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60 दिनों में अपील करने का अधिकार है कुलभूषण जाधव मामला: मौत की सजा को पाकिस्तान ने ठहराया सही,

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नई दिल्ली ,भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव पर पाकिस्तान में मुकदमा चलाए जाने के तरीकों पर यहां रक्षा जानकारों ने सवाल उठाए हैं। उनका मानना है कि इस मामले में अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ काम किया गया है। भारत में सैन्य मामलों के वरिष्ठ वकील नवदीप सिंह का मानना है कि पाकिस्तानी सेना की ओर से कोर्ट मार्शल के जरिये कुलभूषण जाधव का मुकदमा चलाना गलत है। यह मुकदमा आर्मी की फील्ड जनरल कोर्ट मार्शल के जरिये चलाया गया,

जिसका मतलब यह है कि सैन्य जूरी कानूनी तौर पर प्रशिक्षित नहीं थी। वह स्वतंत्र और निष्पक्ष भी नहीं थी। वह पूरी तरह से पाकिस्तानी सेना के कमांड और कंट्रोल में काम करती है। यह इंटरनैशनल कन्वेंशन ऑफ सिविल एंड पॉलिटिकल राइट्स के आर्टिकल 14 की भावना के खिलाफ है।पाकिस्तान में पिछले दिनों कथित भारतीय जासूस कुलभूषण जाधव को एक फ़ौजी कोर्ट ने मौत की सज़ा सुनाई. लेकिन वह पहले ऐसे भारतीय नागरिक नहीं हैं जिन्हें जासूसी के आरोप में पाकिस्तान में सज़ा सुनाई गई है. हालांकि वो शायद भारतीय सेना के पहले अधिकारी थे जो जासूसी के आरोप में गिरफ़्तार हुए. पाकिस्तान में पिछले चार दशकों में एक दर्जन से अधिक ऐसे लोगों को सज़ा हुई है जिन्हें कथित तौर पर भारतीय जासूस समझा जाता है. इनमें कुछ को मौत की सज़ा सुनाई गई, लेकिन उनकी सज़ा पर कभी अमल नहीं किया गया. अलबत्ता उनमें कई लोग जेल में ही गुज़र गए.

कुलभूषण जाधव शायद पहले ऐसे भारतीय ‘जासूस’ थे जो पंजाब से बाहर पकड़े गए. अतीत में कई बार भारतीय नागरिक पंजाब के विभिन्न क्षेत्रों से गिरफ्तार हुए हैं और उनमें से अधिकांश का संबंध भारतीय पंजाब से था.

 

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