Home उत्तर प्रदेश एंटी रोमियो अभियान को अदालत ने ठहराया सही

एंटी रोमियो अभियान को अदालत ने ठहराया सही

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लखनऊ। एंटी रोमियो स्क्वॉड पर योगी सरकार को एक बड़ी राहत मिली है। आज इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेच ने एंटी रोमियो स्क्वॉड के खिलाफ जनहित याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि यूपी पुलिस अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर रही है। गौरतलब है कि यूपी में बीजेपी को मिले प्रचंड बहुमत के बाद योगी आदित्यनाथ को सीएम बनाया गया। सीएम पद संभालते ही योगी आदित्यनाथ ने पुलिस के एंटी रोमियो दल का गठन किया। इसे महिलाओं की सुरक्षा के उद्देश्य से बनाया गया था।
यूपी एंटी रोमियो स्क्वॉड के कई ऐसे मामले सामने आए जिसमें पुलिस ने पति-पत्नी और भाई-बहन को भी एकसाथ देखकर परेशान किया। इन्हीं सब को देखते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में एंटी रोमियो स्क्वॉड के खिलाफ एक जनहित यातिका दायर की गई थी। कोर्ट ने आज इसे खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि पुलिस अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर रही है। ज्यादातर पुलिसकर्मी एंटी रोमियो अभियान की बारीकियों से वाकिफ नहीं थे, लिहाजा कप्तान ने उनका मार्गदर्शन किया। हालांकि, जब उन्होंने पूछा कि एंटी रोमियो अभियान क्या है तो सही से कोई जवाब नहीं दे सका। सिर्फ बताया कि छेड़छाड़ करने वाले लड़कों को पकड़ना है। गुरुवार को रिजर्व पुलिस लाइन में कप्तान ने एंटी रोमियो स्क्वायड को इसीलिए बुलाया था, ताकि उन्हें अभियान की पूरी जानकारी दी जा सके। शहर के हर थाने से एंटी रोमियो स्क्वायड के साथ नोडल अफसर एसपी सिटी भी लाइन में पहुंचे थे। एसएसपी ने बताया कि महिलाओं, छात्राओं पर अभद्र टिप्पणी, सड़क से लेकर कालेजों के बाहर छेड़खानी की रोकथाम के लिए गुंडा एक्ट की कार्रवाई के साथ ही हर थाने में एंटी रोमियो स्क्वायड का गठन किया गया है। एंटी रोमियो स्क्वायड में एक सब इंस्पेक्टर, दो आरक्षी या मुख्य आरक्षी के साथ ही एक से दो महिला आरक्षियों को भी शामिल किया गया है। एंटी रोमियो स्क्वायड के काम की बात करते हुए उन्होंने कहा कि स्कूल, कॉलेज या सार्वजनिक स्थलों पर ये एक्टिव रहेगी। कहा, हमारी पूरी कोशिश है कि ऐसे अवाछित तत्व या शोहदे जो लड़कियों और महिलाओं को परेशान करते हैं, उन्हें रोका जाए और अगर जरूरत पड़े तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। कालेजों के बाहर घूमने वालों की आइडी भी देखी जा सकती है। अगर वहां घूमते हुए कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाता है तो उसे थाने लाया जाए। इस दौरान उसके माता-पिता या परिजनों को भी बुलाकर काउंसिलिंग की जाए। वहीं इस दौरान अगर कोई लड़की शिकायत करती है तो फौरन कार्रवाई की जाए। पुलिस का मकसद संदिग्ध युवकों को टोकना है और महिलाओं व लड़कियों में ये विश्वास जगाना है कि पुलिस उनकी सुरक्षा के लिए है। इस पूरी कार्रवाई की वीडियो रिकॉर्डिग भी की जाए, ताकि अगर मामला अदालत पहुंचता है तो पुलिस पर्याप्त साक्ष्य पेश कर सके। किसी भी कार्रवाई में पुलिस अपने बर्ताव का विशेष ख्याल रखेगी, ताकि पूछताछ के दौरान किसी को परेशानी न हो। बर्ताव को लेकर सख्त हिदायत दी गई। कप्तान ने कहा कि हमारा मकसद किसी को डराना, थप्पड़ या मुर्गा बनाना नहीं। यह भी बताया कि आइजी से लेकर डीआइजी तक सभी कार्य की समीक्षा करेंगे।

खुले हैं कानून के दरवाजे

किसी मामले में पुलिस की ज्यादती सामने आती है तो कानून के दरवाजे खुले हैं। सरकार को पुलिस बल बढ़ाना चाहिए। तमिलनाडु में 1998 में महिलाओं का उत्पीड़न रोकने के लिए कानून बनाया गया और गोवा में भी 2013 से ऐसा ही कानून है। यदि पुलिस दल के नामकरण पर आपत्ति है तो सरकार उसे बदलने को स्वतंत्र है : हाई कोर्ट

 

 

 

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