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शाहदरा थाने में झड़प के बाद ACP और SHO के तबादले पर दिल्ली पुलिस में असंतोष, जवानों ने किया प्रदर्शन

शाहदरा थाने में झड़प के बाद ACP और SHO के तबादले पर दिल्ली पुलिस में असंतोष, जवानों ने किया प्रदर्शन

दिल्ली पुलिस के जवानों ने अधिकारियों के ट्रांसफर के विरोध में जताई नाराजगी, शाहदरा थाने की घटना के बाद पुलिस विभाग में प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर उठे सवाल।

दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर जुटे करीब 80 से 100 पुलिसकर्मी

नई दिल्ली में सोमवार, 2 नवंबर 2026 को दिल्ली पुलिस मुख्यालय (PHQ) के बाहर करीब 80 से 100 पुलिसकर्मी एकत्र हुए। इनमें महिला पुलिसकर्मी भी शामिल थीं। प्रदर्शनकारियों ने ACP मनस्वी वशिष्ठ और शाहदरा थाने के तत्कालीन SHO इंस्पेक्टर अरुण कुमार के तबादले का विरोध करते हुए दोनों अधिकारियों को उनके पुराने पदों पर बहाल करने की मांग की।प्रदर्शनकारियों ने पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार से मुलाकात और खुली चर्चा (संपर्क सभा) आयोजित करने की मांग भी उठाई।

23 अक्टूबर की घटना से शुरू हुआ विवाद

दरअसल, 23 अक्टूबर को शाहदरा पुलिस स्टेशन में पुलिसकर्मियों और वकीलों के बीच झड़प हुई थी। इस दौरान अधिवक्ता ललित बंसल के सिर में गंभीर चोट लगने की बात सामने आई थी। घटना के बाद वकीलों ने पुलिस पर कार्रवाई में लापरवाही और दुर्व्यवहार के आरोप लगाए। दिल्ली की जिला अदालतों के वकीलों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी थी। इसके बाद 28 अक्टूबर को ACP मनस्वी वशिष्ठ और SHO अरुण कुमार के तबादले के आदेश जारी किए गए। तबादले के बाद वकीलों ने अपनी हड़ताल समाप्त कर दी।.

पुलिसकर्मियों ने भी उठाए सवाल

प्रदर्शन में शामिल पुलिसकर्मियों का आरोप था कि घटना के संबंध में उपलब्ध वीडियो और परिस्थितियों पर निष्पक्ष रूप से विचार किए बिना अधिकारियों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की गई। उनकी मांग थी कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष समीक्षा हो और पुलिसकर्मियों के हितों की रक्षा के लिए स्पष्ट SOP बनाई जाए। ACP मनस्वी वशिष्ठ ने भी पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखकर संपर्क सभा आयोजित करने की मांग की थी। उनका कहना था कि पुलिसकर्मियों को अपनी बात रखने का उचित अवसर मिलना चाहिए।

वरिष्ठ अधिकारियों ने संभाली स्थिति

पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन के दौरान DCP (नई दिल्ली) सचिन शर्मा मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शन कर रहे पुलिसकर्मियों से बातचीत की और उन्हें मुख्यालय के अंदर आकर अपनी शिकायतें रखने के लिए कहा। बाद में ACP वशिष्ठ और अन्य पुलिसकर्मियों को पुलिस मुख्यालय के अंदर ले जाया गया, जहां पुलिस कमिश्नर से मुलाकात हुई।

बड़ा सवाल: पुलिसकर्मियों की शिकायतों का समाधान कैसे होगा?

