Home उत्तर प्रदेश जहां नक्सलियों ने खेली खून की होली,सुकमा: ग्राउंड जीरों की तस्वीरें,

जहां नक्सलियों ने खेली खून की होली,सुकमा: ग्राउंड जीरों की तस्वीरें,

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अप्रैल का यह महीना केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के लिए बेहद बुरा रहा है। इस माह इसे इतनी जनहानि उठानी पड़ी, जो बीते सात वर्षों में सर्वाधिक है। पिछले 11 मार्च को भी माओवादी हमले में सीआरपीएफ के 12 जवान शहीद हुए थे, लेकिन वो घटना इसलिए सुर्खियों में नहीं आई, क्योंकि उसी दिन उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव नतीजे आए थे और सारा देश उसी की चर्चाओं में डूबा था।

घटना स्थल की तस्वीर
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पुलिस सूत्रों के मुताबिक वे भलीभांति जानते हैं कि सीआरपीएफ किस तरह अपनी गतिविधियां चलाता है। वे जानते हैं कि सीआरपीएफ के ज्यादातर जवानों को न्यूनतम संसाधनों के साथ विकट परिस्थितियों में रहना पड़ता है। इन दुर्गम वन्यक्षेत्रों में इन जवानों के लिए माओवादी गतिविधियों की अनिश्चितता के अलावा मच्छर भी बड़ी चुनौती पेश करते हैं, जिनसे मलेरिया जैसी बीमारियां फैलती हैं। वे इसलिए भी आशंकित रहते हैं क्योंकि उन्हें पता होता है कि लोग हर वक्त उन पर निगाह रख रहे हैं, लेकिन उन्हें ये पता नहीं होता कि ऐसे लोग उनके शुभचिंतक हैं या माओवादी! उनके इसी डर का फायदा ये माओवादी उठाते हैं। पहले के मुकाबले आज उनकी तकनीक तक कहीं ज्यादा पहुंच है। अब वे पेड़ों के नीचे प्रेशर बम भी लगाने लगे हैं। जैसे ही कोई जवान इन पेड़ों की छांव तले विश्राम के लिए रुकता है, इनमें विस्फोट हो जाता है। इसके अलावा वे पुलिस वाहनों को विस्फोट से उड़ाने के लिए बड़े पैमाने पर आईईडी विस्फोटकों का भी इस्तेमाल करते हैं। यहां बारूदी सुरंगों की टोह लेने वाले उपकरण भी कई बार निष्प्रभावी साबित होते हैं, क्योंकि ये इलाका लौह अयस्क से समृद्ध है और इस वजह से यहां जमीन के नीचे किसी बम या विस्फोटक की पहचान करने में मुश्किल होती है। इसके अलावा गर्मी के सीजन में ये इलाका काफी शुष्क हो जाता है और स्नानादि के लिए पानी उपलब्ध नहीं होता। दूसरे शब्दों में कहें तो जवानों को यहां ना सिर्फ माओवादियों, बल्कि प्रकृतिजन्य मुश्किलों से भी जूझना होता है।

घटना स्थल की तस्वीर
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