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नारायण सांई को जेल में चाहिए धोती-कुर्ता, कैदी के कपड़े अच्छे नहीं लगते

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सूरत (ईएमएस)| अपनी साधिका के साथ दुष्कर्म के केस में सूरत की लाजपोर जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे नारायण सांई ने कैदी के कपड़े बजाए धोती-कुर्ता देने और प्रथम श्रेणी के कैदी का दर्जा देने की कोर्ट से दरखास्त की है| कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद 27 जुलाई तक अपना फैसला सुरक्षित रखा है|नाराणय सांई ने बंदीवान कानून की दफा 17(1)27 के तहत और संविधान के आर्टिकल 10(2) के तहत प्रथम श्रेणी के कैदी का दर्जा पाने के लिए दरखास्त की है| फिलहाल जेल प्रबंधन कैदी के तौर पर कोटन के कप़ड़े पहनने के लिए देता है| नारायण सांई ने अपनी दरखास्त में कहा है कि सूरत में गर्मी का पारा 40 डिग्री होने पर जेल के कोटन के कपड़ों से उसे एलर्जी होती है| जिससे शरीर में खुजली और छाले पड़ जाते हैं| जिसे ध्यान में रखते हुए मुझे जेल में कोटन के कपड़ों के बजाए साधु-संत के पोषाक के तौर पर धोती और कुर्ता पहनने की छूट दी जाए| इसके अलावा नारायण सांई देश-विदेश में आश्रमों में गरीबों को शिक्षा, दिव्यांग और वृद्धाश्रम समेत युवाओं में व्यसन मुक्ति और आयुर्वेदिक दवाइयां बनाकर समाज कल्याण के काम करता है| जिससे नारायण सांई को प्रथम श्रेणी के कैदी का दर्जा देने और अपने खर्च से धोती-कुर्ता पहनने की मंजूरी दी जाए|
सरकारी वकील पीएन परमार ने नारायण सांई की दरखास्त का विरोध करते हुए जेल मेन्युअल और कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि कोटन के कपड़े देश के वातावरण के लिए उपयुक्त है| कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद अपना फैसला आगामी 27 जुलाई तक सुरक्षित रखा है|

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