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मुस्लिमों के लिए नया कानून लाएंगे: केंद्र ,SC ने तीन तलाक को खारिज किया तो

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केंद्र ने सोमवार को न्यायालय से कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट तीन तलाक को अवैध एवं असंवैधानिक करार देता है तो सरकार मुसलमानों में विवाह और तलाक के नियमन के लिए विधेयक लेकर आएगी। तीन तलाक केस में केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कोर्ट में कहा कि तीन तलाक से मुस्लिम महिलाओं के समानता के अधिकार का हनन होता है। उन्होंने कहा कि तलाक के सभी प्रारुप प्रकृर्ति के खिलाफ हैं। उन्होंने आगे कहा कि तलाक की मामले में मुस्लिम महिलाओं को समुदाय में बराबरी का दर्जा नहीं मिला है।

अगर ‘तीन तलाक’ अवैध घोषित होता है तो विवाह और तलाक को तय करने वाला कानून लाया जाएगा : केंद्र

अटॉर्नी जनरल ने अलग-अलग देशों में वैवाहिक कानूनों से जुड़ी लिस्ट भी कोर्ट को दी। अटॉर्नी जनरल ने कहा कि इंडोनेशिया, श्रीलंका, ईरान , इराक , टर्की , जैसे देशों के अपने वैवाहिक कानून हैं। पाकिस्तान, बाग्लादेश जैसे कट्टरपंथी देश भी अब सुधार की ओर बढ़ रहे हैं, पर हम धर्मनिरपेक्ष देश होने के बावजूद इन मसलों पर आज तक बहस ही कर रहे हैं। सरकार के पुराने पक्ष को दोहराते हुए अटॉर्नी ने ये भी कहा कि ट्रिपल तलाक़ जैसी परम्परा, सविधान में दिये गए समता के मूल अधिकार का उल्लंघन करती हैं। इसके चलते मुस्लिम महिलाओ को दूसरे धर्म की महिलाओं के जैसा स्टेटस नहीं हासिल हो पाया है। शादी और तलाक कानून का हिस्सा हैं, इसका धर्म से कोई वास्ता नहीं। हम कैसे जिएं, इस पर नियम बनाए जा सकते है और कुरान की व्याख्या करना कोर्ट का काम नहीं,अदालत को तय करना है कि पर्सनल लॉ संविधान की ओर से दिए गए लैंगिक समानता और समता के अधिकार की कसौटी पर खरे उतरे।

इस पर चीफ जस्टिस ने टिप्पणी की कि हम संविधान के संरक्षक होने के साथ अल्पसख्यको के अधिकारों के भी संरक्षक हैं, आप जो कह रहे हैं, वो अल्पसख्यको के अधिकार को पूरी तरह ख़त्म कर देगा।

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