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कोसी बराज की हकीकत

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बिहार, अपनी उम्र को पार कर चुके कोसी बराज के पुल पर लगे लोहे के खंभों को गौर से देखें तो कई जगहों से जंग खा चुके लोहे के पीलर आपको हैरत में डाल देंगे .
24 अप्रैल1965 में तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और नेपाल के महाराजाधिराज महेन्द्र वीर बिक्रम शाह देव की उपस्थिति में बराज का उद्घाटन किया गया . उस समय पुल की उम्र को 40 वर्ष आंका गया था जबकि बराज को बने 50 साल बीत चुके हैं. वहीं समय-समय पर पुल के रख-रखाव में जल संसाधन विभाग द्वारा करोड़ों रुपए खर्च किये जाते रहे हैं .बावजूद इसके पुल की स्थिति दयनीय बनी हुई है. पुल पर आपको जहाँ जगह-जगह गड्ढे दिख जायेंगे, वहीँ पुल के दक्षिणी भाग में आमलोगों के लिये बने पैदल-पथ के स्लैब कई जगहों से टूट चुके हैं.
पुल के दोनों ओर बनाये गए रेलिंग जर्जर होकर कई जगहों से टूटकर निकल चुके है. टूटे हुए रेलिंग से कभी-भी कोई नीचे गिरकर दुर्घटना का शिकार हो सकता है।
वहीं पुल के ऊपरी हिस्से में कई जगहों पर दरारें आ गई है जो पुल के ऊपर बने सड़क के उखड़ जाने से साफ नजर आती है।
नेपाल के पूर्वी और पश्चीमी भागो को जोड़ता यह सड़क नेपाल का ‘लाइफ-लाइन’ माना जाता है. इसके क्षतिग्रस्त हो जाने से सबसे ज्यादा नुकसान जहाँ नेपाल के लोगों को उठाना पड़ेगा वहीँ नेपाल के साथ रोटी-बेटी जैसे वैवाहिक संबंधों के कारण आम बिहारी भी कम परेशान नहीं होगा .
संवाददाता :-ओ.पी.राजू -इनडो-नेपाल बोर्डर -सुपुल
कोसी बराज की उम्र इस समय की पहचान हें इस का नमूना निचे दिए गई फोटोग्राफी से लगाया जा सकता हें
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