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चीन-भारत सीमा पर खूनी संघर्ष, 20 सैनिक शहीद

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लद्दाख (एजेंसी)। लद्दाख में भारत-चीन सीमा पर दोनों देशों के जवानों के बीच हिंसक झड़प में भारत के कमांडिंग ऑफिसर समेत 20 सैनिक शहीद हो गए। यह तब हुआ, जब दोनों ओर से एक भी गोली नहीं चली। यह खूनी झड़प लद्दाख में 14 हजार फीट ऊंची गालवन वैली में हुई। गालवन वैली वही इलाका है, जहां 1962 की जंग में 33 भारतीयों की जान गई थी।
सीमा पर पिछले 41 दिन से तनाव था। इसे कम करने की कोशिशें भी हो रही थीं। इसी बीच, 15 जून की शाम भारतीय सेना बातचीत करने गई थी, लेकिन चीन की सेना ने अचानक हमला कर दिया।
इस झड़प में भारत ने कर्नल रैंक के कमांडिंग ऑफिसर और 19 जवानों को खो दिया। 3 के नाम सेना ने आधिकारिक तौर पर बताए हैं। इनमें 16 बिहार रेजिमेंट के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल संतोष बाबू, हवलदार पालानी और सिपाही कुंदन झा शामिल हैं। बाकी नामों की जानकारी अभी सामने नहीं आई है। चीन की तरफ से भी 3 से 5 सैनिकों के मारे जाने और 11 जवानों के घायल होने की खबर है, लेकिन उसने यह कबूला नहीं है।
ऐसा करीब 45 साल बाद हुआ है कि भारत-चीन बॉर्डर पर हिंसा में किसी सैनिक की शहादत हुई हो। वैसे माना जाता है कि एलएसी बॉर्डर पर आखिरी फायरिंग (दोनों तरफ से) 1967 में हुई थी, लेकिन ऐसा सच नहीं है। चीन की तरफ से 1975 में भी भारतीय सैनिकों पर हमला हुआ था। इस घटना को लेकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सीडीएस बिपिन रावत के साथ एक बैठक की।
भारत और चीन के बीच आखिरी गोली 1967 में चली थी। यानी 53 साल पहले। यह हिंसक झड़प सिक्किम में हुई थी। चीन वहां इसलिए चिढ़ा हुआ था क्योंकि 1962 की जंग के बाद भारत उस इलाके में अपनी स्थिति लगातार बेहतर कर रहा था। 1967 की इस जंग में भारत के 80 जवान शहीद हुए थे। वहीं चीन के करीब 400 सैनिकों ने अपनी जान गंवाई थी। दोनों देशों की तरफ से आखिरी गोलीबारी 1967 में जरूर हुई थी लेकिन इसके 8 साल बाद भी चीन ने घात लगाकर हमला किया था। इसमें चार भारतीय सैनिक शहीद हुए थे। लाख तनाव के बावजूद चीनी सीमा पर हिंसा नहीं होने की तारीफ पीएम नरेंद्र मोदी भी कर चुके हैं। उन्होंने खुद एक इंटरव्यू में कहा था कि दोनों देशों तरफ से बॉर्डर पर एक भी गोली नहीं चलाई गई है जो दोनों की ही ‘परिपक्वता’ दिखाता है। अब तक जब कोरोना वायरस पर खुलती पोल के बीच चीन बौखलाया हुआ है तो क्या भारत की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसपर अपना स्टैंड बदलेंगे? यह देखना होगा।

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