सूरत | क्रांति समय
बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ से जुड़े फायरिंग मामले की जांच में मुंबई क्राइम ब्रांच ने सूरत में बड़ी कार्रवाई करते हुए दो कथित अवैध हथियार और 10 जिंदा कारतूस बरामद किए हैं। बताया जा रहा है कि हथियार सूरत रेलवे स्टेशन से करीब एक किलोमीटर दूर छिपाए गए थे। 23 अक्टूबर को की गई इस कार्रवाई के बाद मामले के तार सूरत से जुड़ने पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आरोपियों को हथियार उपलब्ध कराने और उन्हें छिपाने में किसने मदद की?
आरोपी की निशानदेही पर हथियार बरामद
मिली जानकारी के अनुसार, मुंबई क्राइम ब्रांच ने मामले में गिरफ्तार आरोपी रेहान को साथ लेकर सूरत में गुप्त कार्रवाई की। आरोपी की निशानदेही पर कथित तौर पर छिपाए गए दो हथियार और 10 जिंदा कारतूस बरामद किए गए। इसके बाद टीम हथियारों को लेकर मुंबई रवाना हो गई।
पुलिस अब बरामद हथियारों और कारतूसों को फॉरेंसिक एवं बैलिस्टिक जांच के जरिए परख रही है। जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि क्या इन हथियारों का इस्तेमाल फायरिंग की घटना में हुआ था।
बस नहीं मिली तो ऑटो रिक्शा से पहुंचे, फिर छिपाए हथियार
जांच से जुड़े विवरणों के मुताबिक, वारदात के बाद आरोपी कैब से सूरत पहुंचे थे। सेंट्रल बस स्टैंड पर कैब छोड़ने के बाद उनका इरादा दिल्ली जाने वाली बस पकड़ने का था। हालांकि, समय पर बस नहीं मिलने के कारण उन्हें इंतजार करना पड़ा।
इसी दौरान आरोपियों ने कथित तौर पर ऑटो रिक्शा लिया और बस स्टैंड से करीब एक किलोमीटर दूर एक स्थान पर हथियार छिपा दिए। इसके बाद वे सूरत रेलवे स्टेशन पहुंचे और ट्रेन से रवाना हो गए।
पुलिस इस पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़कर आरोपियों के आने-जाने के रास्ते और संभावित मददगारों की भूमिका की जांच कर रही है।
मुंबई क्राइम ब्रांच का ऑपरेशन, सूरत पुलिस को जानकारी क्यों नहीं?
इस कार्रवाई को लेकर एक अहम सवाल यह भी उठ रहा है कि मुंबई क्राइम ब्रांच ने सूरत में आकर हथियार बरामद किए, लेकिन स्थानीय पुलिस को इसकी जानकारी थी या नहीं।
बताया जा रहा है कि महिधरपुरा और वराछा पुलिस थानों के साथ सूरत क्राइम ब्रांच को भी इस कार्रवाई की पूर्व सूचना नहीं दी गई थी। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि और संबंधित पुलिस अधिकारियों का पक्ष सामने आना जरूरी है।
यदि स्थानीय पुलिस को वास्तव में जानकारी नहीं थी, तो सवाल उठता है कि दूसरे राज्य की पुलिस टीम ने सूरत में इतना महत्वपूर्ण ऑपरेशन किस समन्वय के तहत पूरा किया?
19 अक्टूबर को दर्ज हुआ था मामला
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मुंबई DCB-CID में 19 अक्टूबर को मामला दर्ज किया गया था। इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109(1), 3(5) और आर्म्स एक्ट की धारा 3 व 25 के तहत कार्रवाई का उल्लेख है।
जांच एजेंसियां अब हथियारों के स्रोत, उनकी सप्लाई करने वालों और आरोपियों के संपर्कों की पड़ताल कर रही हैं। बैलिस्टिक जांच के नतीजे इस मामले में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
फायरिंग के बाद सोशल मीडिया पर कथित धमकी
रिपोर्टों के अनुसार, 17 अक्टूबर को मुंबई के जुहू स्थित पुष्पा पार्क के पास टाइगर श्रॉफ की कार पर बाइक सवार हमलावरों ने पांच राउंड फायरिंग की थी। घटना के समय टाइगर फुटबॉल खेलकर लौट रहे थे।
बताया गया कि टाइगर को गोली नहीं लगी, जबकि उनके दाहिने हाथ में कांच के टुकड़ों से चोट आई थी। घटना में उनके ड्राइवर और एक अन्य व्यक्ति को गोली लगने की जानकारी भी सामने आई थी।
फायरिंग के बाद सोशल मीडिया पर एक कथित पोस्ट और ऑडियो वायरल हुआ, जिसमें लॉरेंस गैंग से जुड़े अनिल पंडित द्वारा घटना की जिम्मेदारी लेने और सलमान खान के साथ काम करने वालों को धमकी देने का दावा किया गया।
हालांकि, इस दावे और वायरल सामग्री की प्रामाणिकता की पुष्टि आधिकारिक जांच के आधार पर ही की जानी चाहिए।
जांच के केंद्र में तीन बड़े सवाल
- बरामद हथियार किसने उपलब्ध कराए थे?
- आरोपियों को सूरत में हथियार छिपाने में किसने मदद की?
- मुंबई क्राइम ब्रांच की कार्रवाई के दौरान स्थानीय पुलिस के साथ समन्वय की क्या स्थिति थी?
फिलहाल जांच का मुख्य फोकस हथियारों के स्रोत, आरोपियों के संपर्कों और फायरिंग की घटना से उनके संभावित संबंध का पता लगाना है। जांच पूरी होने और आधिकारिक पुष्टि के बाद ही इन सवालों के स्पष्ट जवाब सामने आ सकेंगे।












