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गिद्ध कम होने से, अब मौत के बाद शव दफनाने का विकल्प चुन सकेंगे पारसी

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नवसारी में गुजरात के सबसे ज्यादा (2,000 से ज्यादा) रहते हैं। इसके आसपास के गांवों में भी अच्छी संख्या में पारसी रहते हैं। NSPZA के इंचार्ज प्रेज़िडेंट जिमी बाचा ने कहा कि इस फैसले से पारसियों को अपने परिजनों के शव को अपने घर के पास दफनाने में मदद मिलेगी, अब उन्हें दोखमेनाशिनी के लिए नवसारी नहीं आना पड़ेगा। बाचा ने कहा कि समुदाय की बेहतरी के लिए हमें बदलना होगा।गुजरात में पारसी समुदाय अंतिम संस्‍कार की अपनी सदियों पुरानी परंपरा को छोड़कर दफनाने की पद्धति को अपना सकता है। पा‍रसियों में मौत के बाद शव को पक्षियों और जानवरों के खाने के लिए छोड़ दिया जाता है। इसके तहत एक तय जगह पर शव को रख दिया जाता है। लेकिन गिद्धों की कम होती संख्‍या के कारण समुदाय इस परंपरा को बदल सकता है। द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, गुजरात के नवसारी में बैठक में शव को दफनाने के पक्ष में समुदाय के लोगों ने भारी समर्थन दिया।par1_0507

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