शाहदरा थाने की घटना ने पुलिस और वकीलों के बीच टकराव के साथ-साथ पुलिस विभाग के अंदर प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर भी बहस छेड़ दी है। एक तरफ वकील निष्पक्ष जांच और पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ पुलिसकर्मी अपने अधिकारियों के तबादले को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

अब निगाहें इस बात पर हैं कि पुलिस प्रशासन दोनों पक्षों की शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर विभाग के भीतर विश्वास और अनुशासन बनाए रखने के लिए क्या कदम उठाता है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट में वकीलों का प्रदर्शन हिंसक, कोर्ट रूम में फर्नीचर फेंकने का आरोप

इलाहाबाद हाईकोर्ट में वकीलों का प्रदर्शन हिंसक, कोर्ट रूम में फर्नीचर फेंकने का आरोप

जस्टिस अजय भानोट की अदालत में हंगामे के बाद अवमानना कार्रवाई के निर्देश; वकील से कथित दुर्व्यवहार को लेकर शुरू हुआ था विवाद

प्रयागराज | क्रांति समय न्यूज़

इलाहाबाद हाईकोर्ट में बुधवार को वकीलों का विरोध प्रदर्शन कथित तौर पर हिंसक हंगामे में बदल गया। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, जस्टिस अजय भानोट की अदालत में फर्नीचर फेंके जाने और न्यायाधीश के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किए जाने की घटना सामने आई है। हंगामे के बाद अदालत ने सीसीटीवी फुटेज हासिल करने और घटना में शामिल लोगों की पहचान करने के निर्देश दिए, ताकि संबंधित लोगों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही पर आगे विचार किया जा सके।

विवाद की पृष्ठभूमि इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से एक वकील के साथ कथित दुर्व्यवहार को लेकर जताई गई नाराजगी बताई जा रही है। बार एसोसिएशन ने इस मामले में मुख्य न्यायाधीश से हस्तक्षेप की मांग करते हुए संबंधित अदालत के बहिष्कार की चेतावनी दी थी।

पुलिस अधिकारी के बैठने की जगह से शुरू हुआ विवाद

बार एसोसिएशन के अनुसार, विवाद अदालत कक्ष में एक पुलिस अधीक्षक के बैठने की जगह को लेकर शुरू हुआ। संगठन का दावा है कि संबंधित पंक्ति आम तौर पर वकीलों के लिए आरक्षित रहती है और पुलिस अधिकारियों के लिए अलग बैठने की व्यवस्था की जा रही थी। आरोप है कि एक वकील ने पुलिस अधिकारी से पीछे बैठने का अनुरोध किया। इसके बाद सरकारी वकील ने कथित तौर पर संबंधित अधिवक्ता को फटकार लगाई और मामले को न्यायाधीश के सामने उठाया। बार एसोसिएशन का आरोप है कि इस दौरान जस्टिस अजय भानोट ने अधिवक्ता को जेल भेजने की धमकी दी। संगठन के मुताबिक, वकील द्वारा माफी मांगने के बाद उनसे पुलिस अधिकारी से भी माफी मांगने को कहा गया। हालांकि, ये आरोप बार एसोसिएशन की ओर से लगाए गए हैं। उपलब्ध विवरण में न्यायमूर्ति अजय भानोट का पक्ष या आरोपों पर उनकी प्रतिक्रिया शामिल नहीं है।

मुख्य न्यायाधीश से हस्तक्षेप की मांग

इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने 27 अक्टूबर को इस कथित घटना को लेकर पत्र जारी किया था। यह पत्र रजिस्ट्रार जनरल के माध्यम से हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को भेजा गया।पत्र में संगठन ने संबंधित वकील के साथ कथित व्यवहार पर आपत्ति जताई और न्यायिक स्तर पर हस्तक्षेप की मांग की। बार एसोसिएशन ने यह भी आरोप लगाया कि सुनवाई के दौरान एक अन्य वरिष्ठ अधिवक्ता के साथ भी अनुचित व्यवहार किया गया। संगठन ने चेतावनी दी थी कि यदि मामले में उचित कदम नहीं उठाए गए, तो उसके सदस्य जस्टिस भानोट की अदालत का बहिष्कार करेंगे। इसके बाद बुधवार को विरोध प्रदर्शन हुआ, जो मीडिया रिपोर्टों के अनुसार हंगामे में बदल गया।

