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मप्र में 18 सितंबर से लग सकती है आचार संहिता

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मप्र में 18 सितंबर से लग सकती है आचार संहिता
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भोपाल(एजेंसी)। कोरोना संकट के बीच मध्य प्रदेश में 27 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होना है। चुनाव आयोग पहले ही तय कर चुका है कि बिहार विधानसभा चुनाव के साथ ही देश की 65 सीटों पर उपचुनाव कराये जाएंगे। सूत्रों के मुताबिक उपचुनाव के लिए 18 सितंबर से आचार संहिता लगाने की तैयारी की जा रही है।

प्रमुख त्यौहारों के चलते चुनाव आयोग तारीखों में तालमेल बैठाने की कोशिश कर रहा है। अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में चुनाव कराये जा सकते हैं। बिहार में वर्तमान सरकार 30 नवंबर 2015 को बनी थी। जिसके चलते यहां की सरकार के कार्यकाल के ख़त्म होने (29 नवंबर) के पहले यहां विधानसभा चुनाव कराने होंगे। 17 सितंबर तक पितृ पक्ष है।

इसके बाद अधिमास लग जाएगा। फिर 17 से 25 अक्टूबर तक नवरात्रि है। इसलिए 26 से 31 अक्टूबर तक 64 विस सीटों और एक लोकसभा सीट पर चुनाव कराए जा सकते हैं। जिसमे मध्य प्रदेश की 27 सीटें भी शामिल हैं। वहीं दीपावली और छठ जैसे त्यौहारों के कारण आयोग बिहार में चुनाव की सारी प्रक्रिया 12 नवंबर तक पूरी कराने की तैयारी कर रहा है।

इसी के साथ 65 सीटों के उपचुनावों (मध्यप्रदेश सहित) के परिणाम घोषित करने की तैयारी है। यदि बिहार के परिणाम 12 नवंबर तक आए तो मध्यप्रदेश के परिणाम भी इसी तारिख के आस पास आ सकते हैं।प्रतिष्ठा दांव पर, दमखम से मैदान में उतरी शिवराज-महाराज की जोड़ीचुनाव आयोग ने इस बार चुनाव प्रचार से लेकर मतदान केंद्रों तक के लिए कोविड-19 प्रोटोकोल घोषित किया है।

जिसके तहत ही पूरी चुनाव प्रक्रिया संपन्न की जाएगी। 27 विधानसभा सीटों में 16 विधानसभा सीटें ग्वालियर चंबल संभाग की है, जहां पर कांग्रेस छोड़ बीजेपी में आए ज्योतिरादित्य सिंधिया की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। शिवराज और सिंधिया की जोड़ी यहाँ ताबड़तोड़ सभाएं कर करोड़ों की सौगात दे रहे हैं। राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी है।

बसपा और कांग्रेस प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर चुकी है।ऐसा है सीटों का गणितसरकार बनी रहने के लिए बीजेपी को केवल 9 सीटों की जरूरत है। वर्तमान में उसके पास 107 विधायक हैं जबकि कांग्रेस को अगर वापस सत्ता में लौटना है तो उसे सभी 27 सीटें जीतनी होगी जिसकी संभावना न्यूनतम है। हालांकि कांग्रेस इस बात की उम्मीद कर रही है कि यदि वह ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतती है तो एक बार फिर सपा बसपा और निर्दलीय विधायक उसका दामन थाम सकते हैं।

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