Home क्राइम सूरत में बाल श्रम विरोधी अभियान: दो माह में 16 छापे, 20...

सूरत में बाल श्रम विरोधी अभियान: दो माह में 16 छापे, 20 बाल श्रमिक और 41 किशोर श्रमिक मुक्त, कई संस्थानों पर एफआईआर

2
0
surat child labour
Listen to this article

सूरत। सूरत जिला प्रशासन ने मई और जून 2026 के दौरान बाल श्रम उन्मूलन अभियान के तहत व्यापक कार्रवाई करते हुए 16 छापेमारी और विशेष अभियान चलाए। इस दौरान 20 बाल श्रमिकों और 41 किशोर (एडोलसेंट) श्रमिकों को विभिन्न औद्योगिक और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से मुक्त कराया गया। अधिकारियों के अनुसार, मुक्त कराए गए 19 बच्चों और किशोरों का शैक्षणिक पुनर्वास भी किया गया है।

जिला प्रशासन ने बताया कि यह अभियान जिला कलेक्टर तेजस परमार के मार्गदर्शन में गठित जिला टास्क फोर्स द्वारा चलाया गया। अभियान में श्रम विभाग, जिला बाल संरक्षण इकाई, पुलिस, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU), स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग की संयुक्त टीमें शामिल थीं।

अभियान के तहत वराछा रोड, मिनी बाजार, सलाबतपुरा, भेस्तान, पलसाणा और कामरेज सहित विभिन्न क्षेत्रों में स्थित औद्योगिक इकाइयों, डाइंग मिलों, होटल-रेस्तरां और अन्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया।

मई महीने में छह छापों और दो विशेष अभियानों के दौरान 16 बाल श्रमिक तथा 33 किशोर श्रमिकों को मुक्त कराया गया। इनमें गुजरात के अलावा राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार और उत्तर प्रदेश से आए बच्चे और किशोर भी शामिल थे। जून में आठ और छापों के दौरान चार बाल श्रमिक तथा आठ किशोर श्रमिकों को मुक्त कराया गया।

प्रशासन के अनुसार, मुक्त कराए गए बच्चे और किशोर डाइंग मिलों, जरी उद्योग, साड़ी पैकेजिंग, सिलाई कार्य, हॉटफिक्स मशीन संचालन, खाद्य निर्माण तथा होटल-रेस्तरां जैसे कार्यों में लगे हुए थे। सभी बाल श्रमिकों को कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद पुनर्वास के लिए चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC), सूरत के समक्ष प्रस्तुत किया गया।

नियमों के उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई

जिला प्रशासन ने बताया कि बाल श्रमिकों को रोजगार देने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की गई है। मई में छह संस्थानों में से चार के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई, जबकि दो मामलों में एफआईआर की प्रक्रिया जारी है। किशोर श्रमिकों को नियोजित करने वाले संस्थानों को श्रम कानूनों तथा ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस (OSH) कोड के तहत नोटिस जारी किए गए हैं।

जून में भी बाल श्रमिकों को नियोजित करने वाले संस्थानों के खिलाफ एफआईआर की प्रक्रिया शुरू की गई है, जबकि किशोर श्रमिकों को नियोजित करने वाले पांच प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किए गए हैं। प्रशासन ने कहा कि निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर संबंधित संस्थानों के खिलाफ न्यायालय में अभियोजन की कार्रवाई की जाएगी।

शिक्षा से जोड़ने पर जोर

प्रशासन के अनुसार, मुक्त कराए गए बच्चों को केवल श्रम से मुक्त कराना ही उद्देश्य नहीं है, बल्कि उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना भी प्राथमिकता है। इसी क्रम में अब तक 19 बच्चों और किशोरों का सर्व शिक्षा अभियान के तहत शैक्षणिक पुनर्वास किया गया है, जबकि शेष बच्चों के पुनर्वास की प्रक्रिया जारी है।

जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित

विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर जिले में जनजागरूकता कार्यक्रम और व्यापारिक संगठनों के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में बाल श्रम निषेध कानूनों, बच्चों के शिक्षा के अधिकार तथा सुरक्षित बचपन के महत्व पर चर्चा की गई।

जिला प्रशासन ने नागरिकों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों से अपील की है कि यदि कहीं भी 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से श्रम कराया जाता दिखाई दे तो इसकी सूचना 1098 या 155372 हेल्पलाइन पर दें, ताकि कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सके।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here