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प्रधानमंत्री मोदी ने किया साहस और वीरता के तीर्थ शौर्य स्मारक का लोकार्पण

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भोपाल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय सेना द्वारा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में की गई सर्जिकल स्ट्राइक पर सबूत मांगने वाले अपने विरोधियों को किसी का नाम लिए बगैर शुक्रवार को कड़ा जवाब दिया और कहा कि सेना को हमारे ‘सोने’ से कोई शिकायत नहीं, लेकिन अगर हम जागते समय ‘सोएंगे‘, तो सेना माफ नहीं करेगी। मोदी तीन कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए अपरान्ह चार बजे के बाद यहां पहुंचे और लगभग तीन घंटे बिताकर सवा सात बजे गोवा के लिए रवाना हो गए। उन्होंने सबसे पहले पूर्व सैनिक सम्मेलन एवं शौर्य सम्मान सभा में राज्य के विभिन्न अंचलों से आए नागरिकों और पूर्व सैनिकों तथा उनके परिजनों को संबोधित किया।
लगभग चवालीस मिनट के अपने संबोधन में उन्होंने किसी का नाम लिए बगैर वन रैंक वन पेंशन (ओआरओपी) के मुद्दे पर पूर्ववर्ती सरकारों की भी खिंचाई की। इस कार्यक्रम के बाद मोदी यहां हबीबगंज जैन मंदिर परिसर में दिगंबर जैन संत आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के दर्शन करने पहुंचे और उनका आशीर्वाद लिया। इसके बाद यहां राज्य सरकार की ओर से बनाए गए शौर्य स्मारक का लोकार्पण किया। मोदी ने यहां ऐतिहासिक लाल परेड मैदान पर आयोजित पूर्व सैनिकों के सम्मेलन में अपने संबोधन में कहा- सेना का सबसे बड़ा शस्त्र उसका मनोबल है। उसका ये मनोबल शस्त्रों से नहीं आता, सवा सौ करोड़ देशवासियों के उनके पीछे खड़े होने से आता है। देश के नागरिकों के चैन से सोने से ही सेना के जवानों को खुशी मिलती है। हमारे सोने से सेना को कोई शिकायत नहीं है, पर अगर हम जागते समय भी सो जाएं, तो सेना माफ नहीं करती। दुर्भाग्य से कभी-कभी ऐसा ही होता है। सेना के जवान हमेशा जागते रहते हैं, हमें भी जागते समय जागते ही रहना चाहिए। पाक प्रायोजित आतंकवाद पर सरकार की पिछले दो सालों में आलोचना करने वाले विरोधियों को भी कड़ा जवाब देते हुए मोदी ने कहा- सेना बोलती नहीं है, पराक्रम करती है। लोग रोज मेरे बाल नोचते थे, मोदी सो रहा है, कुछ कर नहीं रहा, पर जैसे हमारी सेना बोलती नहीं, पराक्रम करती है, वैसे ही हमारे रक्षा मंत्री भी बोलते नहीं…।
इसके बाद मोदी ने वाक्य पूरा नहीं करते हुए अपने ही अंदाज में कुछ देर का विराम लिया और सभा में तालियां गड़गड़ा उठीं। सर्जिकल स्ट्राइक के बाद प्रधानमंत्री मोदी के इस बहुप्रतीक्षित संबोधन के दौरान उन्होंने पाकिस्तान को भी आड़े हाथों लिया। भारतीय सेना के मानवीय पहलुओं का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि अशांत चल रहे यमन में हजारों लोग फंसे थे, जिन्हें बचाने के लिए हमने अपनी सेना भेजी। वहां से हमारी सेना दुनिया के अनेक देशों के साथ पाकिस्तान के नागरिकों को भी वहां से बचा कर ले लाई।
रणबांकुरों के शौर्य को सलाम करते हुए अपने संबोधन के दौरान मोदी ने जोर देते हुए कहा कि हमारे पूर्वजों ने कभी किसी की जमीन के लिए झगड़ा नहीं किया, ना ही कभी किसी देश को दबोचने के लिए आक्रमण किया, लेकिन मूल्यों और आदर्शों के लिए अगर जंग की नौबत आई, तो हमारी सेना पीछे नहीं हटेगी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सेना के लिए ओआरओपी आधार पर ही सातवां वेतन आयोग लागू करने का निर्णय लिया गया है। मोदी ने कहा कि सेना प्रमुख ने वेतन-भत्तों के संबंध में एक पत्र लिखा है। उस पर विचार किया जा रहा है, इसमें जल्द निर्णय लिया जाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि ओआरओपी को चार किश्तों में देने का निर्णय लिया गया है। इसमें अब तक पांच हजार पांच सौ करोड़ रुपए वितरित किए जा चुके हैं। प्रधानमंत्री ने रक्षा के क्षेत्र में देश के आत्मनिर्भर होने की महती आवश्यकता बताते हुए कहा कि इस दिशा में उनकी सरकार काम कर रही है और आने वाले दिनों में हम न सिर्फ अपनी जरूरतें पूरी कर सकेंगे, बल्कि अन्य राष्ट्रों को भी रक्षा संबंधी सामग्री बेच सकेंगे। इस दिशा में वह पिछले दो वर्षों से मंथन करते आ रहे हैं और काम भी प्रारंभ हो गए हैं। उन्होंने भरोसा दिलाते हुए कहा कि इसके चलते आने वाले समय में हम रक्षा संबंधी अपनी जरूरतें भी पूरी कर सकेंगे और अन्य राष्ट्रों को भी सैन्य सामग्री मुहैया करा सकेंगे मोदी ने इस कार्यक्रम के अलावा शौर्य स्मारक के लोकार्पण के अवसर पर सेना के शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने स्मारक का अवलोकन भी किया। इसके बाद वह सीधे हवाईअड्डा पहुंचे और विशेष विमान से गोवा रवाना हो गए।

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