Home आप बीती नीरव की गिरफ्तारी से मोदी विरोधियों को झटका

नीरव की गिरफ्तारी से मोदी विरोधियों को झटका

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सियाराम पांडेय ‘शांत’बुरे कर्म कभी पीछा नहीं छोड़ते। वे इस जीवन में तो दुख देते ही हैं, अगला जन्म भी प्रभावित करते हैं। जो लोग सोचते हैं कि उन्होंने किसी को ठगने का बड़ा काम किया है। किसी को धोखा देकर खुद मालामाल हो गए हैं। वे यह भूल जाते हैं कि चंद पैसों की लालच में उन्होंने खुद को ही धोखा दिया है। अपने पैरों के नीचे कंगाली की बड़ी- सी खाई खोद दी है, जिसमें अंतत: उसे ही गिरना है। धोखेबाज दूसरों का धन हड़पकर कुछ क्षण के लिए खुश हो सकते हैं। अपने शातिरपने पर आत्ममुग्ध भी हो सकते हैं। लेकिन सच तो यह है कि उनके कर्म उन्हें कहीं भी मुंह दिखाने काबिल नहीं छोड़ते। यही नहीं, उनके सगे-संबंधी भी उनसे नाम जोड़ना नहीं चाहते। ऐसा धन किस काम का, जो समाज में चेहरा दिखाने के भी काबिल न रखे। कुछ लोग सोचते हैं कि धन हड़पकर सुखपूर्वक रहेंगे लेकिन सुख देने वाली आत्मा इन कृत्यों से भला कब प्रसन्न होती है। पाप जहां कहीं भी किया जाए, पकड़े जाने का भय हमेशा बना रहता है। गुजराती हीरा व्यवसायी नीरव मोदी और उसके मामा मेहुल चौकसी ने पंजाब नेशनल बैंक से हीरा कारोबार के नाम पर करीब 13 हजार करोड़ से अधिक राशि बतौर ऋण लिया और रातों रात फरार हो गए। उसने अकेले पंजाब नेशनल बैंक से ही ऋण नहीं लिया। कई बैंकों से करोड़ों-अरबों रुपये का ऋण लिया और चंपत हो गए। यह ऋण कांग्रेस के शासन में लिया गया था। विजय माल्या को तो ऋण देने की कांग्रेस के एक बड़े नेता ने पैरवी तक की थी। यह और बात है कि नीरव मोदी, मेहुल चोकसी और विजय माल्या जब तक कांग्रेस शासन था, तब तक नहीं भागे। लेकिन नरेंद्र मोदी की केंद्र में सरकार बनते ही भाग खड़े हुए। कांग्रेस ने इसके लिए भाजपा को दोषी ठहरा दिया और चुनाव में भी वह इसे राजनीतिक मुद्दा बनाए हुए है। वह मोदी सरकार को उद्योगपतियों की हमदर्द बता रही है। लेकिन सच तो यह है कि बैंकों, उद्योगपतियों दोनों पर ही अपने लेन-देन को स्पष्ट करने का दबाव बन रहा था। बैंकों की रीति-नीति पर भी सवाल उठ रहे थे। विजय माल्या, नीरव मोदी और मेहुल चौकसी के भागने में कुछ लोगों ने परोक्ष रूप से मदद भी की। यह देश के साथ विश्वासघात था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष के आरोपों को चुनौती के तौर पर लिया। एजेंसियां सक्रिय हुईं और देश के आर्थिक अपराधियों की विदेशों में स्थित संपत्ति तक जब्त हुई। वेश बनाकर छिपना और निरंतर ठिकाने बदलते रहना भी उनके किसी काम न आया। नीरव मोदी को ब्रिटेन की स्कॉटलैंड यार्ड पुलिस ने लंदन में उस समय गिरफ्तार कर लिया जब वह वहां के मेट्रो बैंक में खाता खुलवाने की कोशिश कर रहा था। उसे वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश किया गया जहां से उसे 29 मार्च तक हिरासत में भेज दिया गया है। उम्मीद बंधी है कि नीरव मोदी जल्द ही प्रत्यर्पित होकर भारत आएगा। नीरव की गिरफ्तारी के बाद मोदी सरकार पर हमलावर हो रहे राहुल गांधी के कसबल थोड़े ढीले पड़ गए हैं। संभव है कि विजय माल्या,मेहुल चौकसी और नीरव मोदी का प्रत्यर्पण लोकसभा चुनाव के दौरान ही हो जाए। थोड़ा फ्लैशबैक में जाएं तो राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव से ठीक पहले अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर घोटाले के एक आरोपी मिशेल को प्रत्यर्पित कर भारत लाया गया था जिसे बचाने के लिए कांग्रेस ने बड़े से बड़े वकीलों की फौज लगा दी थी। कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया था कि भाजपा सीबीआई के जरिये उसे उत्पीड़ित कर कांग्रेस को बदनाम करना चाहती है। अब तक विदेशों में पैसा रखना आसान हुआ करता था लेकिन यह नरेंद्र मोदी सरकार की दृढ़ता ही है कि वहां खाता खोलना भी भारत के आर्थिक अपराधियों के लिए बेहद