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बैंक में अघोषित रकम जमा करने पर लगेगा 50 फीसदी टैक्स, 4 साल का लॉक-इन भी

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नई दिल्ली (जेएनएन)। नोटबंदी के बाद बैंकों में बड़े पैमाने पर अघोषित धन जमा कराने वाले लोगों के लिए मोदी सरकार एक बार फिर से डिसक्लोजर स्कीम लॉन्च कर सकती है। इस योजना के तहत अघोषित आय रखने वाले लोगों के धन पर 50 फीसद तक टैक्स लगने के कयास लगाए जा रहे हैं। इतना ही नहीं इस आय का उपयोग ग्राहक पहले चार साल में नहीं कर सकेगा।
भरनी होगी जबरदस्त पेनेल्टी
एक अंग्रेजी अखबार के मुताबिक इस स्कीम को न मानने वाले लोगों पर 60 फीसद से अधिक तक की पेनल्टी लगाई जा सकती है। इसका करीब 35 फीसद प्रधानमंत्री वेलफेयर फंड में और 25 फीसद गरीबों के विकास में लगाया जाएगा। माना यह भी जा रहा है कि सरकार अगले सप्ताह आयकर नियमों में बदलाव भी कर सकती है। केंद्र सरकार की ओर से यह योजना कैबिनेट की ओर से टैक्स कानूनों को मंजूर किए जाने के एक दिन बाद सामने आई है। सरकार संसद के मौजूदा सत्र में टैक्स कानून में संशोधन लाने की योजना बना रही है। हालांकि अगर करदाता स्वेच्छा से बेहिसाब राशि के बारे में घोषणा नहीं करता है तो टैक्स उच्च दर से 90 प्रतिशत कर लग सकता है।

जनधन खातों पर सरकार की नजर

मंत्रिमंडल ने शुक्रवार रात आयकर कानून में संशोधन की जो मंजूरी दी है, उसके तहत पुराने 500 और 1,000 रुपये के नोट निर्धारित सीमा से अधिक जमा करने के बारे में अगर आयकर अधिकारियों के समक्ष घोषणा की जाती है तो उस पर 50 प्रतिशत टैक्स लग सकता है। गौरतलब है कि सरकार ने नोटबंदी के बाद 10 नवंबर से 30 दिसंबर यानी 50 दिन में पुराने नोट जमा करने या उसे नई मुद्रा में बदलने की अनुमति दी है।
अगर आप जानकारी दे देते हैं तो क्या होगा ?
मान लिजिए अगर आप के पास 1 करोड़ का काला धऩ है और आप इसे जमा करते हैं तो सरकार आप से 50 लाख रुपए टेक्स के तौर पर लेगी और आप बाकी 50 लाख आप के होंगे लेकिन उसमें से 25 लाख चार साल तक बैंक से निकाल नही पाएंगे और उस पर ब्याज भी नहीं मिलेगा.
अगर आप जानकारी नहीं देते हैं तो क्या होगा?
लेकिन अगर आप जानकारी नहीं देते हैं और आयकर विभाग को आप के पैसे की जानकारी मिल जाती है तो जमा रकम पर 60 फीसदी की दर से टैक्स लगेगा और 30 फीसदी की दर से जुर्माना देना होगा. इसके बाद आपको जेल भी हो सकती है. यानी जमाकर्ता को केवल 10 फीसदी पैसा ही वापस मिलेगा. ये रकम मुख्य रुप से ग्रामीण इलाकों में खर्च की जाएगी.
मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि केवल दो सप्ताह में खासकर शून्य खाते वाले जनधन खातों में 21,000 करोड़ रुपये से अधिक जमा हुए हैं। इससे इन खातों को काले धन को सफेद करने में उपयोग को लेकर आशंका बढ़ी है। सरकार और आयकर विभाग की इन खातों पर निगाह है।

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