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शांति के लिए सबसे बड़ा खतरा है आतंकवाद, हर तरह का सपोर्ट और फाइनेंस तुरंत बंद किया जाए- जेटली

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अमृतसर : साफ तौर पर पाकिस्तान की तरफ इशारा करते हुए 40 देशों के एक सम्मेलन ने लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकवादी ठिकानों को खत्म करने की वकालत की। ‘हार्ट ऑफ एशिया’ सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व समुदाय को संदेश दिया कि ‘चुप्पी और कोई कार्रवाई नहीं करने से आतंकवादियों और उनके आकाओं का मनोबल बढ़ेगा।’ अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने पाकिस्तान पर करारा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि उसने तालिबान सहित अन्य आतंकवादी समूहों को समर्थन एवं सुरक्षित ठिकाने मुहैया कराकर उनके देश के खिलाफ ‘अघोषित युद्ध’ की शुरुआत कर दी है। आतंकवाद से मुकाबले का मुद्दा इस सम्मेलन में हुई चर्चा के केंद्र में रहा। इस सम्मेलन में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज के साथ-साथ अमेरिका, रूस और क्षेत्रीय संगठनों सहित अन्य बड़ी शक्तियों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।133923-hoa700
ज्यादातर देशों ने आतंकवाद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की वकालत की, जबकि कुछ देशों ने कहा कि भारत और पाकिस्तान को अफगानिस्तान की मदद के लिए हाथ मिला लेना चाहिए। पाकिस्तान की तरफ से होने वाले कई आतंकवादी हमलों की पृष्ठभूमि में भारत ने ‘हार्ट ऑफ एशिया’ सम्मेलन की मेजबानी की। सम्मेलन में दो दिन की चर्चा के बाद अमृतसर घोषणा-पत्र को स्वीकार किया गया, जिसमें क्षेत्र के आतंकवादी पनाहगाहों और सुरक्षित ठिकानों को खत्म करने और साथ ही आतंकवादी नेटवर्कों के सभी वित्तीय, रणनीतिक समर्थन को बाधित करने की वकालत की गई। घोषणा-पत्र में कहा गया, ‘हम तालिबान, आईएसआईएल, दाएश और इसके सहयोगियों सहित अन्य आतंकवादी संगठनों, हक्कानी नेटवर्क, अल-कायदा, इस्लामिक मूवमेंट ऑफ उज्बेकिस्तान, लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, टीटीपी, जमात-उल-अहरार, जंदुल्ला तथा विदेशी आतंकी लड़ाकों की ओर से बड़े पैमाने पर की जाने वाली हिंसा के मद्देनजर हम क्षेत्र, खासकर अफगानिस्तान, के सुरक्षा हालात की गंभीरता के प्रति चिंतित हैं।’ ऐसा पहली बार हुआ है कि हार्ट ऑफ एशिया सम्मेलन के घोषणा-पत्र में लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद का जिक्र किया गया है। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य युद्ध प्रभावित अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण एवं स्थिरता के प्रयासों पर चर्चा करना है।

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