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जम्मूू और कश्मीर: पैलेट गन पर नहीं लगेगा पूरी तरह प्रतिबंध, घाटी के ज्यादातर हिस्से से कर्फ्यू हटा

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कश्मीर घाटी में पैलेट गन के इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक नहीं लगाई जाएगी। विशेष परिस्थितियों में सुरक्षा बल इनका इस्तेमाल कर सकेंगे। इस संबंध में गृहमंत्रालय की ओर से गठित समिति ने अपनी रिपोर्ट दे दी है। मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने रिपोर्ट मिलने की पुष्टि करते हुए कहा कि पैलेट गन का विकल्प कायम रहेगा।

अधिकारी ने कहा कि सुरक्षा बलों से गहन विचार विमर्श करने के बाद पैलेट गन का विकल्प जारी रखने पर सहमति बनी है। गृहमंत्रालय में संयुक्त सचिव टीवीएसएन प्रसाद की अध्यक्षता में गठित सात सदस्यीय समिति ने सोमवार को अपनी रिपोर्ट गृह सचिव राजीव महर्षि को दी। इसमें पैलेट गन के अन्य उपायों को भी सुझाया गया है।
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गौरतलब है कि घाटी में भीड़ पर काबू पाने के लिए पैलेट गनों के इस्तेमाल की वजह से सरकार की आलोचना हो रही है। गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने 24-25 अगस्त को कश्मीर का दौरा किया था। इस दौरान भी विभिन्न राजनीतिक दलों और समूहों ने यह मुद्दा उठाया था। इसके बाद सिंह ने पैलेट गन का विकल्प तलाशने की बात कही थी।

मिर्ची वाले पावा गोले का विकल्प
विशेषज्ञ समिति ने पैलेट गन के विकल्प के रूप में पावा गोले के इस्तेमाल का विकल्प पर विचार किया है। पावा गोले में मिर्च भरी जाती है। करीब एक साल से वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद सीएसआईआर की लखनऊ स्थित प्रयोगशाला और भारतीय विष-विज्ञान संस्थान में इन गोलों का परीक्षण किया जा रहा था, जो अब पूरा हो चुका है। समिति ने सरकार से कहा है कि इस पावा गोले के उत्पादन के लिए तुरंत बीएसएफ की ग्वालियर स्थित टियर स्मोक यूनिट को जिम्मा देना चाहिए। कम से कम 50 हजार राउंड गोले की तुरंत जरूरत बताई गई है।
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राजनाथ के नेतृत्व में सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल जाएगा
गृहमंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल 4 सितंबर को कश्मीर घाटी में शांति बहाल करने के लिए जाएगा। प्रतिनिधिमंडल के सदस्य 4 और 5 सितंबर को घाटी के अलग-अलग हिस्सों में आम लोगों,राजनीतिक दलों,सिविल सोसायटी के लोगों और अन्य समूहों से मुलाकात करेंगे। गृह मंत्रालय के सूत्रों ने कहा,सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल अगर जम्मू यात्रा पर भी गया तो 6 तारीख तक दौरे को बढ़ाया जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक, घाटी के किसी भी समूह को प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात करने से नहीं रोका जाएगा। अगर अलगाववादी गुटों के नेता भी मुलाकात करना चाहेंगे तो उनसे प्रतिनिधिमंडल में शामिल राजनीतिक दल के सदस्य मिल सकते हैं।

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