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अरुणाचल और ताइवान को अपनी सीमा से बाहर दिखाने वाले 30 हजार नक्शों को चीन ने किया नष्ट: रिपोर्ट

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नई दिल्ली : चीन के कस्टम अधिकारियों ने पिछले हफ्ते करीब 30,000 नक्शों को नष्ट कर दिया है। अधिकारियों ने उन नक्शों को नष्ट किया गया है जिनमें अरुणाचल प्रदेश को भारत का हिस्सा और ताइवान को अलग देश के तौर पर दिखाया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह हाल के सालों में हुई सबसे बड़ी कार्रवाई है। ऐसा चीन की क्षेत्रीय अखंडता को बचाने के लिए किया गया।

यह सभी नक्शे अंग्रेजी में थे और इनका निर्माण चीन की अनहुई स्थित कंपनी ने किया था। चीन, अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा करता रहता है और अपने आधिकारिक नक्शों में उसे तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र (टीएआर) के तौर पर दिखाता है। वह ताइवान पर भी अपना दावा करता है जो एक स्वशासित लोकतंत्र है।

किंगदाओ शहर के शानडोंग प्रांत के कस्टम अधिकारियों ने जानकारी मिलने पर एक दफ्तर पर छापा मारा और वहां से 800 बक्सों को अपने कब्जे में ले लिया जिसमें विश्व के 28,908 नक्शे थे। प्रांत के प्राकृतिक संसाधन मंत्रालय ने प्रेस कांफ्रेस में कहा, ‘गलत नक्शों के 803 बक्से जब्त करके नष्ट कर दिए गए हैं। यह हालिया सालों में हुई कार्रवाई के दौरान बहुत बड़ी संख्या थी।’

दस्तावेजों को एक गुप्त स्थान पर ले जाया गया और टुकड़े-टुकड़े कर दिया गया। ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ‘इन नक्शों को पूर्वी चीन के अनहुई प्रांत की कंपनी ने बनाया था और इन्हें एक अनिर्दिष्ट विदेशी देश को निर्यात किया जाना था। यह समस्याग्रस्त मानचित्र, चीन के सही क्षेत्र को दिखाने में विफल रहे और दक्षिण तिब्बत और ताइवान द्वीप को छोड़ दिया गया। ऐसा किंगदाओ सरकार ने नक्शे के परीक्षण में पाया।’

संबंधित अधिकारियों ने इन नक्शों की घरेलू नक्शा बाजार में 100 से ज्यादा बार जांच की और 10,000 से ज्यादा गलत नक्शों को नष्ट कर दिया गया। जिससे कि इन्हें घरेलू और अतंरराष्ट्रीय बाजार में बेचने से रोका जा सके। प्राकृतिक संसाधन मंत्रालय के भौगोलिक सूचना केंद्र के मा वेई ने कहा, ‘नक्शे किसी भी देश की संप्रभुता और राजनीतिक वक्तव्य की निशानी होते हैं।’

चीन विदेश मामलों के विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय कानून विभाग के लियू वेन्जोंग ने कहा, ‘चीन ने नक्शा बाजार में जो किया वह बिल्कुल वैध और आवश्यक था क्योंकि संप्रुभता और क्षेत्रीय अखंडता एक देश के लिए सबसे महत्वपूर्ण चीजें होती हैं। ताइवान और दक्षिण तिब्बत चीन के क्षेत्र का पवित्र हिस्सा हैं जो अंतरराष्ट्रीय कानून के अंतर्गत आता है। यदि गलत नक्शे देश के अंदर या बाहर प्रसारित होते हैं तो इससे चीन की क्षेत्रीय अखंडता को नुकसान पहुंचेगा।’

भारत का कहना है कि अरुणाचल प्रदेश उसका अभिन्न हिस्सा है और भारतीय नेता देश के अन्य हिस्सों की तरह समय-समय पर अरुणाचल प्रदेश जाते रहते हैं। दोनों देशों ने 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा से जुड़े सीमा विवाद को हल करने के लिए अभी 21 चरणों की वार्ता की है। चीन उससे अलग हुए ताइवान पर भी अपना दावा जताता है।

सरकारी समाचार पत्र ग्लोबल टाइम्स में मंगलवार को छपी एक खबर के मुताबिक, इन मानचित्रों को किसी देश को भेजा जाना था। इस देश का नाम अभी मालूम नहीं है। खबर में बताया गया कि चीन के किंगदाओ में सीमा शुल्क अधिकारियों ने करीब 30,000 ‘गलत’ विश्व मानचित्रों को नष्ट कर दिया जिसमें ताइवान को अलग देश दिखाया गया था और चीन-भारत सीमा का गलत चित्रण किया गया था।

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