Home दिल्ली देश के नाम राष्ट्रपति कोविंद का संबोधन

देश के नाम राष्ट्रपति कोविंद का संबोधन

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देश के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर देश को संबोधित कर राष्ट्रपति रामनाथ  कोविंद ने कहा कि  देश को गांधी जी से अहिंसा की राह पर चलते हुए जंग जीतने की प्रेरणा मिली.राष्ट्रपति कोविंद ने राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा कि गांधीजी ने जिन सिद्धांतों को अपनाने की बात कही थी, वे हमारे लिए आज भी प्रासंगिक हैं,

स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रपति के तौर पर यह उनका पहला संबोधन है. पिछली 25 जुलाई को ही कोविंद ने देश के 14वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली है और वह देश के दूसरे दलित राष्ट्रपति हैं. उनसे पहले के आर नारायणन देश के पहले दलित राष्ट्रपति बने थे.

नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हे आजादी दूंगा’का आह्वान किया

नेहरूजी ने हमें सिखाया कि भारत की सदियों पुरानी विरासतें और परंपराएं आधुनिक समाज के निर्माण के प्रयासों में सहायक हो सकती हैं.

सरदार पटेल ने हमें राष्ट्रीय एकता और अखंडता के महत्व के प्रति जागरूक किया.

बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर ने हमें संविधान के दायरे में रहकर काम करने और ‘कानून के शासन’ की अनिवार्यता के विषय में समझाया.

– महात्मा गांधी ने समाज और राष्ट्र के चरित्र निर्माण पर बल दिया था. उन्होंने जिन सिद्धांतों को अपनाने की बात कही थी वे आज भी प्रासंगिक है.

गांधी जी अकेले नहीं थे, उनके साथ नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसे कई महापुरुष थे. जब बोस ने ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा’ तो हजारों ने अपनी जान झोंक दी थी.

अपने बचपन में देखी गई गांव की एक परंपरा मुझे याद है, जब गांव में किसी बेटी का विवाह होता था तो हर परिवार अपनी जिम्मेदारी बांट कर सहयोग करता था. वह उस वक्त गांव की बेटी हो जाती थी. हर परिवार कुछ न कुछ मदद जरूर करता था. कोई अनाज, कोई सब्जी. यदि आप जरूरत के समय अपने पड़ोसियों की मदद करेंगे तो स्वभाविक है कि वे भी आपकी मदद के लिए आगे आएंगे.

हमें जिस पीढ़ी ने स्वतंत्रता दिलाई उसका दायरा बहुत व्यापक था. उसमें महिलाएं भी थीं, पुरुष भी थे. आज देश के लिए अपने जीवन का बलिदान करने वाले से प्रेरणा लेने का का समय है.

 

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