Home गुजरात हार्दिक पटेल -अमित शाह के इशारों पर काम करेंगे विजय रूपानी

हार्दिक पटेल -अमित शाह के इशारों पर काम करेंगे विजय रूपानी

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एजेन्सी, अहमदाबाद : पाटीदार आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल ने गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी का नाम आने के बाद पहली बार प्रतिक्रिया दी है. हार्दिक पटेल ने कहा है कि रूपानी अमित शाह के खास है और अब उनके इशारे से ही गुजरात में काम होगा. गौरतलब है कि पाटीदार समुदाय से आने वाले नितिन पटेल को मुख्यमंत्री बनाये जाने की चर्चा थी लेकिन आखिरी घड़ी में विजय रूपानी के नाम की घोषणा कर दी गयी. पटेल समुदाय में बढ़ सकता है असंतोष पटेल आंदोलन के अगुआ हार्दिक पटेल ने कहा कि भाजपा ने विजय रूपानी के नाम की घोषणा कर पाटीदार समुदाय के लोगों के साथ छल किया है. उन्होंने कहा कि नितिन पटेल को पाटीदार समाज के हक के लिए इस्तीफा दे देना चाहिए . गौरतलब है कि नितिन पटेल आनंदीबेन पटेल की खास माने जाते थे. कल शाम तक उनके नाम को लेकर चर्चा थी. उन्होंने न्यूज चैनल में आकर इंटरव्यू भी दिया और अपनी प्राथमिकताएं भी गिना दी लेकिन भाजपा अलाकमान ने अंतिम समय में विजय रूपानी के नाम की घोषणा कर दी. पाटीदार आंदोलन को रोक पायेंगे रूपानी विजय रूपानी संगठन के नेता माने जाते है. जैन समुदाय से आने वाले विजय रूपानी की सबसे बड़ी चुनौटी पाटीदार आंदोलन है. उनकी छवि कभी भी करिश्माई नेता के रूप में नहीं रही है. हालांकि वो अमित शाह व नरेंद्र मोदी के करीबी माने जाते है. नरेंद्र मोदी के गुजरात छोड़ने के बाद भाजपा को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा है. विजय रूपनी ने लंबे समय से भाजपा से जुड़े है. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से छात्र राजनीति की शुरूआत करने वाले रूपानी आपातकाल के दौरान जेल भी गये है. भाजपा का चौंकाने वाला फैसला विजय रुपानी को मुख्यमंत्री बनाने का निर्णय भले ही चौंकाने वाला फैसला है लेकिन मोदी -शाह की जोड़ी ने पहले भी ऐसे कई फैसले लिये हैं. कयास लगाये जा रहे थे कि गुजरात में असंतुष्ट पटेलों को काबू में रखने के लिए नितिन पटेल को मुख्यमंत्री बनाया जायेगा लेकिन भाजपा ने विजय रुपानी को सीएम बनाया. महाराष्ट्र में एकनाथ खड़से की जगह देवेंद्र फड़नवीस को सीएम बनाया गया. शाह -मोदी ने जातीय बहुलता वाले उम्मीदवारों को एक सिरे से खारिज किया है. महाराष्ट्र के बाद हरियाणा में नये प्रयोग किये गये. हरियाणा की राजनीति में दशकों तक जाट समुदाय का प्रभाव रहा है पहली बार जाट नेता को किनारे कर एक पंजाबी बिरादरी से आने वाले मनोहर लाल खट्टर को मुख्यमंत्री बनाया गया. मोदी -शाह के इस नये प्रयोग से झारखंड भी अछूता नहीं रहा.आदिवासी बहुल राज्य झारखंड में पहली बार एक गैरआदिवासी मुख्यमंत्री रघुवर दास को चुना गया. जानकारों की माने तो ऐसा निर्णय देश के राजनीतिक ट्रेंड को बदलने के लिए किया जा रहा है. इस तरह से भाजप में अभी से ही अंतर-कलह शुरु हो गया हैं, जिसका परिणाम २०१७ के चुनाव मा अयेगा.

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