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हार से फर्क नहीं: बीजेपी ,चित्रकूट कांग्रेस का पुराना गढ़

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उपचुनाव का परिणाम आने के बाद चित्रकूट को कांग्रेस का परंपरागत गढ़ बताकर बीजेपी नेताओं ने हार को हल्का करने की कोशिश की है। मजे की बात यह है कि प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान और शिवराज मंत्रिमंडल के कई सदस्यों ने मतगणना के 12 दौर के बाद ही हार मान ली थी। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि वह जनता का आदेश सिर-माथे पर रखते हैं। चित्रकूट कांग्रेस का पुराना गढ़ है। इस हार से कोई फर्क नही पड़ेगा। हम हार की समीक्षा करेंगे। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने भी हार को स्वीकार करते हुए कहा कि चित्रकूट के विकास का हरसंभव प्रयास किया जाएगा। इन बयानों को छोड़ दें तो वास्तविकता यह है कि यह शिवराज सिंह की निजी हार है। उन्होंने चित्रकूट सीट कांग्रेस से छीनने के लिए पूरी ताकत लगाई थी। खुद 3 दिन वहां रहे। 60 से ज्यादा सभाएं की। अदिवासी प्रेम दिखाने के लिए एक रात कुर्रा गांव में एक अदिवासी के घर भी रुके, लेकिन कुर्रा गांव में भी बीजेपी प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा।

चित्रकूट कांग्रेस का पुराना गढ़, हार से फर्क नहीं: बीजेपी

भाजपा जिलाध्यक्ष गोपीकृष्ण व्यास ने कहा कि जो चुनाव परिणाम आए हैं उनको स्वीकार करते हैं। हमने पूरी मेहनत की थी। संगठन ने पूरी कोशिश की, लेकिन जनता का निर्णय स्वीकार है। इस चुनाव परिणाम का भाजपा की मेहनत पर कोई असर नहीं पड़ेगा। 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा 200 सीटों का आंकड़ा पार करेगी। यह हमारा संकल्प है। इसकी तैयारी शुरू कर दी है। हमारे कार्यकर्ता लगातार जुटे हुए हैं। प्रदेश सरकार लगातार जनता के हित में काम कर रही है।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह (फाइल फोटो)

 

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