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मध्य प्रदेश में प्राइवेट हॉस्पिटल को लेने होंगे पुराने नोट

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मध्यप्रदेश,शहर में आसपास के 13 जिलों से मरीज आते थे। मगर चार दिनों से लगातार मरीजों की संख्या गिरती जा रही है। हालांकि कई डाक्टर व नर्सिंग होम 500 और 1000 के नोट को ले रही है। उसका खुदरा भी उपलब्ध करवा रही है। बावजूद मरीज दूसरी जगहों से कम ही आ रहे है। मायागंज के इमरजेंसी को छोड़ दे तो ओपीडी में भी मरीजों की संख्या हजार के नीचे ही पहुंच रही है। हालांकि मायागंज प्रशासन की ओर से कई मरीजों का मुफ्त में भी रजिस्ट्रेशन करवा रही है। फिर भी लोगों के दिलों में खुदरा को लेकर बैठे डर की वजह से वो आने जाने में भी परहेज कर है। अब पुराने बड़े नोट मरीज के अकाउंट में जमा कराकर पेमेंट ले सकेंगे प्राइवेट नर्सिंग होम प्राइवेट हॉस्पिटल और नर्सिंग होम मरीजों से सीधे 500-1000 के पुराने नोट स्वीकार तो नहीं करेंगे। लेकिन वे एक पत्र जारी करके यह पैसा मरीज के खाते जमा करवाकर अपने खाते में ट्रांसफर कराने की व्यवस्था कर सकते हैं। प्राइवेट नर्सिंग हाेम संचालकों के प्रतिनिधि और डायरेक्टर हेल्थ केके ठस्सू के बीच मंगलवार शाम को हुई बैठक में यह सहमति बनी। दरअसल, सोमवार को केंद्र सरकार में आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास ने कहा था कि सभी तरह की आपातकालीन सेवाओं में भुगतान के लिए 500-1000 के पुराने नोट मान्य होंगे। इसमें उन्होंने प्राइवेट हॉस्पिटल अौर नर्सिंग होम में इलाज के लिए होने वाले पेमेंट को भी शामिल किया था। इसके बाद दिनभर उहापोह की स्थिति बनी रही। प्रदेश आईएमए के सदस्य डॉ. संजय सिंह ने कहा कि ऑपरेशन से लेकर दवा दुकान तक में 500 और 1000 लिए जा रहे है। बावजूद मरीज कतरा रहे है। उन्होंने कहा कि आईएमए के आह्वान पर कई क्लीनिक और नर्सिंग होम में बड़े नोट लिए जा रहे है। आईएमए भागलपुर सचिव डॉ. संजय निराला ने कहा कि मरीजों को परेशानी न हो। इसके लिए हर संभव मदद की जा रही है। कोई डाक्टर नहीं चाहता है कि सिर्फ खुदरा की वजह से मरीज उनके यहां से चले जाए। हटिया रोड में नामी सर्जन के यहां भर्ती मरीज के परिजन विक्रम साह ने कहा कि सुबह में लाइन में लगा तो आज छुट्टे मिले है। मगर यह परेशानी डाक्टर और दवा दुकानदार नहीं समझता है। दवा से लेकर होटल तक में 500 और 1000 के नोट कोई छूता नहीं है। दो दिन पहले मरीज को दवा भी नहीं मिल पाया था। मायागंज स्थित दवा दुकान संचालक की परेशानी है कि वो मरीजों से 500 और 1000 तो ले रहे है। मगर छुट्टा कराने के लिए दो कर्मचारी सुबह से ही लाइन में लगाना पड़ता है। जो शाम को खाली हाथ ही आ पाता है। ऐसे में कहां तक खुदरा की व्यवस्था हो पाएगा।

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