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सर्वदलीय बैठक में बोले मोदी- भ्रष्टाचार व कालेधन के खिलाफ धर्मयुद्ध है नोटबंदी

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Prime Minister, Narendra Modi chairs an all party meeting at Parliament on the eve of Parliament Session in new Delhi on tuesday. tribune Photo
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नईदिल्ली,संसद का बुधवार (16 नवंबर) से शुरू होने वाला शीतकालीन सत्र काफी हंगामेदार रहेगा जब एकजुट विपक्ष ने बड़े नोटों को अमान्य करने के सरकार के कदम पर सरकार को घेरने की तैयारी की है और इसे ‘नोट घोटाला’ करार देते हुए इसकी जांच कराने की मांग की है। विपक्षी दल सत्र के दौरान सीमापार लक्षित हमला, जम्मू कश्मीर की स्थिति, वन रैंक-वन पेंशन और किसानों की स्थिति जैसे मुद्दों को उठायेंगे जो एक महीने चलेगी। विपक्ष के एजेंडे में बड़े नोटों को अमान्य करने के निर्णय पर संयुक्त संसदीय समिति के गठन की मांग भी है। सत्र से पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार (15 नवंबर) को विपक्षी नेताओं से मुलाकात की और कालाधन और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में सहयोग देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इसी मकसद से बड़े नोटों को अमान्य करने का कदम उठाया गया है। संसद के शीतकालीन सत्र की पूर्वसंध्या पर आयोजित सर्वदलीय बैठक की समापन टिप्पणी में प्रधानमंत्री ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव साथ साथ कराने का समर्थन किया, साथ ही इस बात का चुनाव के सरकारी वित्त पोषण का भी पक्ष लिया और सभी दलों से इस पर चर्चा करने का आग्रह किया। मोदी ने कहा कि सरकार विपक्ष की ओर से उठाये गए सभी मुद्दों पर चर्चा कराने और जवाब देने को तैयार है। उन्होंने उम्मीद जतायी कि संसद का यह सत्र सार्थन होगा और इस संदर्भ में पिछले सत्र में जीएसटी विधेयक पारित कराने में सभी दलों के सहयोग को भी याद किया। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘हमने कालाधन, भ्रष्टाचार के साथ फर्जी नोटों के खिलाफ युद्ध छेड़ा है जो सीमा पार आतंकवाद के कारणों में है। सभी दलों को राष्ट्रहित के मुद्दों पर एक साथ आना चाहिए। नोटबंदी पर बुधवार को सड़क से संसद तक संग्राम के आसार हैं। एक तरफ ‘मोदी सेना’ है और दूसरी तरफ विपक्ष के साथ शिवसेना। एक तरफ संसद का शीतकालीन सत्र है, दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी का राष्ट्रपति भवन तक मार्च। इस मार्च में शिवसेना भी उनके साथ हो सकती है।
मंगलवार का दिन वार-पलटवार की तैयारियों में बीता। कांग्रेस की अगुवाई में विपक्षी दलों ने साझा रणनीति बनाने के लिए लगातार दूसरे दिन बैठक की। 13 दलों के प्रतिनिधियों की इस बैठक में सरकार को दोनों सदनों में घेरने पर तो सहमति बनी, लेकिन राष्ट्रपति से मुलाकात के तृणमूल कांग्रेस के प्रस्ताव पर नहीं। उधर, विपक्ष की साझा बैठक से पहले कांग्रेस ने बैठक की। इसकी अगुवाई कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के बजाय उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने की। शाम को सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाई। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान यह संदेश जाना चाहिए कि राष्ट्रहित के मुद्दों पर सभी दल एकसाथ हैं। उन्होंने सभी दलों से कालाधन, भ्रष्टाचार के मुद्दों पर संसद के भीतर और बाहर सहयोग करने का आग्रह किया। प्रधानमंत्री ने चर्चा काे विस्तृत करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि चुनावी फंडिंग और देशभर में एकसाथ चुनाव कराने के मुद्दे पर चर्चा करनी चाहिए।
उधर, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद ने सर्वदलीय बैठक के बाद कहा कि सरकार विपक्ष की एकजुटता तोड़ने के लिए चाहे जितना जोर लगा ले, लेकिन हम नहीं टूटेंगे। आजाद ने कहा कि विपक्ष वन रैंक-वन पेंशन और किसानों के मुद्दे भी उठाएगा।
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