हंगामे पर अदालत का सख्त रुख

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल ने अदालत परिसर में हुए हंगामे को गंभीरता से लेते हुए इसे अवमानना से जुड़ा मामला माना। रजिस्ट्रार (प्रोटोकॉल) को घटना से संबंधित सीसीटीवी फुटेज हासिल करने और हंगामे में शामिल लोगों की पहचान करने के निर्देश दिए गए। इसके आधार पर संबंधित लोगों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है। अदालत के निर्देशों का उद्देश्य घटना की परिस्थितियों और इसमें शामिल लोगों की भूमिका का पता लगाना है।

अधिवक्ता की राय: शिकायत हो सकती है, हिंसा नहीं

इस घटना पर अधिवक्ता से बातचीत में कथित तोड़फोड़ और न्यायाधीश के खिलाफ अभद्र भाषा के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि वकीलों की शिकायतें कितनी भी गंभीर क्यों न हों, उन्हें शारीरिक या मौखिक हिंसा का सहारा नहीं लेना चाहिए। इस तरह का आचरण परिस्थितियों के आधार पर अदालत की अवमानना के दायरे में आ सकता है। उन्होंने बार और बेंच को न्याय व्यवस्था के दो महत्वपूर्ण आधार बताते हुए दोनों के बीच पारस्परिक सम्मान बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।

न्यायिक मर्यादा और संस्थागत प्रक्रिया पर सवाल

इस घटनाक्रम ने अदालतों में अनुशासन, न्यायाधीशों और अधिवक्ताओं के बीच संवाद तथा शिकायतों के समाधान की संस्थागत प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े किए हैं। यदि किसी अधिवक्ता को न्यायिक कार्यवाही के दौरान अनुचित व्यवहार का सामना करने की शिकायत है, तो वह बार एसोसिएशन और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से अपनी बात संबंधित प्राधिकारियों के सामने रख सकता है। इसी तरह, विरोध प्रदर्शन के दौरान अदालत की कार्यवाही बाधित करना, तोड़फोड़ करना या अभद्र व्यवहार करना भी गंभीर विषय है, जिसकी जांच तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जानी चाहिए।

फिलहाल, पूरे मामले में बार एसोसिएशन के आरोपों और अदालत में हुए हंगामे से संबंधित घटनाक्रम को अलग-अलग देखते हुए निष्पक्ष जांच और संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण है।

सूरत के डिंडोली में बंद कमरे से 50 वर्षीय व्यक्ति का सड़ा-गला शव बरामद, संदिग्ध हालात में मौत; महिला समेत तीन की तलाश में जुटी पुलिस

सूरत के डिंडोली में बंद कमरे से 50 वर्षीय व्यक्ति का सड़ा-गला शव बरामद, संदिग्ध हालात में मौत; महिला समेत तीन की तलाश में जुटी पुलिस

सूरत | डिंडोली | क्राइम रिपोर्ट

सूरत के डिंडोली इलाके में एक बंद कमरे से 50 वर्षीय व्यक्ति का सड़ा-गला शव मिलने से सनसनी फैल गई। मृतक की पहचान मध्य प्रदेश के सतना जिले के मूल निवासी राजेश रामस्वरूप मिश्रा के रूप में हुई है। वह पिछले छह महीने से डिंडोली की लक्ष्मीनारायण सोसायटी में किराए के मकान में रह रहे थे। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, मामले के पीछे आपसी संबंधों और प्रेम त्रिकोण से जुड़े विवाद की आशंका जताई जा रही है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

दुर्गंध आने पर मकान मालिक को हुआ शक

डिंडोली के साईं पॉइंट के पास स्थित लक्ष्मीनारायण सोसायटी में रिक्शा चालक श्रीकांत उदयराज तिवारी के मकान की ऊपरी मंजिल पर राजेश मिश्रा 2,000 रुपये मासिक किराए पर रहते थे। 23 अक्टूबर की सुबह कमरे से तेज दुर्गंध आने पर मकान मालिक को शक हुआ। उन्होंने राजेश के ठेकेदार आशिषभाई और उनके परिचितों को इसकी जानकारी दी। इसके बाद पुलिस की मौजूदगी में कमरे का ताला तोड़ा गया। अंदर राजेश का शव सड़ी-गली और फूली हुई अवस्था में मिला। शव की स्थिति देखकर मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच शुरू की।

