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सामानों के बहिष्कार पर चीन ने चेताया, भारत को होगा ज्यादा नुकसान

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नई दिल्ली। देश में हो रहे चीनी सामान के बहिष्कार को लेकर चीन ने भारत को चेतावनी दी है। चीन ने कहा कि इससे दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग प्रभावित हो सकता है। नई दिल्ली में चीन के दूतावास की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इस तरह के किसी बहिष्कार का उसके देश के निर्यात पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा उल्टा इसका सबसे ज्यादा नुकसान भारत के व्यापारियों और ग्राहकों का होगा क्योंकि उनके पास कोई समुचित विकल्प नहीं है। गौरतलब है कि भारत में पाकिस्तानी आतंकियों ने छिपकर हमला किया था। उनके इस हमले में भारतीय सेना के 19 जवान शहीद हो गए थे। इसके बाद से भारत औऱ पाकिस्तान के बीच युद्ध जैसे हालात हो गए थे। इस तनाव में चीन ने पाकिस्तान का साथ दिया है। जिस वजह से भारत में चीनी सामान का बहिष्कार हो रहा है।
चीन ने कहा है कि वह दुनिया का सबसे बड़ा व्यापारिक देश है और 2015 में उसका निर्यात 2276.5 अरब डॉलर के बराबर था और भारत को किया गया निर्यात इसका मात्र दो प्रतिशत था। आपको बता दें कि भारत सरकार ने आधिकारिक तौर पर ऐसे किसी बहिष्कार की बात नहीं की है। images
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नई दिल्ली में चीनी दूतावास के प्रवक्ता झी लियान ने गुरुवार को कहा कि सामान के बॉयकाट का नकारात्मक असर भारत में चीन उद्यमों के निवेश पर पड़ रहा है। इससे द्विपक्षीय सहयोग भी प्रभावित हो रहा है जो न तो चीनी अवाम चाहती है और न ही भारतीय यह देखना चाहेंगे। लियान ने कहा कि चीनी सामान का बॉयकाट दिवाली से संबंधित उत्पादों तक सीमित नहीं है। बल्कि इसका दायरा बढ़ रहा है। दीर्घकाल में बॉयकाट न केवल चीनी उत्पादों की ब्रिकी को प्रभावित करेगा, बल्कि भारतीय उपभोक्ता बाजार पर भी नकारात्मक असर डालेगा।
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चीनी प्रवक्ता ने कहा, बिना किसी बिकल्प के इस तरह के अभियान का सबसे अधिक खामियाजा भारतीय कारोबारियों और उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ेगा। गौरतलब है कि भारत चीन का दक्षिण एशिया में सबसे बड़ा कारोबारी साझेदार है। दोनों देशों के बीच वर्ष 2015 में करीब 71 अरब डॉलर का कारोबार हुआ, जिसमें भारत 50 अरब डॉलर के घाटे में रहा।
विरोध की वजह Chinesegoodsdone-27-10-2016-1477565990_storyimage
चीन आतंकवाद सहित तमाम मुद्दों पर पाकिस्तान का साथ दे रहा है। यही वजह है कि उसने कश्मीर के उरी में 18 सितंबर को सैन्य कैंप पर हुए हमले पर भी ढुलमुल रवैया अपनाया। यहां तक भारत द्वारा पाकिस्तान के साथ सिंधु नदी संधि की समीक्षा करने की खबरों के बीच उसने ब्रह्मपुत्र नदी के एक सहयोगी नदी का पानी रोक दिया। मुंबई हमलों में वांछित आतंकी मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र से आतंकी घोषित कराने के प्रस्ताव में रोड़े अटकाए, एनएसजी में विरोध किया, जिसके बार भारत में चीन के खिलाफ गुस्सा बढ़ा।
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दोहरी मार से परेशान
चीन की बौखलाहट की बड़ी वजह उसपर पड़ रहा दोहरी मार है। एक ओर उसके आर्थिक स्थिति डंवाडोल है। गत तीन दशक में पहली बार विकास दर सात फीसदी से भी नीचे आने की आशंका जताई जा रही है। पिछले साल उसके कुल निर्यात में कमी आई है। ऐसे में भारत में उसके उत्पाद के विरोध से निर्यात में और कमी आने की आशंका बढ़ गई है।
भारत सरकार का रुख
भारत सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि उसने चीनी उत्पाद पर आधिकारिक रूप से कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है। विश्व व्यापार संगठन के नियमों के अनुसार इस तरह की कार्यवाही सामान्य परिस्थितियों में नहीं की जा सकती है।
विरोध का असर
चीनी सामान के बहिष्कार की मुहिम का असर कई जगहों पर देखने को मिला है। दिल्ली, महाराष्ट्र, झारखंड, उत्तर प्रदेश से आ रही रिपोर्ट के मुताबिक दिवाली पर खासतौर से इस्तेमाल किए जाने वाले चीनी सामान की मांग में पिछले वर्ष के मुकाबले 30 फीसदी की कमी आ सकती है।2016_10$largeimg28_Oct_2016_050159269

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