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यूपी- बिहार में बाढ़ से हालात खराब,मरने वालों का आंकड़ा 300 के पार

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बिहार में बाढ़ का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा. बाढ़ की वजह से मरने वालों की तादाद बढ़कर 300 तक पहुंच गई है जबकि 18 जिलों के करीब 1 करोड़ 26 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं. जिन जिलों में बाढ़ ने सबसे अधिक नुकसान पहुंचाया है वे हैं किशनगंज, अररिया, पूर्णिया, कटिहार, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, दरभंगा, मधुबनी, मुजफ्फरनगर, सीतामढ़ी, शिवहर, समस्तीपुर, गोपालगंज, सारण, सुपौल, मधेपुरा, सहरसा और खगड़िया.

बिहार सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग ने आंकड़े जारी किए जिनके मुताबिक बीते चैबीस घंटों में इस आपदा से 49 और लोगों की मौत हो गई. इसके साथ ही इस साल की बाढ़ से बिहार में मरने वालों की संख्या बढ़कर 300 हो गई है.

2200 गांवों की सवा लाख आबादी प्रभावित हुई है. इसके बाद यहां बाढ़ की वजह से हजारों हेक्टेयर की फसल बरबाद हो गई है. साथ ही असम के काज़ीरंगा नेशनल पार्क में बाढ़ की वजह से करीब डेढ़ सौ जानवर मारे गए हैं, जिसमें गेंडे, हिरण, हाथी और दूसरे जानवर शामिल हैं

बाढ़ राहत शिविर के अतिरिक्त वैसे प्रभावित व्यक्ति जो राहत शिविरों में नहीं रह रहे हैं उनके लिए सामुदायिक रसोई घर चलाये जा रहे हैं. इस तरह कुल 1879 सामुदायिक रसोईघर चलाए जा रहे हैं जिसमें 3 लाख 72 हजार तीन सौ चौंतीस लोगों को भोजन कराया जा रहा है. एनडीआरएफ की 28 टीम 1152 जवानों और 118 वोट के साथ, एसडीआरएफ की 16 टीम 446 जवानों एवं 92 वोट के साथ और सेना की 7 कॉलम 630 जवानों और 70 बोट के साथ बचाव एवं राहत कार्य में जुटी हुई हैं. बाढ़ प्रभावित वैसी आबादी जो पूरी तरह से पानी से घिरी है और उन्हें निकाला भी नहीं जा सका है.

आपदा प्रबंधन विभाग प्रधान सचिव, पथ निर्माण विभाग के प्रधान सचिव, ग्रामीण कार्य विभाग के सचिव, गृह रक्षा वाहिनी महानिदेशक के द्वारा किशनगंज, अररिया और पूर्णयिा में राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा और राहत शिविरों सामुदायिक रसोई एवं फूड पैकेट के पैकिंग का निरीक्षण भी किया गया.

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