मुश्किल हो गया है। नीरव मोदी की गिरफ्तारी तो कमोवेश यही संदेश देती है। इससे यह भी पता चलता है कि अपराधी चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, उसने अगर भारत में अपराध कारित किया है तो उसका पकड़ा जाना तय है। ब्रिटिश सरकार ने विगत छह माह में भगोड़े उद्योगपति विजय माल्या और अब नीरव मोदी के खिलाफ जिस तरह कानूनी कार्रवाई की है, उसके लिए वह साधुवाद की पात्र है। भारत की तरफ से इन दोनों को ही प्रत्यर्पित करने का आग्रह किया गया है। नीरव मोदी जैसे आर्थिक अपराधियों को यह तो समझ में आना ही चाहिए कि विदेशी सरजमीं पर भी उन्हें अपराधी ही माना जाता है। डोर कटी पतंग का कोई वजूद नहीं होता। जो अपने देश का नहीं होता, उसे दुनिया में कहीं भी सम्मान नहीं मिलता। वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट ने नीरव मोदी के अपराध को न सिर्फ बेहद गंभीर माना है बल्कि यह भी स्वीकार किया है कि एक बार जमानत मिलने के बाद वह सहयोग करेगा या नहीं, गारंटी नहीं है। भारतीय प्रवर्तन निदेशालय स्थितियों पर बारीक नजर रखे हुए है। उम्मीद है कि नीरव मोदी की प्रत्यर्पण प्रक्रिया विजय माल्या से भी तेज होगी। प्रवर्तन निदेशालय पहले ही ब्रिटिश अधिकारियों को बता चुका है कि नीरव मोदी का मामला विजय माल्या से अलग है। नीरव मोदी भारत के सबसे बड़े बैंकिंग घोटाले का सूत्रधार है। उसकी मंशा शुरू से ही भारतीय प्रशासन और कानून को धता बताने की रही है। उसने केवल बैंकों को ही चूना नहीं लगाया, अपने ग्राहकों के साथ भी धोखाधड़ी की है। प्रवर्तन निदेशालय ने एंटीगुआ में रह रहे बैंक धोखाधड़ी मामले में नीरव मोदी के सहयोगी मेहुल चोकसी के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। इस संबंध में ईडी और सीबीआई ने संबंधित दस्तावेज एंटीगुआ भेज दिए हैं। मुंबई में प्रवर्तन निदेशालय की विशेष अदालत ने नीरव मोदी की पत्नी अमी मोदी के खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी किया है। प्रवर्तन निदेशालय ने हाल ही में एक पूरक आरोपपत्र दाखिल किया था जिसमें पीएनबी घोटाले में अमी की भूमिका का उल्लेख किया गया है। अमी मोदी फिलहाल कहां रह रही है, भारतीय अधिकारी इसका पता लगा रहे हैं। जल्द ही वह भी पकड़ी जाएगी। मुंबई स्थित ईडी की विशेष अदालत ने नीरव मोदी की कंपनी कैमलॉट इंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड की 173 महंगी पेंटिग्स और 11 महंगे वाहनों को बेचने की अनुमति भी दे दी है। उक्त पेंटिंग्स का मूल्य लगभग 57.72 करोड़ रुपये बताया जा रहा है। महंगे वाहनों में रॉयल्स रायल, पोर्शे, मर्सिडीज और टोयोटा फॉर्च्यूनर ब्रांड की कारें शामिल हैं। इनकी नीलामी इस माह के अंत तक होनी है। आर्थिक अपराधियों की गिरफ्तारी कराने का एक मोर्चा तो सरकार ने फतह कर लिया है। बस प्रत्यर्पण की औपचारिकता की जंग जीतनी है। जाहिर तौर पर इससे जनता के बीच मोदी सरकार के प्रति आस्था जमेगी। लोग तो कहने लगे हैं कि ‘मोदी है तो मुमकिन है।’ 8100 करोड़ रुपये का बैंक ऋण लेकर फरार चल रहे हितेश पटेल को भी अल्बानिया में गिरफ्तार कर लिया गया है। उसके प्रत्यर्पण के प्रयास भी तेज किए जा रहे हैं।जिस तरह से आर्थिक भगोड़ों की गिरफ्तारियां हो रही हैं,उससे यही लगता है कि दुनिया में कहीं भी उनके लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं बची है। 2015 में 6, 2016 में 4, 2017 में 1 और 2018 में 5 भगोड़ों का प्रत्यर्पण हो चुका है। हितेश पटेल की कंपनी के नितिन सन्देशरा, चेतन सन्देशरा और दीप्ति सन्देशरा के प्रत्यर्पण का निवेदन भी सरकार भेज चुकी है। कुल मिलाकर अपराधी अब बच नहीं सकते। सरकार ने उनसे लूटी गई राशि की एक-एक पाई वसूलने के मन बना लिया है। यही तो चौकीदारी है। कहना न होगा कि सरकार ने हर मोर्चे पर खुद को प्रमाणित किया है। इसका लाभ उसे लोकसभा चुनाव में मिल सकता है।

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