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भारत-रूस में एस-400 वायु रक्षा मिसाइलों का होगा करार

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गोवा में होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन में भारत और रूस के बीच रक्षा क्षेत्र में अहम करार होंगे. शनिवार को दोनों देश 3340 करोड़ रुपए के रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे.
दोनों देश के बीच होने वाले इस समझौते में रूस भारत को जमीन से हवा में मार करने वाली एस-400 मिसाइलों की आपूर्ति करेगी.रूसी राष्ट्रपति पुतिन के दफ्तर क्रेमलिन के अधिकरी यूरी उशकोव के अनुसार गोवा में ब्रिक्‍स सम्‍मेलन के दौरान रक्षा संबिथ समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे.S-4oo-Missile

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समझौते पर हस्ताक्षर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्‍ट्रपति ब्लादिमिर पुतिन के सामने होगी. ब्रिक्‍स में चीन, रूस, ब्राजील, भारत और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं.images (24)
एस-400 एंटी मिसाइल डिफेंस सिस्टम से विमानों, मिसाइल्स और ड्रोन्स को निशाना बनाया जा सकेगा. रूस ने इस सिस्टम को सीरिया में तैनात कर रखा है. अगर भारत यह डील साइन करता है तो वह चीन के बाद ऐसा सिस्टम खरीदने वाला दूसरा देश होगा.
इधर गोवा के मुख्यमंत्री लक्ष्मीकांत पारसेकर ने गुरुवार को कहा कि ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को गोवा पहुंचेंगे और मोदी तथा रूस के राष्ट्रपति ब्लादीमिर पुतिन दो दिवसीय सम्मेलन के दौरान एक ही रिसॉर्ट में रुकेंगे.
भारत रूस से बेहद आधुनिक एस-400 वायु रक्षा प्रणाली ‘ट्रायम्फ’ खरीदने जा रहा है। लंबी दूरी की वायु रक्षा प्रणाली के अरबों डॉलर के इस सौदे पर शनिवार को गोवा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की बातचीत के बाद मुहर लगेगी। रूस की समाचार एजेंसी तास ने बृहस्पतिवार को यह खुलासा किया है। समाचार एजेंसी ने कहा है कि ब्रिक्स सम्मेलन में शिरकत करने के लिए भारत पहुंच रहे पुतिन और प्रधानमंत्री मोदी के बीच बातचीत के बाद एस-400 ट्रायम्फ विमान भेदी मिसाइल प्रणाली की भारत को आपूर्ति के समझौते पर हस्ताक्षर होंगे। रूसी राष्ट्रपति के सलाहकार यूरी उशाकोव के हवाले से एजेंसी ने बताया है कि भारत ने रूस से वायु रक्षा प्रणाली के पांच सिस्टम खरीदने पर रुचि दिखाई है। यह प्रणाली एक साथ तीन तरह की मिसाइल दागने में सक्षम है और एक साथ 36 लक्ष्यों को भेद सकती है। इतना ही नहीं यह प्रणाली 400 किमी दूर तक दुश्मन विमान, मिसाइल और यहां तक कि ड्रोन को भी मार गिराने में सक्षम है। उशाकोव ने कहा कि दस्तावेज पर बंद कमरे में हस्ताक्षर किए जाएंगे। हालांकि उन्होंने डील का ज्यादा ब्योरा देने से इनकार कर दिया। उशाकोव ने कहा कि पुतिन और मोदी क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर संयुक्त बयान भी जारी करेंगे। दोनों देश आपसी संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के कदमों पर चर्चा करेंगे। इस दौरान दोनों देशों के बीच करीब 18 दस्तावेज पर हस्ताक्षर होंगे।
चीन पहले ही कर चुका है सौदा भारत अगर रूस से इस वायु रक्षा प्रणाली को खरीदने का सौदा करता है तो वह इसे खरीदने वाला दूसरा देश होगा। चीन पिछले साल ही इस वायु रक्षा प्रणाली के लिए रूस के साथ 3 अरब डालर का सौदा कर चुका है।
पहले सिर्फ रूसी सेना के पास थी यह प्रणाली एस-400 प्रणाली एस-300 का ही उन्नत संस्करण है। यह प्रणाली पहले केवल रूसी सेनाओं के पास ही थी। रूस की अल्माज-अंते कंपनी इस रक्षा प्रणाली को बनाती है और यह 2007 से रूसी सेनाओं में शामिल है।
अन्य रक्षा सौदों पर भी लग सकती है मुहर रूस इसके अलावा भारतीय नौसेना के लिए प्रोजेक्ट 11356 फ्रिगेट के सौदे पर भी हस्ताक्षर करने की तैयारी कर रहा है। इसके अलावा रूस की भारत में संयुक्त उपक्रम के जरिए कामोव-226टी हेलीकॉप्टर बनाने की भी योजना है।

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