Home दुनिया 15 मई को करेगा कुलभूषण जाधव मामले की सुनवाई-इंटरनेशनल कोर्ट

15 मई को करेगा कुलभूषण जाधव मामले की सुनवाई-इंटरनेशनल कोर्ट

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भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी जाधव को पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने कथित जासूसी के आरोप में मौत की सजा सुनाई है। इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ) भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव मामले की अगली सुनवाई 15 मई को करेगा। ICJ ने पाकिस्तान द्वारा जाधव को सुनाई गई फांसी की सजा पर मंगलवार को रोक पर लगा दी थी। बता दें कि जाधव को ईरान और पाकिस्तान की सीमा से तालिबान ने अगवा कर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ को सौंप दिया था। पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने 11 अप्रैल को जासूसी का आरोप लगाकर जाधव को फांसी की सजा सुनाई थी

भारत न्याय का पक्ष लेकर गया, इसलिए अंतरराष्ट्रीय न्यायालय  से उसे राहत मिली। हेग स्थित अदालत ने पाकिस्तान में मृत्युदंड पाए भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव को फांसी देने पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि  सभी विकल्पों पर विचार नहीं हो जाता और इस मामले में वह अपना अंतिम आदेश जारी नहीं करता, जाधव को सजा-ए-मौत ना दी जाए। आईसीजे संयुक्त राष्ट्र के 1945 के घोषणापत्र के तहत चलने वाली संस्था है। संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य इससे संबंधित हैं। पाकिस्तान भी संयुक्त राष्ट्र का सदस्य है। इसलिए उसे भी इस निर्णय को मानना चाहिए।  तकनीकी स्थिति यह है कि हर सदस्य देश ने यह सुस्पष्ट घोषणा कर रखी है  मामलों में वह आईसीजे के अधिकार-क्षेत्र को स्वीकार करेगा। आईसीजे निर्णय या आदेश देते वक्त इस दायरे को जरूर ध्यान में रखता है। उसने जाधव के मामले में हस्तक्षेप करने की भारत की गुजारिश मंजूर की, तो ऐसा उसने अपने अधिकार-क्षेत्र पर गौर करते हुए ही किया। यानी कहा जा सकता है कि भारत अपना पक्ष मजबूती से रखने में सफल रहा। भारत ने 46 साल बाद आईसीजे की पनाह ली है। यहां मिली कामयाबी बताती है कि अगर ठोस तैयारी से अपनी बात रखी जाए, तो पाकिस्तान जैसे नियम-कायदे ना मानने वाले देश को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अलग-थलग किया जा सकता है।जाधव की फांसी पर अभी सिर्फ रोक लगी है। उनकी रिहाई का रास्ता अभी साफ नहीं हुआ है। पाकिस्तान ने संदिग्ध तरीकों से जाधव को गिरफ्तार किया। उससे भी ज्यादा संदिग्ध ढंग से वहां की एक सैन्य अदालत ने जासूसी व तोड़फोड़ की गतिविधियों में शामिल रहने के आरोप में उन्हें सजा सुनाई। कहना कठिन है कि इन सबके पीछे मकसद सचमुच जाधव की जान लेना है। बल्कि कई कूटनीतिक विशेषज्ञों की राय है कि उन्हें दुष्प्रचार के एक पत्ते के रूप में पकड़ा गया है। उद्देश्य दुनिया को बताना है कि भारतीय एजेंसियां पाकिस्तान के अंदर विध्वंसकारी गतिविधियों में शामिल हैं। किंतु न केवल भारत, बल्कि अफगानिस्तान और अब ईरान में भी आतंकवाद प्रायोजित करने के पाकिस्तानी तौर-तरीके बेनकाब हो चुके हैं। तो जवाब में पाकिस्तान ने जाधव जैसे निर्दोष व्यक्ति को उत्पीड़ित करने की अमानवीय हरकत की। ऐसा ही कुछ साल पहले उसने सरबजीत सिंह के साथ किया था। मगर अब उसे आईसीजे में जाधव के खिलाफ साक्ष्य देना होगा। भारत के लिए यह एक और मौका है, जब पाकिस्तान के नापाक तौर-तरीकों को वह दुनिया के सामने बेपर्दा कर दे। इसलिए आरंभिक राहत से निश्चिंत होने की जरूरत नहीं है। जरूरत कारगर वैधानिक तैयारी की है,  जाधव की रिहाई संभव हो, साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान को शर्मसार किया जा सके।

 

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