सूरत। सूरत महानगरपालिका के भेस्तान क्षेत्र स्थित भीमनगर आवास (टीपी-22, फाइनल प्लॉट-23) और सरस्वती आवास (टीपी-22, फाइनल प्लॉट-70) के निवासियों ने बुधवार को नगर निगम मुख्यालय तापी भवन के बाहर प्रदर्शन कर जर्जर आवासों के पुनर्विकास तथा वैकल्पिक आवास की मांग उठाई। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में पुरुष, महिलाएं और वरिष्ठ नागरिक शामिल हुए।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्हें झुग्गी पुनर्वास योजना के तहत आवास उपलब्ध कराए गए थे, लेकिन कुछ वर्षों के भीतर ही इमारतों की स्थिति खराब होने लगी। उनका आरोप है कि पिछले कई वर्षों से भवनों में दरारें, कंक्रीट झड़ने और अन्य संरचनात्मक समस्याओं की शिकायतें की जा रही हैं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकला है।
निवासियों के अनुसार, नगर निगम की ओर से जर्जर भवनों को खाली करने के लिए नोटिस जारी किए गए हैं, जबकि सभी प्रभावित परिवारों के लिए वैकल्पिक आवास या किराया सहायता की व्यवस्था नहीं की गई है। इसी मांग को लेकर वे मनपा मुख्यालय पहुंचे।
प्रदर्शन के दौरान बारिश शुरू होने के बावजूद लोग मौके पर डटे रहे और अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी करते रहे। प्रदर्शन में शामिल स्थानीय निवासी ने कहा कि परिवार वर्षों से असुरक्षित भवनों में रहने को मजबूर हैं। उनका कहना था कि यदि भवन खाली कराए जाते हैं तो प्रशासन को पहले वैकल्पिक आवास या किराया सहायता उपलब्ध करानी चाहिए।
नगर निगम की ओर से इस प्रदर्शन और निवासियों की मांगों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हो सकी। यह भी स्पष्ट नहीं हो सका कि संबंधित आवासों के पुनर्विकास की वर्तमान स्थिति क्या है और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए प्रशासन की क्या योजना है।
यह मुद्दा ऐसे समय सामने आया है जब मानसून के दौरान जर्जर इमारतों की सुरक्षा को लेकर शहर में चिंता बढ़ी हुई है। स्थानीय निवासी चाहते हैं कि पुनर्विकास और पुनर्वास की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए ताकि उन्हें सुरक्षित आवास उपलब्ध कराया जा सके।












