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SC की मोदी सरकार पर तल्ख टिप्पणी- क्या आप न्यायपालिका पर ताला लटकाना चाहते हैं?

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कोलेजियम की सिफारिशों के बावजूद हाईकोर्टों में जजों की नियुक्ति नहीं किए जाने पर नाराजगी जताते हुए सरकार से कहा कि आप पूरे संस्थान (न्यायपालिका) को काम करने से पूरी तरह से नहीं रोक सकते। प्रधान न्यायाधीश तीरथ सिंह ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि अदालती कक्ष बंद हैं। क्या आप न्यायपालिका को बंद करना चाहते हैं? आप पूरे संस्थान के काम को पूरी तरह ठप नहीं कर सकते। पीठ ने कहा कि ‘मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर’ (एमओपी) को अंतिम रूप नहीं दिए जाने के कारण नियुक्ति प्रक्रिया ‘ठप नहीं हो सकती’। कोर्ट ने जजों की नियुक्ति से जुड़ी फाइलों को आगे बढ़ाने की धीमी रफ्तार की आलोचना की और चेताया कि वह तथ्यात्मक स्थिति पता करने के लिए पीएमओ और विधि एवं न्याय मंत्रालय के सचिवों को तलब कर सकती है। इस पीठ में न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव भी शामिल थे।जजों की नियुक्ति को लेकर राहुल ने मोदी पर साधा निशाना
प्रधान न्यायाधीश टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, सरकार से कहा अदालती कक्ष बंद हैं। क्या आप न्यायपालिका को बंद करना चाहते हैं। पीठ ने कहा कि मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर (एमओपी) को अंतिम रूप नहीं दिए जाने के कारण नियुक्ति प्रक्रिया ठप नहीं हो सकती। अदालत ने न्यायाधीशों की नियुक्ति से जुड़ी फाइलों को आगे बढ़ाने की धीमी रफ्तार की आलोचना की। साथ ही चेतावनी दी कि वह तथ्यात्मक स्थिति पता करने के लिए पीएमओ और विधि एवं न्याय मंत्रालय के सचिवांे को तलब कर सकती है।
जजों की नियुक्ति में देरी के लिए केंद्र दोषी कैसे? पीठ ने कहा, कोई गतिरोध नहीं होना चाहिए। आपने एमओपी को अंतिम रूप दिए बगैर जजों की नियुक्ति संबंधी फाइलों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई है। एमओपी को अंतिम रूप देने का न्यायपालिका में नियुक्ति प्रक्रिया के साथ कोई लेना देना नहीं है। अदालत ने कहा, कर्नाटक हाईकोर्ट के कई कक्ष बंद हैं क्योंकि कोई जज नहीं है। इससे पहले केंद्र का पक्ष रहते हुए अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि जजों की नियुक्ति में देरी की एक वजह एमओपी को अंतिम रूप नहीं दिया जाना है। उन्हांेने पीठ को आश्वासन दिया कि न्यायाधीशों की नियुक्ति पर निकट भविष्य में और प्रगति होगी। अदालत अब इस मामले की सुनवाई 11 नवंबर को करेगी। गौरतलब है कि इस पीठ में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एल नागेश्वर राव भी शामिल हैं।
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