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एक और निर्भया उत्तर प्रदेश मे ,कौन इंसाफ दिलाएगा ? कहाॅ है समाजिक आन्दोलनो से जुड़े लोग महिला आयोग बहुत सारी स्वयंसेवी संस्थाऐ ?

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आगरा के बाह क्षेत्र में दिनांक 8-5-2017 को घर से गायब हुई बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा रितु कुशवाह का शव ग्राम गढ़ा पचौरी के निकट रेलवे ट्रैक पर पड़ा मिला था,उत्तर प्रदेश की कर्मठ,मेहनती व जुझारू पुलिस ने हत्या को दुर्घटना बता कर मामला रफा दफा करके अपना पिंड छुड़ा लिया। जबकि मृतका के परिवार वालों ने गांव के ही एक युवक पर हत्या का आरोप लगाया व पुलिस से मामला दर्ज करने की मांग की, घरवालों का कहना था कि आरोपी युवक पिछले कई दिनों से उनकी पुत्री को परेशान कर रहा था उन्होंने पूर्व में भी पुलिस को इसकी जानकारी दी थी किंतु आरोपी युवक दबंग व राजनैतिक पहुँच रखने वाला था इसलिये पुलिस ने उनकी कोई सहायता नही की, अब जबकि छात्रा की हत्या हो चुकी है तो ना तो पुलिस कोई कार्यवाही कर रही है और न ही कोई राजनैतिक सहायता उस पीड़ित परिवार को मिल रही है ,स्वजातीय संगठन व अपने आपको समाज का हितैषी कहने वाले नेताओं के हाथ पैरों को तो चुनाव के बाद जैसे जंग सी लग गयी है।

स्थानीय लोगो की मदद से पीड़ित परिवार ने थाने का घेराव किया व क्षेत्र की विधायिका के दरवाजे पर हाथ पैर जोड़कर अपनी नाक रगड़कर न्याय की भीख मांगी तब जाकर बाह की विधायिका ने पुलिस से कार्यवाही करने को कहा लेकिन हत्या का मामला आज तक दर्ज नही हुआ है।
इसे रितु कुशवाह का दुर्भाग्य ही कहेंगे की जिस प्रदेश की कानून व्यवस्था न्याय व्यवस्था व महिला सुरक्षा का जिम्मा खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के हाथों में है बावजूद इसके घर मे शौचालय के अभाव में शौच के लिये घर से बाहर गयी हुई छात्रा रितु कुशवाह की निर्मयी तरीके से हत्या कर दी जाती है और फिर उसकी हत्या को उत्तर प्रदेश की पुलिस हादसा करार देती है और इस पूरे घटनाक्रम के बाद न्याय की मांग सम्बन्ध में योगी जी के नवनिर्वचित नेताओं की भूमिका तो नगण्य ही रहती है।

लोकतंत्र के चौथा स्तम्भ कहे जानी वाली मीडिया भी अब जाती-बिरादरी देखकर ही अपनी खबर छापती है तभी तो रितु कुशवाह को अखबारों की स्याहियां रितु कुशवाह के लिये उचित प्रकार से न्याय की मांग नही कर सकीं क्योंकि उसकी हत्या की खबर किसी अखबार में छपने वाले और tv में आने वाले किसी भ्रामक विज्ञापन से सस्ती थी। शायद उसकी औकात दिल्ली वाली निर्भया से कम रही होगी या रितु कुशवाह असंगठित कुशवाह समाज से आती थी।
समाज के नाम पर समाज के ही लोगो को लूटने वाले स्वजातीय भूखे नंगे नेताओं ने भी मृतका रितु कुशवाह को इंसाफ दिलाने में दिलचस्पी नही दिखाई क्योंकि जिस रितु कुशवाह का परिवार खुद दो वक्त की रोटी का मोहताज हो वो भला ऐसे समाज के दल्लो की फीस कहाँ से चुकाएगा,
और आड़े टेढ़े मूँह बनाकर फेसबुक पर आशिक़ाना शायरियों के साथ अपनी फोटो डालकर फोकट के likes और comments झपटने वाले स्वजातीय अंडर ट्रेनी नये नवेले नेताओं से तो इतना भी नही हुआ कि सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के माध्यम से समाज की बेटी को इंसाफ दिलाने की ही मांग कर लें क्योंकि उनकी समाज सेवा तो सिर्फ बड़े बड़े मंच पर जाकर माला डलवाने और फोटो खिंचवाने तक ही सीमित है।

 

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