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अगर रात में लड़कियां निकलेंगी तो ऐसी घटनाएं होंगी। रेप के लिए आदमी से ज्यादा वह जिम्मेदार होगी।

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नई दिल्ली,12 दिसंबर, 2012 को दिल्‍ली के पॉश इलाके में चलती बस में हुए सामूहिक बलात्‍कार ने देश की राजधानी को हिला कर रख दिया. महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों के प्रति लोगों में बढ़ रहे गुस्‍से को जैसे इस घटना ने आखिरी उबाल दे दिया और दिल्‍ली से लेकर देश के हर इलाके में इस गुस्‍से का लावा फैलना शुरू हो गया. 5 साल पहले हुई इस घटना के आरोपियों को फांसी की सजा होगी या नहीं, यह आज सुप्रीम कोर्ट तय करेगा. गैंगरेप के चार दोषियों मुकेश, अक्षय, पवन और विनय को साकेत की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई थी, जिस पर 14 मार्च  2014 को दिल्ली हाईकोर्ट ने भी मुहर लगा दी थी. दोषियों की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा पर रोक लगा दी थी.

चारों दोषियों मुकेश सिंह, अक्षय ठाकुर, विनय कुमार और पवन गुप्ता

2012 के निर्भया गैंगरेप केस के दोषियों की मानसिकता किस तरह की थी, इसका अंदाजा एक रेपिस्ट के बयान से लगाया जा सकता है। जेल में बंद एक दोषी मुकेश सिंह ने एक डॉक्युमेंट्री में कहा था- “अगर रात में लड़कियां निकलेंगी तो ऐसी घटनाएं होंगी। रेप के लिए आदमी से ज्यादा वह जिम्मेदार होगी।” बता दें कि 16 दिसंबर, 2012 की रात दिल्ली में चलती बस में निर्भया से 6 लोगों ने गैंगरेप किया था। बस मुकेश चला रहा था। मारपीट और बस से फेंके जाने की वह से निर्भया गंभीर रूप से घायल हो गई थी। सिंगापुर में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस केस के चारों दोषियों मुकेश सिंह, अक्षय ठाकुर, विनय कुमार और पवन गुप्ता की फांसी की सजा बरकरार रखी है।

निर्भया रेप केस के चार साल बाद यह सुनामी कहां गुम हो गयी है. निर्भया रेप केस एक प्रतीक एक मिसाल बन गया था,  क्या वास्तव में निर्भया के साथ इंसाफ हुआ है. निर्भया रेप केस के बाद निर्भया फंड बनाया गया था. इसमें केन्द्र सरकार ने हर साल एक हजार करोड़ रुपये डालने का एलान किया था. पिछले चार सालों में चार हजार करोड़ रुपया इक्टठा हो चुका है लेकिन इसका 98 फीसद से ज्यादा का इस्तेमाल ही नहीं हो सका है. इस पैसे से रेप पीड़ितों की मदद की जानी थी. राज्यों में अलग से महिला थाने खुलने में मदद की जानी चाहिए थी. लेकिन हर साल निर्भया फंड में एक हजार करोड़ रुपये जुड़ रहे हैं और यह पैसा यूं ही पड़ा हुआ है. अब आप ही बताइए क्या निर्भया को इंसाफ मिला है.

निर्भया रेप केस के बाद रेप के सभी मामले फास्ट ट्रैक कोर्ट में भेजे जाने की बात हुई थी लेकिन आज भी रेप के अधिकांश मामले सामान्य अदालतों में ही चल रहे हैं. एक केस को अंजाम तक पहुंचने में औसतन आठ से दस साल लग जाते हैं. रेप मामलों में 23 फीसद आरोपियों को ही सजा हो पाती है. बाकी के आरोपी छूट जाते हैं. अब आप ही बताइए कि क्या निर्भया के साथ इंसाफ हुआ है.

आज भी हमारे देश में कानून बनते हैं लेकिन तोड़नेवाले भी उसी ढंग से कानून को अपने तरीके से काम करने पर मजबूर कर देते हैं

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