Home दिल्ली लोकपाल पर केंद्र सराकर को SC की फटकार

लोकपाल पर केंद्र सराकर को SC की फटकार

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नईदिल्ली,सुप्रीम कोर्ट ने लोकपाल की नियुक्ति में हो रही देरी पर नाराजगी जतायी है। चीफ जस्टिस तीरथ सिंह ठाकुर, जस्टिस धनंजय वाई चंद्रचूड और जस्टिस एल नागेश्वर राव की तीन सदस्यीय खंडपीठ के समक्ष केंद्र ने दलील दी कि विपक्ष के सबसे बड़े राजनीतिक दल के नेता को चयन समिति में शामिल करने के लिए संसद में संशोधन विधेयक लंबित है। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि सरकार विभिन्न विकल्पों पर विचार करे। इनमें से सबसे बड़े दल को विपक्ष मानने संबंधी अध्यादेश जारी करना शामिल है। पीठ ने अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी से जानना चाहा कि सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता को चयन समिति में शामिल करने के लिये कोर्ट आदेश क्यों नहीं दे सकता। अटार्नी जनरल ने पीठ से कहा कि मौजूदा हालात में कोर्ट द्वारा पारित कोई भी आदेश न्यायिक तरीके से कानून बनाने जैसा होगा। मामले की सुनवाई 7 दिसंबर के लिये स्थगित कर दी गयी है। इससे पहले, गैर सरकारी संगठन कामन काज की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शांति भूषण ने कहा कि लंबे संघर्ष के बाद लोकपाल बिल पारित किया गया था लेकिन अब सरकार कुछ नहीं कर रही है। क्या आप एक और अन्ना आन्दोलन चाहते हैं? इस पर रोहतगी ने कहा कि कानून के प्रावधानों के अनुसार संसद में प्रतिपक्ष के नेता पद का दावा करने के लिये सबसे बड़े विपक्षी दल के पास एक निश्चित संख्या में सांसद होने चाहिए। उन्होंने कहा कि इसीलिये सरकार कानून में संशोधन कर रही है ताकि सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता को लोकपाल की नियुक्ति हेतु चयन समिति में शामिल किया जा सके। इस पर भूषण ने कहा, ‘यह राजनीतिक चालबाजी है।’पीठ ने अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी से जानना चाहा कि सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता को चयन समिति में शामिल करने के लिये न्यायालय आदेश क्यों नहीं दे सकता है। अटार्नी जनरल ने पीठ से कहा कि मौजूदा हालात में न्यायालय द्वारा पारित कोई भी आदेश न्यायिक तरीके से कानून बनाने जैसा होगा। उन्होंने कहा कि वह इस संबंध में निर्देश प्राप्त करके न्यायालय को सूचित करेंगे। इस पर पीठ ने मामले की सुनवाई सात दिसंबर के लिये स्थगित कर दी।
इससे पहले, गैर सरकारी संगठन कामन काज की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शांति भूषण ने कहा कि लंबे संघर्ष के बाद लोकपाल बिल पारित किया गया था लेकिन अब सरकार कुछ नहीं कर रही है। उन्होंने कहा, ‘‘2014 में कानून अधिसूचित होने के बावजूद हमारे पास आज भी लोकपाल नहीं है। यहां तक कि विधिवेत्ता की भी नियुक्ति नहीं हुयी है और जनता हताश हो रही है। क्या आप एक और अन्ना आन्दोलन चाहते हैं? भूषण ने कहा कि सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता को प्रतिपक्ष के नेता के रूप में मान्यता देने के लिये शीर्ष अदालत को लोकपाल कानून की व्याख्या करनी होगी।parliament-1

इस दौरान पीठ ने कहा, ‘अभी हमारे पास पिछले ढाई साल से प्रतिपक्ष का नेता नहीं है और संभव है कि अगले ढाई साल तक वह नहीं होगा। ऐसी स्थिति में क्या आप कानून को निष्प्रभावी होने देंगे।’ इस पर अटार्नी जनरल ने जानना चाहा कि न्यायालय ऐसा क्यों मान रहा है कि संसद संशोधन विधेयक पारित नहीं करेगी।

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