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सरकारी विभाग, सार्वजनिक उपक्रमों की टैक्सी सेवा के लिए नजर ओला, उबर पर

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नयी दिल्ली : टैक्सी बिल में बचत के इरादे से सरकारी विभाग तथा सार्वजनिक उपक्रम अब अपनी परिवहन जरुरतों के लिये एप्प आधारित परिवहन सेवा प्रदाता उबर और ओला जैसी कंपनियों पर विचार कर रही हैं. वहीं इन कंपनियों ने बढती हुई दर से किराया :सर्ज प्राइसिंग: के बिना सेवा देने का वादा किया है. उबर और ओला दोनों सरकारी विभागों को विशेष दरों पर टैक्सी सेवाएं देने को तैयार हैं और गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) पोर्टल पर अपना पंजीकरण कराया है. इसके अलावा ओला अपनी ‘कारपोरेट’ पेशकश के लिये विभिन्न सार्वजनिक इकाइयों (पीएसयू) के साथ बातचीत कर रही है. केंद्रीय मंत्रालयों एवं विभागों द्वारा वस्तु एवं सेवाओं की खरीद के लिये इसे पिछले महीने शुरू किया गया. इसका मकसद सरकारी खरीदों में पारदर्शिता लाना है जो करीब 10,000 करोड़ रुपये सालाना है. एक अधिकारी ने कहा कि सरकार इसके जरिये बडी बचत पर ध्यान दे रही है क्योंकि फिलहाल विभाग एक टैक्सी के लिये प्रति महीने 40,000 रुपये का भुगतान करते हैं. उसने कहा, ‘‘आपस में बनी सहमति के तहत वे हमें मासिक बिल देंगे, जो उन्होंने कभी नहीं किया। दूसरा सरकार के लिये बढती हुई दर से किराया (सर्ज प्राइसिंग) नहीं होगा.’ अधिकारी ने कहा, ‘‘प्रत्येक दिन हम कार की जरुरत होती है. अगर आप उबर ओर ओला को देखें, यह कर्म खर्चीला और बेहतर है. आपको दूरी पर नजर रख सकेंगे और बिल भी देख सकेंगे.’ सरकारी विभागों में टैक्सी सेवाओं की मांग बढ रही है. ये कंपनियां इसे व्यापार के अवसर के रूप में देख रही हैं और इस मौके का लाभ उठाना चाहती हैं. इसके अलावा घरेलू कंपनी ओला सार्वजनिक उपक्रमों को अपनी ‘कारपोरेट’ सेवा की पेशकश कर रही है.
ओला प्रमुख (कारपोरेट) अंकित जैन ने कहा कि कंपनी अपनी ‘कारपेरेट’ पेशकश के तहत विभिन्न सार्वजनिक उपक्रमों के साथ बातचीत कर रही हैं कंपनी को उम्मीद है कि यह देश की शीर्ष 100 कंपनियों को उसके प्लेटफार्म से जोडने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. जैन ने कहा कि कई निजी कंपनियां : सरकारी संगठन अभी बुकिंग के लिये परंपरागत रास्ता अपनाते हैं. इसके तहत वे अपनी यात्रा जरुरतों को टै्रवल एजेंसी के जरिये प्रबंधित करते हैं या कर्मचारियों द्वारा किये गये खर्च को ‘रिम्बर्समेंट’ कर सुविधा उपलब्ध कराते हैं.

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