Home बड़ी खबरें भाजपा शासित नगर निगम सभी मोर्चों पर पूरी तरह फेल, महापौर अविलंब इस्तीफा दें: शोभा ओझा कहा- फीकल पोलीफार्म मिला दूषित पानी बंटना, जनता के स्वास्थ्य और जीवन के लिए खतरनाक’

भाजपा शासित नगर निगम सभी मोर्चों पर पूरी तरह फेल, महापौर अविलंब इस्तीफा दें: शोभा ओझा कहा- फीकल पोलीफार्म मिला दूषित पानी बंटना, जनता के स्वास्थ्य और जीवन के लिए खतरनाक’

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भाजपा शासित नगर निगम सभी मोर्चों पर पूरी तरह फेल, महापौर अविलंब इस्तीफा दें: शोभा ओझा कहा- फीकल पोलीफार्म मिला दूषित पानी बंटना, जनता के स्वास्थ्य और जीवन के लिए खतरनाक’

भोपाल (ईएमएस)। प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग की अध्यक्ष श्रीमती शोभा ओझा ने कहा कि प्रदेश की राजधानी भोपाल में भाजपा शासित नगर पालिक निगम हर मोर्चे पर पूरी असफल साबित हो रही है। समूचे राजधानी क्षेत्र में पानी की किल्लत के साथ ही दूषित पानी की सप्लाई जहां एक बड़ी समस्या बनकर उभरी है, वहीं स्वच्छता के मोर्चे पर भी नगर निगम अपने मानकों पर खरी नहीं उतर पा रही है।
श्रीमती ओझा ने कहा कि अभी-अभी एजीएमपी के सोशल ऑडिट में खुलासा हुआ है कि राजधानी में 30 जगहों से लिए गए सैंपलों में से 5 फेल हो गए हैं। उनमें खतरनाक अशुद्धि मिली है। श्यामला प्लांट से जुडे तलैया, चैक, मंगलवारा, और श्यामला हिल्स के 30 हजार घरों में गंदा पानी जा रहा है। कई इलाके ऐसे हैं जहां बीमरियों को न्यौता दे रहा मटमैला पानी सप्लाई हो रहा है। श्यामला हिल्स फिल्टर प्लांट में तो फिल्ट्रेशन के बाद लिए गए सैंपल में घातक बैक्टीरिया फीकल कोलीफार्म पाया गया है। इससे साफ है कि पानी में मल-मूत्र मिला हुआ है, जिससे पूरी फिल्ट्रेशन प्रोसेस पर ही सवाल खड़ा हो गया है, क्योंकि ट्रीटेड पानी में भी यदि फीकल कोलीफार्म पाया गया है तो इसका साफ मतलब है कि ट्रीटमेंट में डिसइन्फेक्शन नहीं किया जा रहा है।
श्रीमती ओझा ने कहा कि उपरोक्त खुलासे से साफ है कि पीने के पानी में फीकल कोलीफार्म मिलना बेहद खतरनाक है, जिससे टाइफाइड, हेपेटाइटिस और पीलिया जैसी गंभीर बीमारियां फैलने की आशंका बढ़ गई है। यह मामला केवल गंदा पानी सप्लाई होने तक सीमित नहीं है बल्कि ट्रीटमेंट से लेकर सप्लाई तक पूरे सिस्टम में बरती जा रही लापरवाही भी इससे साफ उजागर हो रही है।
श्रीमती ओझा ने कहा कि यदि भोपाल के पूरे वाटर सप्लाई नेटवर्क की बात की जाए तो 20 लाख आबादी के हिसाब से स्टैंडर्ड का पालन ही नहीं हो रहा है। सभी फिल्टर प्लांटों में आमूलचूल बदलाव की जरूरत है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि नगर पालिका निगम केवल पानी के मोर्चे पर ही नहीं बल्कि सफाई के मोर्चे पर भी फिसड्डी साबित हो रही है। कचरा पेटियों के अभाव में जहां जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हुए हैं, वहीं राजधानी की सड़कों से धूल हटाने के लिए चल रही स्वीपिंग मशीनों का फोकस सफाई से ज्यादा प्रतिदिन 200 किमी का कोटा पूरा करने पर है। चाहे सड़क साफ हो या न हो, लेकिन भुगतान पूरा मिलना चाहिए। यही वजह है कि स्वीपिंग मशीनों के गुजर जाने के बाद भी सड़कों पर कचरा नजर आता है।
श्रीमती ओझा ने कहा कि भोपाल नगर निगम यह दावा करता है कि रोजाना शहर की 200 किलोमीटर सड़कों और फुटपाथों की सफाई और धुलाई हो रही है, लेकिन हकीकत इसके विपरीत है। सड़कों की सफाई के लिए चलने वाली इन स्वीपिंग मशीनों के स्वीपर ब्रश फुटपाथ और सड़क के डिवाइडर को साफ करना तो दूर, उन्हें छू तक नहीं पा रहे हैं, न तो सड़कों से धूल हट रही है और न ही सड़कों के किनारे और फुटपाथ साफ हो पा रहे हैं।
श्रीमती ओझा ने कहा कि यह हास्यास्पद है कि नगर निगम यह दावा कर रहा है कि हम स्मार्ट सिटी के कंट्रोल एंड कमांड सेंटर से स्वीपिंग मशीनों की लगातार निगरानी कर रहे हैं, लेकिन वह यह नहीं बताता कि जीपीएस से स्वीपिंग मशीनें तो ट्रैक हो रही हैं, लेकिन सड़कों की सफाई की ट्रैकिंग नदारद है।
अपने बयान के अंत में श्रीमती ओझा ने कहा कि यह पूरी तरह से स्पष्ट हो गया है कि भाजपा शासित नगर निगम के महापौर आलोक शर्मा और उनकी पूरी टीम भोपाल की बुनियादी समस्याओं को दूर करने और राजधानी के विकास में पूरी तरह से अक्षम साबित हुए हैं और जिसके चलते प्रदेश की राजधानी होने के बावजूद भोपाल, देश के अन्य महानगरों की तुलना में विकास की दौड़ में कहीं पीछे रह गया है। महापौर जहां सभी मोर्चों पर पूरी तरह से फेल हो गये हैं, वहीं उन्हें जनता के स्वास्थ्य और जीवन की भी परवाह नहीं है, ऐसे लापरवाह व अकर्मण्य महापौर में यदि तनिक भी नैतिकता शेष हो तो उन्हें भोपाल की जनता के हित में अपने पद से अविलंब इस्तीफा देना चाहिए।

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