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2500 करोड़ रुपये की गड़बड़ी उजागर कानपुर में रजिस्ट्री कार्यालय पर आयकर विभाग की रेड

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उत्तर प्रदेश के रजिस्ट्री विभाग में एक बड़ा SFT (Statement of Financial Transactions) (SFT Filing Scam) घोटाला सामने आया है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि संपत्तियों की खरीद-फरोख्त को छुपाकर कर चोरी के लिए बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा किया गया। यह घोटाला मुख्य रूप से 30 लाख रुपए से ऊपर की रजिस्ट्री की रिपोर्टिंग में “खेल” करके किया गया, जिसे अब Income Tax Department ने पकड़ लिया है। UP Registry Scam कानपुर में शुक्रवार को आयकर विभाग की टीम ने रजिस्ट्री कार्यालय में छापेमारी की। दोपहर करीब 2 बजे शुरू हुई यह कार्रवाई देर शाम तक चली। जांच के दौरान सैकड़ों बैनामों से जुड़े दस्तावेजों में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं, जिनकी कुल राशि लगभग 2500 करोड़ रुपये आंकी जा रही है।

कई जिलों में जांच का दायरा बढ़ा 

अलीगढ़ में SFT Fraud खुलने के बाद अब जांच का दायरा तेजी से बढ़ाया गया है।

जिन जिलों में जांच चल रही है—

आगरा

मेरठ

कानपुर

प्रयागराज

अलीगढ़

अन्य कई रजिस्ट्री कार्यालय जांच के घेरे में जांच एजेंसियों के अनुसार, यह घोटाला सिर्फ एक या दो जिलों तक सीमित नहीं है बल्कि पूरे प्रदेश में फैले रजिस्ट्री कार्यालयों में संभावित नेटवर्क की जांच की जा रही है। 

बैनामों में गलत और अधूरे पैन कार्ड नंबर
जांच में सामने आया कि कई बैनामों में पैन कार्ड नंबर गलत दर्ज हैं, जबकि कई मामलों में पैन की जानकारी अधूरी पाई गई। इस लापरवाही के चलते बड़ी संख्या में लोग आयकर विभाग की निगरानी से बाहर रह गए, जिससे सरकारी राजस्व को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है।

पुलिस बल के साथ पहुंची आयकर टीम
सहायक निदेशक विमलेश राय के नेतृत्व में आयकर अधिकारी सर्वे के लिए पहुंचे। टीम के साथ पुलिस बल भी मौजूद था। अधिकारियों ने एक-एक दस्तावेज की गहन जांच की और कई महत्वपूर्ण रिकॉर्ड कब्जे में लिए।

10 दिन में दस्तावेज जमा करने के निर्देश
सर्वे पूरा होने के बाद आयकर विभाग ने उप निबंधक प्रथम को नोटिस जारी कर 10 दिन के भीतर सभी बैनामों से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

मिलीभगत की आशंका
आयकर विभाग का मानना है कि रजिस्ट्री कार्यालय की मिलीभगत से दस्तावेजों में गड़बड़ी कर सरकार को राजस्व की क्षति पहुंचाई गई है। जब्त किए गए दस्तावेजों की विस्तृत जांच की जा रही है, जिससे आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे होने की संभावना है।

इसके अलावा, स्टांप शुल्क के सरकारी डाटा और वास्तविक रिकॉर्ड में करोड़ों रुपये के अंतर के चलते आयकर विभाग की क्राइम इन्वेस्टिगेशन टीम ने यह छापेमारी की है।

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