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चीन से विवाद के बीच भारत को इस देश से मिला मजबूत समर्थन

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चीन से विवाद के बीच भारत को इस देश से मिला मजबूत समर्थन
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नई दिल्ली(एजेंसी)। चीन से सीमा विवाद के बीच भारत को ऑस्ट्रेलिया और फ्रांस से सामरिक, रणनीतिक मुद्दों पर मजबूत समर्थन मिला है। इन तीनों देशों की पहली त्रिपक्षीय वार्ता वर्चुअल माध्यम से हुई है। इसमें भारत के विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला शामिल हुए। गौरतलब है कि फ्रांस भारत का मजबूत रणनीतिक साझेदार बनकर उभरा है।

वहीं, ऑस्ट्रेलिया चार देशों के मजबूत फोरम क्वाड में भारत, अमेरिका और जापान के साथ शामिल है। अब भारत, ऑस्ट्रेलिया और फ्रांस की नई त्रिपक्षीय साझेदारी से हिंद महासागर इलाके में भारत का वर्चस्व चीन के लिए नई मुश्किल बन सकता है। सूत्रों का कहना है कि भारत के साथ प्रभावी देशों का अलग-अलग बहुपक्षीय मंचों पर जुड़ना चीन के खिलाफ घोषित मोर्चेबंदी नहीं है, लेकिन ये गठजोड़ भारत के प्रति प्रभावी देशों के भरोसे को जरूर दर्शाता है।

विदेश मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक त्रिपक्षीय बैठक की सह-अध्यक्षता विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला, फ्रांस के यूरोप व विदेश मंत्रालय के महासचिव फ्रांस्वा डेल्ट्रे और ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्रालय व व्यापार विभाग की सचिव फ्रांसिस एडम्सन ने किया। बातचीत का फोकस हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर था।

बातचीत के दौरान, तीनों पक्षों ने कोविड- 19 महामारी के मद्देनजर हिंद महासागर क्षेत्र में भू-स्थैतिक चुनौतियों और सहयोग पर चर्चा की। समुद्री सहयोग और त्रिपक्षीय और क्षेत्रीय स्तर पर व्यावहारिक सहयोग के लिए संभावित क्षेत्रों पर भी तीनों देशों के बीच चर्चा की गई। आसियान, आईओआरए और हिंद महासागर आयोग जैसे क्षेत्रीय संगठनों के माध्यम से सहयोग बढ़ाने पर भी मंथन किया गया।

तीनों देशों ने क्षेत्रीय और वैश्विक बहुपक्षीय संस्थानों की प्राथमिकताओं, चुनौतियों और रुझानों पर विचार साझा किया। बहुपक्षवाद को मजबूत करने और संस्थाओं के सुधार करने के तरीकों पर भी बात हुई। मंत्रालय ने कहा, बैठक बहुत ही उपयोगी व परिणाम उन्मुख रही।

तीनों देशों ने मजबूत द्विपक्षीय संबंधों के लिहाज से एक-दूसरे की मजबूती को परस्पर साझा करने पर सहमति जताई, जिससे एक शांतिपूर्ण, सुरक्षित, समृद्ध और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र सुनिश्चित किया जा सके। सूत्रों ने कहा, तीनों देश एक-दूसरे के हितों का ध्यान रखते हुए आपसी सहयोग बढ़ाएंगे। तीनों पक्षों ने वार्षिक आधार पर बातचीत आयोजित करने पर सहमति व्यक्त की है।

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