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तुर्की में तख्तापलट की कोशिश नाकाम, 250 की मौत, 3000 से ज्यादा गिरफ्तार

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एजेन्सी, तुर्की में सेना के एक गुट ने तख्ता पलट की कोशिश को नाकाम कर दिया गया है. तुर्की के राष्ट्रपति रिसेप तईप एर्दोगन ने दावा किया है कि स्थिति अब नियंत्रण में है. अब तक 3000 सैन्य कर्मियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. बता दें कि शुक्रवार देर रात सेना के तख्तापलट करने की कोशिश में अब तक 250 लोगों की जान जा चुकी है. वहीं तकरीबन 1,154 लोग घायल हो चुके हैं. संबंधित खबरें. तुर्की में तख्तापलट की कोशिश की ये हैं 5 बड़ी वजहें · तुर्की में सेना ने की तख्तापलट की नाकाम कोशिश, 42 लोगों की मौत, 120 लोग गिरफ्तार · तुर्की: एयरपोर्ट पर सुसाइड ब्लास्ट, 36 की मौत. राजधानी अंकारा और तीन बार तख्तापलट का सामना कर चुके तुर्की में शुक्रवार को एक बार फिर इसकी कोशिश हुई। हालांकि सेना के इस प्रयास को जनता ने नाकाम कर दिया। बड़े शहरों में रातभर हुई गोलीबारी और धमाकों में 250 से ज्यादा लोग मारे गए और 1440 घायल भी हुए। लोगों ने रोका: राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन की अपील के बाद हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। लोग टैंकों के सामने लेट गए और विद्रोहियों को आगे नहीं बढ़ने दिया। इमारतों-पुलों पर कब्जा जमाए सैनिकों को भी खदेड़ दिया।सैन्य शासन का प्रयास: देश में सैन्य शासन के लिए सैनिक टैंकों के साथ सड़कों पर उतर आए। आठ करोड़ की आबादी वाले दो बड़े शहरों अंकारा और इस्तांबुल में अहम पुलों और इमारतों पर कब्जा कर लिया। विरोध कर रहे लोगों पर हेलीकॉप्टर से भी गोलियां चलाई गईं। विद्रोहियों का कहना था कि वे देश में लोकतंत्र, संवैधानिक व्यवस्था कायम करने के लिए यह सब कर रहे हैं ।हजारों जवान गिरफ्तार: दर्जनों विद्रोही सैनिकों ने इस्तांबुल में बोसफोरस पुल पर आत्मसमर्पण किया। यह पुल सारी रात इन सैनिकों के कब्जे में रहा था। वहीं, सेना के एक शीर्ष कमांडर समेत 2839 जवान-अफसर गिरफ्तार हुए हैं। सड़कों पर जमे रहें: राष्ट्रपति एर्दोगन ने कहा कि हालात सरकार के नियंत्रण में हैं। उन्होंने तख्तापलट की एक और कोशिश की आशंका के कारण लोगों से शनिवार रात भी सड़कों पर जमे रहने की अपील की।

बगावत के कारण
– एर्दोगन के पास सारी शक्ति का होना
– सरकार का अमेरिका से तनाव
– देश का इस्लाम की तरफ झुकाव
– कई बड़े सैन्य अफसरों पर मुकदमे
– सेना धर्मनिरपेक्ष, लोकतंत्र समर्थक है
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