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यौन शोषण का मामले में निम्स चेयरमैन बीएस तोमर गिरफ्तार

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रांची। यौन शोषण मामले के आरोपी राजस्थान स्थित निम्स यूनिवर्सिटी के चेयरमैन प्रो. बलवीर सिंह तोमर को रांची पुलिस ने मंगलवार को जयपुर में गिरफ्तार कर लिया। प्रो. तोमर के खिलाफ रांची के चुटिया थाने में गत वर्ष मामला दर्ज हुआ था। रांची पुलिस टीम ने राजस्थान के जयपुर के मोती डुंगरी थाना क्षेत्र स्थित आवास से उन्हें गिरफ्तार किया। मंगलवार की शाम तक ट्रांजिट रिमांड नहीं मिल पाया था। उम्मीद है कि रांची पुलिस बुधवार को जयपुर से रांची के लिए रवाना होगी।
चुटिया थाने में 06 फरवरी 2015 को रांची निवासी यूनिवर्सिटी की एक छात्रा ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पर्यवेक्षण के बाद वरीय पदाधिकारियों ने आरोप को सत्य पाया था और डाक्टर तोमर की गिरफ्तारी का आदेश दिया था। न्यायालय से गिरफ्तारी वारंट भी निकला था, लेकिन रांची पुलिस की टीम जब भी जयपुर जाती, डा. तोमर भाग निकलते थे। गिरफ्तारी के डर से डा. तोमर अक्सर विदेश भाग जाया करते थे। यहां तक कि डा. तोमर की जमानत याचिका सुप्रीम कोर्ट ने भी खारिज कर दी थी। इसके बाद से ही उनके बचने के उम्मीदों पर पानी फिर चुका था।
रांची के एसएसपी कुलदीप द्विवेदी ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि जयपुर गई रांची पुलिस की टीम में सदर थानेदार पुलिस निरीक्षक डा. भोला प्रसाद सिंह व चुटिया थानेदार पुलिस निरीक्षक ब्रजकिशोर भारती शामिल हैं।
ऐसे पकड़ में आए डॉ. तोमर
रांची पुलिस मान चुकी थी कि जयपुर पुलिस मदद नहीं कर रही है, जिस कारण तोमर पुलिस गिरफ्त में नहीं आ रहे हैं। इसी बीच रांची में प्राथमिकी दर्ज कराने वाली छात्रा की एक अन्य राजस्थान निवासी सहेली पांच दिन पहले रांची आ गई। उसने भी बताया कि डॉ. तोमर ने उसे भी अपना शिकार बनाया, लेकिन वह जयपुर में प्राथमिकी दर्ज नहीं कराना चाहती है। उसे जयपुर पुलिस पर भरोसा नहीं है इसलिए वह झारखंड की राज्यपाल से मिलकर डा. तोमर की गिरफ्तारी का अनुरोध करेगी, क्योंकि रांची में पहले से ही डॉ. तोमर के खिलाफ वारंट है। राजस्थान की लड़की ने बताया डॉ तोमर मानसिक रोगी हैं। उन्होंने वहां की कई छात्राओं की जिंदगी तबाह कर दी है। करियर के भय से छात्राएं खुलकर सामने आने से हिचकती हैं। राजस्थान पुलिस में तोमर की पैठ होने के कारण कोई उनका कुछ बिगाड़ भी नहीं पाता।
इसकी जानकारी रांची एसएसपी कुलदीप द्विवेदी को भी मिली। उन्होंने इसे चुनौती के रूप में लिया। उन्होंने उक्त छात्रा व उनके रिश्तेदार का सहारा लिया और अपनी एक टीम उनके साथ ही जयपुर भेज दी। इस बार जयपुर पुलिस को नहीं बताया कि पुलिस किसकी तलाश में वहां पहुंची है। उन्हें केवल इतना ही बताया गया था कि एक मुजरिम को पकडऩा है, जिसमें सहयोग चाहिए। जयपुर पुलिस जब तक कुछ समझ पाती, वहां की टीम के साथ रांची पुलिस ने डॉ. तोमर के आवास पर छापा मारा और उन्हें दबोचने में सफलता हाथ लगी।
यह है मामला
चुटिया थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने वाली रांची की छात्रा ने पुलिस को बताया था कि 25 अक्टूबर 2014 को डा. बलवीर सिंह तोमर एक न्यूज चैनल उद्घाटन के सिलसिले में रांची आए थे। छात्रा भी उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल हुई थी। वहां छात्रा को उन्होंने स्टूडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत यूरोप भेजने के सिलसिले में बातचीत के लिए अपने कमरे में बुलाया, जहां उसके साथ दुष्कर्म की कोशिश की। छात्रा ने इसका विरोध किया, लेकिन करियर के भय से वह पुन: जयपुर स्थित अपने कॉलेज पहुंची, जहां डॉ. तोमर की हरकत जारी रही। इसके बाद छात्रा वहां से वापस आई और चुटिया थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई।
पहले भी विवादों में रहे
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तोमर का विवादों से पुराना नाता रहा है। सबसे पहले विवाद उनकी निम्स यूनिवर्सिटी में पैसे लेकर दाखिला कराने को लेकर उठा। मामला करीब 12-13 वर्ष पुराना है। इसके बाद यूनिवर्सिटी की एक महिला कर्मचारी द्वारा यौन उत्पीडऩ की शिकायत को लेकर हुआ, लेकिन मामला रफा-दफा कर दिया गया। यूनिवर्सिटी के हॉस्टल निर्माण को लेकर भी विवाद हुआ था। सरकार ने हॉस्टल गिराने के आदेश भी दिया, लेकिन बाद में मामला ठंडे बस्ते में चला गया। एक विवाद उनके बेटे और यूनिवर्सिटी के निदेशक अनुराग तोमर को लेकर हुआ जिसमें एक महिला ने यौन शोषण के आरोप लगाया था।

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