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एम्फान ने पश्चिम बंगाल में मचाई भारी तबाही, 12 लोगों की मौत, एक लाख करोड़ रुपए का नुकसान : ममता

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कोलकाता (ऐजेंसी)। बंगाल की खाड़ी में उठे चक्रवात एम्फान को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है कि इस तूफान का प्रभाव कोरोना वायरस से भी बदत्तर रहा। मुख्यमंत्री ममता बेनर्जी मंगलवार की रात से राज्य सचिवालय नबन्ना में स्थिति की निगरानी कर रही हैं। उन्होंने कहा कि इस महाविनाशकारी तूफान से दक्षिण बंगाल में भारी तबाही हुई है।
गौरतलब है कि ओडिशा और पश्चिम बंगाल में एम्फन से भारी तबाही हुई है। बंगाल में इससे 12 लोगों की मौत हो गई है। कई जगहों पर पेड़ उखड़ गए और कुछ जगहों पर भारी बारिश की वजह से जल भराव भी हो गया। उत्तरी 24 परगना जिले में करीब 5200 घरों को क्षति पहुंची है। चक्रवात एम्फन बुधवार को दोपहर में करीब ढाई बजे पश्चिम बंगाल में दीघा और बांग्लादेश में हटिया द्वीप के बीच तट पर पहुंचा। इस दौरान 190 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं। चक्रवात के कारण तटीय क्षेत्रों में भारी तबाही हुई, बड़ी संख्या में पेड़ और बिजली के खंभे उखड़ गए, कच्चे मकानों को भी खासा नुकसान हुआ।
ममता ने कहा कि जिस तरह की सूचनाएं मिली है उससे ऐसा लग रहा है कि तूफान से एक लाख करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है। पीने का पानी से लेकर अन्य आवश्यक सामान संपर्क कटे क्षेत्रों तक पहुंचाना सरकार की पहली प्राथमिकता होगी। उन्होंने कहा कि सरकार पहले ही पांच लाख लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया था। जिससे काफी हद तक जनजीवन के नुकसान को नियंत्रित किया जा सका है। तीन घंटें में रिकार्ड 180 मिलीमीटर बारिश कोलकाता में दर्ज हुई है और महानगर तथा जिलों के कई इलाके जलमग्न हो गए है।
एम्फन के बंगाल के सुंदरवन तट के पास स्थल भाग से टकराने के बाद समुद्र में पांच से छह फीट ऊंची लहरें उठीं। तेज हवाओं से बड़ी संख्या में पेड़ उखड़ गए और बिजली के खंभे टूट गए। सुबह से ही बंगाल और ओडिशा के तटवर्ती इलाकों में बारिश होती रही। टीवी फुटेज में दिखा है कि तूफानी समुद्री लहरों ने दीघा में समुद्र किनारे बनी दीवार को तहस-नहस कर दिया है। तटीय इलाकों में कच्चे मकानों को भी बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है।
भारत में 21 साल के बाद कोई सुपर साइक्लोन आया है। साल 1999 में एक चक्रवात ओडिशा के तट से टकराया था जिसे पारादीप साइक्लोन का नाम दिया गया था। इसने भी जानमाल का भारी नुकसान किया था। रिपोर्टों के मुताबिक, ओडिशा के नौ जबकि पश्चिम बंगाल के तटीय जिले प्रभावित हैं। ओडिशा में पुरी, गंजाम, जगतसिंहपुर, कटक, केंद्रापाड़ा, जाजपुर, गंजाम, भद्रक और बालासोर जबकि पश्चिम बंगाल के पूर्वी मिदनापुर, 24 दक्षिण और उत्तरी परगना, हावड़ा, हुगली, पश्चिमी मिदनापुर और कोलकाता पर इसका असर पड़ा है।

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