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अयोध्या केस में अहम दिन, आउट ऑफ कोर्ट सेटलमेंट पर SC में जवाब देंगे पक्षकार

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नई दिल्ली। अयोध्या में राम मंदिर औऱ बाबरी मस्जिद विवाद मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में इस बात का फैसला आएगा कि इस मामले की सुनवाई हर रोज होगी या नहीं। बीजेपी के राज्यसभा सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी ने इस मामले पर रोजाना सुनवाई के लिए याचिका दायर की है। बीजेपी सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी की अर्जी पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने कहा था राम मंदिर और बाबरी मस्जिद का मामला धर्म और आस्था का मामला है। इसलिए दोनों पक्षों (हिन्दू पक्ष और मुस्लिम पक्ष) को मिलकर इस मामले को सुलझाया जाना चाहिए।

आज इस पर अपना फैसला सुना सकता है कि राम जन्मभूमि विवाद पर रोज सुनवाई हो या नहीं। भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी की राम जन्मभूमि विवाद पर तुरंत सुनवाई की मांग वाली याचिका पर 21 मार्च को सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को आपस में मिलकर विवाद सुलझाने को कहा था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यह एक संवेदनशील और भावनात्मक मुद्दा है और यह बेहतर होगा कि इस मुद्दे को मैत्रीपूर्ण ढंग से सुलझाया जाए। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि इसे सुलझाने के लिए सभी पक्ष सर्वसम्मति के लिए एक साथ बैठें।

सुप्रीम कोर्ट से अयोध्या विवाद का समाधान बातचीत से करने की सलाह के बाद श्रीराम जन्मभूमि के पक्षकार व अखिल भारतीय श्रीपंच रामानंदीय निर्वाणी अनी अखाड़ा हनुमानगढ़ी के श्रीमहंत धर्मदास सुप्रीम कोर्ट के समक्ष राम मंदिर विवाद के हल के लिए अपना नया फार्मूला पेश करने के लिए दिल्ली रवाना हो गए।  बातचीत में महंत धर्मदास ने बताया कि भाजपा के वरिष्ठ नेता सुब्रहमण्यम स्वामी की याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट 31 मार्च की तिथि तय की है। वह भी इस दिन सुप्रीम कोर्ट में पेश होकर अपनी ओर से सुलह के लिए अर्जी देंगे।
 महंत धर्मदास ने कहा राम जन्मभूमि का मसले पर कोर्ट को यह भी ध्यान रखना चाहिए की मुख्य बिंदु पर ही विचार हो, किसी भावना से ऑर्डर नहीं किया जा सकता। 10 हजार पेज की फाइल रखने से काम नहीं चलेगा, बीच का रास्ता निकालना पड़ेगा।
श्रीराम जन्मभूमि पर कुछ संत फैला रहे भ्रम: ज्ञानदास
हनुमानगढ़ी सागरिया पट्टी के महंत ज्ञानदास ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट से अयोध्या विवाद का समाधान बातचीत से करने की सलाह के बाद कुछ संतों का बयान आ रहा है कि श्रीराम जन्मभूमि पर रामलला पधराए गए थे। कहा कि वर्ष 1949 में श्रीराम जन्मभूमि पर रामलला का प्राकट्य हुआ था। उन्होंने कहा कि संत ऐसी गलत बयानी से बाज आएं।

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