Home राज्य उत्तर प्रदेश पहली बार होगी महिला को फांसी<br>-मथुरा के फांसीघर में लटकाने की तैयारी, 13 साल पहले शबनम ने प्रेमी के साथ मिलकर परिवार के 7 लोगों की हत्या की थी

पहली बार होगी महिला को फांसी
-मथुरा के फांसीघर में लटकाने की तैयारी, 13 साल पहले शबनम ने प्रेमी के साथ मिलकर परिवार के 7 लोगों की हत्या की थी

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पहली बार होगी महिला को फांसी<br>-मथुरा के फांसीघर में लटकाने की तैयारी, 13 साल पहले शबनम ने प्रेमी के साथ मिलकर परिवार के 7 लोगों की हत्या की थी

मुरादाबाद/मेरठ/मथुरा (एजेंसी) देश में पहली बार उत्तर प्रदेश में किसी महिला को फांसी दी जाएगी। दोषी महिला को मथुरा की महिला जेल में बने फांसी घर में लटकाया जाएगा। फांसी कब होगी, इसकी अभी कोई तारीख तय नहीं हुई है। लेकिन, फांसी घर की मरम्मत और फंदे के रस्सी का ऑर्डर दिया गया है। मेरठ में रहने वाले पवन जल्लाद ने कहा कि मथुरा जेल के अफसरों ने संपर्क किया है। जैसे ही बुलावा आएगा, पहुंच जाऊंगा।
13 साल पहले अमरोहा की रहने वाली शबनम ने प्रेमी के साथ मिलकर परिवार के 7 लोगों की कुल्हाड़ी से काटकर हत्या कर दी थी। 15 फरवरी को उसकी दया याचिका राष्ट्रपति ने खारिज कर दी। शबनम अभी रामपुर जेल में बंद है। जबकि, उसका प्रेमी आगरा जेल में है।
दवा देकर बेहोश किया, फिर कुल्हाड़ी से काट दिया
अमरोहा के बाबनखेड़ी गांव की निवासी शबनम ने 15 अप्रैल 2008 को अपने प्रेमी सलीम के साथ मिलकर अपने पिता शौकत अली, मां हाशमी, भाई अनीस अहमद, उसकी पत्नी अंजुम, भतीजी राबिया और भाई राशिद के अलावा अनीस के 10 महीने के बेटे अर्श की हत्या कर दी थी। सभी को पहले दवा देकर बेहोश किया गया और इसके बाद अर्श को छोड़कर अन्य को कुल्हाड़ी से काट डाला था। शबनम ने अर्श का गला दबाकर उसे मारा था। 15 जुलाई 2010 को ट्रायल कोर्ट ने दोनों को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। इसके बाद हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट ने भी फांसी बरकरार रखी। शबनम ने बेटे का हवाला देते हुए माफी की मांग की थी। 2015 सितंबर में यूपी के गवर्नर राम नाईक ने भी शबनम की दया याचिका याचिका खारिज कर दी थी।
-जेल में ही शबनम ने बेटे को दिया था जन्म
जेल में रहने के दौरान शबनम ने 14 दिसंबर 2008 को बेटे को जन्म दिया था। उसका बेटा जेल में उसके साथ ही रहा था। 15 जुलाई 2015 में उसका बेटा जेल से बाहर आया, इसके बाद शबनम ने बेटे को उस्मान सैफी और उसकी पत्नी सौंप दिया था। उस्मान शबनम का कॉलेज फ्रेंड है, जो बुलंदशहर में पत्रकार है। शबनम ने उस्मान को बेटा सौंपने से पहले दो शर्तें रखी थी। उसके बेटे को कभी भी उसके गांव में न ले जाया जाए, क्योंकि वहां उसकी जान को खतरा है और दूसरी शर्त ये थी कि बेटे का नाम बदल दिया जाए।

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