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भारत में कारोबार के लिए ऐपल और गूगल को अपनी तकनीक को आधार कार्ड से जोड़ना होगा

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एजेन्सी, दुनिया की दिग्गज तकनीकी कंपनियों का भारत में कारोबार लगातार बढ़ रहा है। इसके साथ ही सरकार और इन कंपनियों के बीच कई मुद्दों को लेकर टकराव की स्थिति भी बन रही है। इसी साल सरकार ने फेसबुक फ्री वेब सर्विस को बैन कर दिया था, इसके अलावा ऐपल को भी लोकल सोर्सिंग रूल्स से छूट देने और अपने स्टोर खोलने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। अब भारत सरकार की ओर से कंपनियों पर सरकारी तकनीक का इस्तेमाल करने को लेकर दबाव बढ़ाया जा सकता है।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार का प्रयास है कि दिग्गज तकनीकी कंपनियां आधार का इस्तेमाल करें। फिलहाल करोड़ों भारतीयों को आधार कार्ड के जरिए बैंकिंग समेत तमाम सरकारी और गैर-सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है। इस कोशिश से जुड़े बिना इन कंपनियों के लिए भारत के तेजी से बढ़ते बाजार में अपनी पैठ बनाना मुश्किल होगा। लेकिन ऐपल और गूगल जैसी कंपनियां अपने फोन और ऑपरेटिंग सिस्टम में इंडियन रजिस्ट्रेशन, एन्क्रिप्शन यानी कोडिंग और सुरक्षा तकनीक के इस्तेमाल से बचने की कोशिश में हैं।
बॉस्टन कंसल्टिंग ग्रुप ऑफ इन इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर नीरज अग्रवाल ने कहा, ‘टेक्नॉलजी कंपनीज की ओर से कई तरह से इससे बचने की कोशिश की जा सकती है।’ कुछ सप्ताह पहले ही सरकारी अधिकारियों ने ऐपल इंक, माइक्रोसॉफ्ट, सैमसंग और गूगल की पैरंट कंपनी अल्फाबेट इंक के एग्जिक्यूटिव्स को बुलाकर मीटिंह की थी। इस दौरान अधिकारियों ने कंपनियों के प्रतिनिधियों से उनकी टेक्नॉलजी में आधार के कोडिंग को शामिल करने को लेकर चर्चा की। यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया के संचालक अजय भूषण पांडे ने कहा कि इंडस्ट्री के लोगों ने विनम्रता से पूरी बात को सुना, लेकिन किसी तरह का वादा नहीं किया। पांडे ने कहा कि हमने कंपनियों के एग्जिक्यूटिव्स से कहा, ‘अपने मुख्यालय जाइए और इस मामले पर काम कीजिए। ताकि हमारे पास आधार रजिस्टर्ड डिवाइसेज हो सकें।’

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