Home उत्तर प्रदेश सूर्य नमस्कार की क्रियाएं नमाज से मिलती-जुलती,योग महोत्सव में बोले सीएम

सूर्य नमस्कार की क्रियाएं नमाज से मिलती-जुलती,योग महोत्सव में बोले सीएम

41
0
Listen to this article

लखनऊ,यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को सूर्य नमस्कार को नमाज का मिलता-जुलता स्वरूप बताया। उन्होंने कहा कि कुछ समाज को तोड़ने वाले लोगों की वजह से सूर्य नमस्कार का विरोध किया जाता रहा है। योगी ने कहा कि सूर्य नमस्कार में जितने आसन और मुद्राएं आती हैं वह मुस्लिम बंधुओं के नमाज पढ़ने की क्रिया से मिलती-जुलती हैं। योगी आदित्यनाथ ने राजधानी लखनऊ में आयोजित 3 दिवसीय योग शिविर में ये बातें कहीं। उन्होंने बुधवार को विपक्षी पार्टियों पर तंज कसते हुए कहा कि सूर्य नमस्कार और नमाज के मिलते-जुलते स्वरूप के बारे में किसी ने प्रचार नहीं किया। उन्होंने कहा, ‘कुछ लोगों को योग में नहीं, भोग में विश्वास है। ये वही लोग हैं, जिन्होंने समाज को तोड़ा है और जाति धर्म के आधार पर बांटा है।’ उन्होंने कहा कि योग कई बीमारियों में लाभप्रद है। योग करने वाला व्यक्ति शुरू से अंत तक स्वस्थ रहता है। यूपी सरकार योग को जन-जन तक पहुंचाने का काम करेगी।

चैनल पर पहले योग गुरु बाबा रामदेव से योगी आदित्य नाथ के बयान का बचाव करते हुए कहा है कि सूर्य नमस्कार और नमाज एक जैसे ही हैं। बाबा रामदेव ने लाइव सूर्य नमस्कार करके भी दिखाया और कहा कि टीवी एंकर खुद फैसला कर लें कि नमाज और सूर्य नमस्कार एक हैं कि नहीं? साथ ही रामदेव ने कहा था कि हिंदू धर्म और इस्लाम दोनों ही एक ही ईश्वर में यकीन रखते हैं और दुनिया के सभी धर्मों का मूल एक है।

योगी आदित्यनाथ के भाषण की महत्वपूर्ण बातें

  • पहले योग को भारत के भीतर सांप्रदायिक माना जाता था. 2014 से पहले योग महोत्सव की बात की जाती तो इसे सांप्रदायिक करार दिया जाता.
  • सूर्य आसन में हमारे जितने आसन हैं और जितनी मुद्राएं आती हैं वे मुस्लिम समुदाय के नमाज से मिलती-जुलती हैं.
  • जिन्होंने समाज को जाति, मजहब और पंथ के आधार पर बांटा है, वे योग पर कैसे विश्वास कर सकते हैं.
  • दिल्ली में जब अमित भाई ने सीएम बनने के लिए कहा तो मेरे पास एक जोड़ी ही कपड़े थे. दिल्ली से सीधा विधायक दल की बैठक में पहुंचा था.
    • 21 जून को भारत के प्रधानमंत्री मोदी जी ने योग को दुनिया का दिवस बना दिया. 21 जून को सूर्य की सबसे की सबसे तीखी रोशनी पृथ्वी पर पड़ती है और हम उस ऊर्जा को संचित कर सकें.
    • हम संतों के लिए एक लंगोट ही काफी है.
    • सड़क से लेकर सदन तक की यात्रा की है और मुझे यूपी की बीमारियों के बारे में पता है.
    • 2014 के बाद भारत दुनिया की उभरती हुई ताक़त के रूप में सामने आया है.
    • आज़ादी के बाद से भारत ने बल और वैभव के आधार दुनिया में पहचान नहीं बनाई.
    • जननी और जन्मभूमि के साथ हमारा संबंध बना रहेगा तो हम आगे बढ़ते रहेंगे.
    • 70 सालों में हम एक ढंग का विश्वविद्यालय नहीं बना पाए. दुनिया के टॉप विश्वविद्यालयों में भारत का एक भी नहीं है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here