारा लगातार सिफारिशों को न मानने का भी जिक्रकिया है। इस रिपोर्ट में कहा गया है, ‘शीर्ष अदालत के आदेश में पैरा-4 में वर्णित नियम के तहत बीसीसीआइ और इससे संबद्ध राज्य क्रिकेट संघों के सभी अयोग्य अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दें कि अब से उनका कार्यकाल समाप्त होता है।Ó पैरा-4 में वर्णित आदेश के अनुसार, 70 वर्ष से अधिक आयु के, मंत्री पद या किसी सरकारी पद पर नियुक्त, किसी भी खेल इकाई में पदस्थ तथा लगातार नौ वर्षो से बीसीसीआइ में नियुक्त या अदालत द्वारा किसी आपराधिक मामले में संलिप्तता का आरोपी व्यक्ति बीसीसीआइ के पद के लिए अयोग्य होगा।
समिति ने बीसीसीआइ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राहुल जौहरी को बोर्ड के सभी प्रशासनिक एवं प्रबंधन मामलों की देखरेख करने का निर्देश देने को भी कहा है।
बीसीसीआइ में सुधार के लिए बनाई थी लोढ़ा समिति : बता दें, सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआइ में सुधार के लिए जनवरी, 2015 में रिटायर्ड चीफ जस्टिस आरएम लोढ़ा की अगुआई में समिति बनाई थी। समिति ने अपनी रिपोर्ट में बीसीसीआइ में कई बदलावों के सुझाव दिए हैं।

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