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व्यक्ति में यदि एक भी गुण हो, तो उसके सारे दोष छिप जाते हैं।

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केवल सुन्दरता के आधार पर किसी स्त्री से विवाह नहीं करना चाहिए. विवाह करने से पहले उसके संस्कार,गुण-अवगुण, लक्षण आदि बातें जान लेनी चाहिए. अगर स्त्री सुंदर नहीं है लेकिन गुणी है तो उससे शादी कर लेनी चाहिए।
राजा, वेश्या, यमराज, अग्नि, चोर, बालक, याचक और लोगों को सताने वाले दूसरों का कष्ट नहीं समझते हैं।
भोजन, नींद, भय, और सन्तान की उत्पत्ति ये सारी बातें मनुष्य और पशुओं में एक जैसी होती है।
मधुर भाषा सभी को प्रिय होती है, इसलिए हमें मीठा बोलना चाहिए।
सही व्यक्ति को दिया गया दान और अभयदान व्यक्ति के मर जाने के बाद भी समाप्त नहीं होता है।
दूसरे के शरण में रहने से व्यक्ति का सम्मान घटता है।
गलत तरीके से कमाया हुआ धन केवल कुछ वर्ष तक हीं लाभ पहुंचाता है, कुछ वर्षों के बादवह कष्ट पहुँचाने लगता है।
निर्धन को सभी छोड़कर चले जाते हैं, लेकिन उसी व्यक्ति के धनवान हो जाने पर फिर सभी लोग वापस चले आते हैं. अर्थात इस संसार में धन से बड़ा सहयोगी कोई नहीं है।
गंदे कपड़े पहनने वाले, दांतों की सफाई न करने वाले, अधिक भोजन करने वाले, कठोर शब्द बोलने वाले, सूर्योदय और सूर्यास्त में सोने वाले व्यक्ति को लक्ष्मी त्याग देती है. भले हीं वह साक्षात भगवान विष्णु हीं क्यों न हों।
दुष्ट और काँटों से बचने के दो हीं तरीके होते हैं, या तो उन्हें जूतों से कुचल दिया जाए, या उनका त्याग कर दिया जाए।
मनुष्य को सही समय आने पर हीं अपनी बात बोलनी चाहिए, तभी उसकी बात को महत्व मिलता है।
पूरे संसार को वश में वही व्यक्ति कर सकता है, जो किसी की निंदा नहीं करता हो.
राजा, अग्नि, गुरु, और स्त्री इनके ज्यादा पास जाने से हानि हो सकती है. लेकिन इनसे दूर रहकर भी लाभ नहीं पाया जा सकता है। इसलिए इनसे संतुलित व्यवहार करना चाहिए. अर्थात इनसे न तो ज्यादा दूरी रखनी चाहिए और न अधिक

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