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मोदी मन की बात में : सभी मानवतावादी शक्तियों को एकजुट होकर आतंकवाद को हराना ही होगा

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को 68वें संविधान दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में इसकी शक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें हर चुनौतियों से निपटने का समाधान मौजूद है। उन्होंने विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि आज सभी संस्थानों को जरूरत है कि वे देश को आगे बढ़ाने के लिए एक-दूसरे को मजबूती देने का काम करें। उन्होंने साथ ही लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एकसाथ कराए जाने के मुद्दे पर चर्चा आगे बढाने की अपील की। राष्ट्रीय विधि दिवस पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जिस देश में एक दर्जन से ज्यादा पंथ हों, सौ से ज्यादा भाषाएं हों, सत्रह सौ से ज्यादा बोलियां हों, शहर-गांव-कस्बों और जंगलों तक में लोग रहते हों, उनकी अपनी आस्थाएं हों, सबकी आस्थाओं का सम्मान करने के बाद ये ऐतिहासिक दस्तावेज तैयार करना आसान नहीं था. इस हॉल में बैठा हर व्यक्ति इस बात का गवाह है कि समय के साथ हमारे संविधान ने हर परीक्षा को पार किया है. हमारे संविधान ने उन लोगों की हर उस आशंका को गलत साबित किया है, जो कहते थे कि समय के साथ जो चुनौतियां देश के सामने आएंगी, उनका समाधान हमारा संविधान नहीं दे पाएगा.मोदी ने कहा कि सवाल ये है कि क्या ये संस्थाएं देश के विकास के लिए, देश की आवश्यकताओं, देश के समक्ष चुनौतियों और देश के लोगों की आशाओं-आकांक्षाओं को समझते हुए, एक दूसरे का सहयोग कर रही हैं? एक दूसरे को समर्थन, एक दूसरे को मजबूत कर रही हैं? प्रधानमंत्री ने कहा कि पाँच साल बाद हम सब स्वतंत्रता के 75 वर्ष का पर्व मनाएंगे. हमें एकजुट होकर उस भारत का सपना पूरा करना है, जिस का सपना हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने देखा था. इसके लिए हर संस्था को अपनी ऊर्जा इस तरह से व्यवस्थित करनी होगी, उसे सिर्फ न्यू इंडिया का सपना पूरा करने में लगाना होगा.


आखिर में कहा कि 68 वर्षों में संविधान ने एक अभिभावक की तरह हमें सही रास्ते पर चलना सिखाया है. संविधान ने देश को लोकतंत्र के रास्ते पर बनाए रखा, उसे भटकने से रोका है. इसी अभिभावक के परिवार के सदस्य के तौर पर हम उपस्थित हैं. सरकार, न्यायपालिका, नौकरशाही हम सभी इस परिवार के सदस्य ही तो हैं मोदी ने कहा कि संविधान दिवस हमारे लिए एक महत्वपूर्ण प्रश्न लेकर आया है. क्या एक परिवार के सदस्य के तौर पर हम उन मर्यादाओं का पालन कर रहे हैं, जिसकी उम्मीद हमारा अभिभावक, हमारा संविधान हमसे करता है? प्रधानमंत्री ने सवाल किया, “क्या एक ही परिवार के सदस्य के तौर पर हम एक दूसरे को मजबूत करने के लिए, एक दूसरे का सहयोग करने के लिए काम कर रहे हैं?”

पीएम मोदी ने कहा कि भारत आज दुनिया का सबसे नौजवान देश है. इस नौजवान ऊर्जा को दिशा देने के लिए देश की हर संवैधानिक संस्था को मिलकर काम करने की आवश्यकता है. 21वीं सदी में भारत को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए और न्यू इंडिया बनाने के लिए हम सभी को संकल्प लेना होगा. हमें साथ मिलकर काम करने और एक दूसरे को मजबूत करने का संकल्प लेना होगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के दौरान विज्ञान भवन में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा भी मौजूद थे.

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