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हरियाणा में भारी पुलिस बंदोबस्त दिल्ली से बाहर नहीं जाएगी मेट्रो जाट आंदोलन के चलते

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नई दिल्ली/हरियाणा: जाट आरक्षण की मांग को लेकर 20 मार्च को दिल्ली घेराव के मद्देनजर मेट्रो का परिचालन आंशिक तौर पर प्रभावित रहेगा. दिल्ली पुलिस ने दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपॉरेशन (डीएमआरसी) से 20 मार्च को मेट्रो का परिचालन दिल्ली सीमा से बाहर एनसीआर के नोएडा, फरीदाबाद और गुड़गांव में नहीं करने को कहा है.

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दिल्ली पुलिस ने सोमवार (20 मार्च) को संसद का घेराव करने जा रहे जाट समुदाय के सदस्यों को रोकने के लिए दिल्ली में निषेधाज्ञा लगाने का निर्णय किया है और इस वजह से सोमवार से दिल्ली में लोगों का प्रवेश प्रतिबंधित हो जाएगा. दिल्ली पुलिस ने आंदोलनकारियों को रोकने के लिए सोमवार (20 मार्च) से राष्ट्रीय राजधानी में सीआरपीसी की धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लगाने का और सोमवार को लुटियंस दिल्ली में सख्त निगरानी रखने का निर्णय किया है.

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आरक्षण की मांग को लेकर जाट समुदाय ने एक बार फिर आंदोलन शुरू कर दिया है। अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति (एआईजेएएसएस) अपनी मांगों को पूरा करने के लिए अब हरियाणा से निकल कर दिल्ली तक पहुंचने वाली है। एआईजेएएसएस ने 20 मार्च को ससंद भवन का घेराव करने और राजमार्गों को अवरुद्ध करते हुए दिल्ली सीमा पर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन की चेतावनी दी है।क्या है मांग
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जाट आरक्षण हमेशा से जाट समूह की सबसे बड़ी मांग रही है। जाट समुदाय के लोगों की मांग है कि सरकारी नौकरियों और श‍िक्षण संस्थानों में उन्हें अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) कैटेगरी के तहत आरक्षण दिया जाए। इस मांग को लेकर ही जाट समूह आए दिन प्रदर्शन करते हैं जो कई मौकों पर हिंसक भी हो जाती है। कब से हो रहा आंदोलन अखिल भारतीय जाट महासभा के 2007 के सम्मेलन में बहुत से बड़े जाट नेताओं की मौजूदगी में आरक्षण की मांग को बल मिला और इसने एक बड़े आन्दोलन का रूप लिया। तब से जाट समुदाय ने कई बार आंदोलन किया। मार्च 2014 में लोकसभा चुनाव के लिए नोटिफिकेशन जारी होने से एक दिन पहले यूपीए सरकार ने जाट समुदाय के लिए आरक्षण को मंजूरी दे दी। लेकिन मार्च 2015 को सुप्रीम कोर्ट ने ओबीसी में जाट समुदाय को शामिल करने के केंद्र सरकार के फैसले को निरस्त कर दिया था। इसके बाद जाट समुदाय के लोग उग्र हो गए और फिर से आंदोलन शुरू कर दिया। पिछले साल जाट आंदोलन के दौरान हरियाणा 10 दिनों तक पूरी तरह से ठप था। इस आंदोलन के दौरान हुई हिंसा में करीब 30 लोग मारे गए थे और 200 से अधिक लोग घायल हुए थे। साथ ही करोड़ों की संपत्ति का भी नुकसान हुआ था।

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