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कोरोना काल में भी गुजरात ने विकास की गति को अविरत जारी रखाः मुख्यमंत्री

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मुख्यमंत्री विजय रूपाणी

छोटाउदेपुर(एजेंसी)| मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने कहा कि पूरे विश्व में कोरोना महामारी के कारण विकास की गति रुक गई है, लेकिन गुजरात ने इस महामारी का मजबूती के साथ सामना करते हुए विकास की गति को अविरत जारी रखा है। कोरोना काल के चलने के बावजूद पिछले पांच महीने में राज्य में 25 हजार करोड़ रुपए के विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास कर जनसुविधा की बेहतरी की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाए हैं। मुख्यमंत्री ने सोमवार को छोटा उदेपुर जिले के बोडेली में जिले के नागरिकों की सुविधा और कल्याण के लिए 613.19 करोड़ रुपए के विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास करते हुए यह बात कही।

छोटा उदेपुर जिले के नागरिकों को शुद्ध पेयजल सुलभ कराने के लिए 601.88 करोड़ रुपए के कार्य भी इसमें शामिल हैं। राज्य के सभी घरों में वर्ष 2022 तक नल से जल पहुंचाने के दृढ़ संकल्प को दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि गुजरात को पानीदार राज्य बनाना है। राज्य में बिजली और गैस ग्रिड की तरह ही जल वितरण के लिए 1 लाख किलोमीटर लंबी पाइपलाइन की वाटर ग्रिड स्थापित कर आखिरी घर तक पीने का शुद्ध पानी पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि राज्य में पिछले एक महीने में जलापूर्ति की विभिन्न योजनाओं के 5700 करोड़ रुपए के कार्य शुरू किए गए हैं।[ads2]

रूपाणी ने विकास विरोधियों की आलोचना करते हुए कहा कि भूतकाल की स्थिति पर यदि नजर डालें तो पहले केवल 26 फीसदी घरों में ही नल कनेक्शन की सुविधा थी, जिसे बढ़ाकर हमारी सरकार ने 82 फीसदी किया है। नल से जल योजना को लेकर गुजरात के सुदृढ़ प्रबंधन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का वर्ष 2024 तक नल से जल योजना को साकार करने का संकल्प है, लेकिन गुजरात वर्ष 2022 तक राज्य के सभी अर्थात सौ फीसदी घरों तक नल से जल पहुंचा देगा। उन्होंने यह भी कहा कि अतीत में मात्र चुनाव के दौरान ही विकास कार्यों की याद आती थी।

पर्याप्त वित्तीय प्रावधानों या योजना के बगैर ही विरोधियों द्वारा शिलान्यास के नाम पर नाटक किए जाते थे। चुनान निपटने के बाद उस योजना को भुला दिया जाता था, और तो और शिलान्यास का पत्थर भी बरसों तक धूल फांकते रहते थे। परन्तु, इस सरकार ने पहले सुदृढ़ वित्तीय व्यवस्था करने के बाद सैद्धांतिक और तकनीकी मंजूरी हासिल कर विकास कार्यों का शिलान्यास किया है। इसलिए हम गर्व के साथ कहते हैं कि, ‘हम जिस कार्य का शिलान्यास करते हैं, उसका लोकार्पण भी हम ही करते हैं।’[ads3]

उन्होंने आलोचकों को उस बयान की याद दिलाई जिसमें देश के पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा था कि, केंद्र सरकार एक रुपया विकास के लिए भेजती है, तो जनता के पास केवल 15 पैसे पहुंचते हैं। रूपाणी ने कहा कि अतीत की सरकारों के खजाने में बड़े छेद हुआ करते थे और बिचौलिए रुपए में से 85 पैसे हजम कर जाते थे। लेकिन नरेन्द्रभाई मोदी कहते हैं कि ‘न मैं खाता हूं और न खाने देता हूं।’ यह सरकार की पारदर्शी कार्य शैली को रेखांकित करता है। हम पारदर्शी शासन के जरिए नागरिकों के पसीने के पैसे का सदुपयोग करते हैं। रूपाणी ने इस संदर्भ में कहा कि पहले राज्य का बजट केवल 8-9 हजार करोड़ रुपए था, जो आज बढ़कर 2.10 लाख करोड़ हो गया है।[ads1]

लोगों के काम करने के लिए हमारे पास पैसा भी है और प्रबल राजनीतिक इच्छाशक्ति भी है। विरोधियों को आड़े हाथ लेते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें तो सपना देखना भी नहीं आता। पानी की योजनाओं के बारे में विरोधी कहते थे कि पाइपलाइन से मात्र हवा ही निकलेगी। लेकिन हमने योजनाओं को साकार कर दिखाया जिससे विरोधियों की हवा निकल गई है। इन योजनाओं को मुंगेरीलाल के सपने करार देने वालों को हम यह साफ कर देना चाहते हैं कि हम दिन को सपने देखकर उसे साकार करने, धरातल पर उतारने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू की गई जनकल्याण की योजनाओं की जानकारी देते हुए कहा कि हर घर में शौचालय बनाकर नारियों को गौरवपूर्ण जीवन की राह दिखाई है।[ads4]

आवास योजना के तहत पक्के मकान बनाकर दिए गए हैं। गरीब गृहिणियों के स्वास्थ्य की चिंता कर उज्ज्वला योजना के तहत घरेलू गैस कनेक्शन प्रदान किए हैं और जल जीवन मिशन के अंतर्गत पूरे भारत में नल से जल पहुंचाने का अभियान शुरू किया है। मुख्यमंत्री ने आदिवासी बहुल क्षेत्रों के व्यापक विकास के लिए राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों पर रोशनी डालते हुए कहा कि आदिवासी युवा चिकित्सक और इंजीनियर बने उसके लिए शिक्षा सुविधा के दायरे का विस्तार किया है।

कानून व्यवस्था की सुदृढ़ स्थिति को भी विकास की जरूरत करार देते हुए उन्होंने पासा कानून में संशोधन, लैंड ग्रेबिंग एक्ट, गुंडा एक्ट और यौन उत्पीड़न के मामलों में राज्य सरकार द्वारा कानून को सख्त बनाने की जानकारी उपस्थित लोगों को दी। राज्य मंत्री बचुभाई खाबड़ ने कहा कि आजादी के बाद 42 वर्ष तक आदिवासी क्षेत्रों में पीने के पानी की पर्याप्त सुविधा मुहैया नहीं कराई गई थी। नर्मदा सहित अन्य नदियां निकट होने के बाद भी पेयजल को लेकर पहले कोई ठोस योजना नहीं बनाई गई थी। लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी आयोजन के परिणामस्वरूप दूरस्थ क्षेत्रों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाया गया है।[ads5]

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