चेहरे पर चोट के निशान, गर्दन और छाती पर भी काले धब्बे

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, मृतक के चेहरे के दाहिने हिस्से पर धारदार हथियार से चोट के निशान मिले। इसके अलावा गर्दन और छाती के ऊपरी हिस्से पर काले निशान भी दिखाई दिए। इन परिस्थितियों के आधार पर हत्या की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, मौत का वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस की जांच से स्पष्ट होगा। मकान मालिक के अनुसार, 20 अक्टूबर की रात कमरे से झगड़े की आवाजें सुनाई दी थीं। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि उस रात और शव मिलने के बीच क्या घटनाक्रम हुआ था।

महिला को पत्नी बताकर साथ रखता था मृतक

पुलिस और स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, राजेश मिश्रा के साथ राजाबाई उर्फ रानी नाम की महिला रहती थी, जिसे वह अपनी पत्नी बताता था। कमरे में रामप्रसाद और गोलू नाम के दो अन्य व्यक्ति भी रहते थे। बताया जा रहा है कि रामप्रसाद, राजाबाई का पति और गोलू उसका बेटा है। इस तरह एक ही घर में राजेश, उसके साथ रहने वाली महिला, महिला का पति और बे रहते थे। स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार, राजेश और राजाबाई के बीच कथित प्रेम संबंध थे। इस जटिल पारिवारिक और व्यक्तिगत संबंध के कारण घर में विवाद होने की बात भी सामने आई है। हालांकि, इन संबंधों और विवादों की वास्तविक स्थिति की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।

हत्या के बाद कमरे पर ताला लगाकर फरार होने का आरोप

मामले में आशंका जताई जा रही है कि राजाबाई, उसके पति रामप्रसाद और बेटे गोलू की घटना में भूमिका हो सकती है। आरोप है कि वारदात के बाद कमरे को बाहर से बंद कर दिया गया और संबंधित लोग वहां से चले गए। हालांकि, तीनों की कथित भूमिका और हत्या की साजिश से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

डिंडोली पुलिस की जांच तेज

बंद कमरे से शव मिलने के मामले में डिंडोली पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। पुलिस मृतक के साथ रहने वाले लोगों की भूमिका, घटनास्थल से मिले साक्ष्यों, संभावित विवाद और मौत के समय सहित विभिन्न पहलुओं की पड़ताल कर रही है। मामले में महिला समेत तीन लोगों की तलाश किए जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस की जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि राजेश मिश्रा की मौत किन परिस्थितियों में हुई और इस घटना में किसकी क्या भूमिका थी।

सूरत के डिंडोली में बंद कमरे से 30 वर्षीय युवक का शव मिलने से सनसनी, सिर पर चोट के निशान; मध्य प्रदेश के तीन रूममेट्स लापता, पुलिस जांच में जुटी।

सूरत के डिंडोली में बंद कमरे से 30 वर्षीय युवक का शव मिलने से सनसनी, सिर पर चोट के निशान; मध्य प्रदेश के तीन रूममेट्स लापता, पुलिस जांच में जुटी।

सूरत | क्रांति समय | सूरत के डिंडोली क्षेत्र के लक्ष्मीनगर में एक बंद कमरे से करीब 30 वर्षीय अज्ञात युवक का शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। बताया जा रहा है कि दशहरे के बाद से कमरे में रहने वाले लोग दिखाई नहीं दिए थे और मकान के बाहर ताला लगा हुआ था। शुक्रवार शाम को बंद कमरे से तेज दुर्गंध आने पर स्थानीय लोगों को शक हुआ। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर दरवाजा खुलवाया तो अंदर युवक का शव मिला।

सिर पर गंभीर चोट के निशान, हत्या की आशंका

कमरे के अंदर युवक मृत अवस्था में मिला। उसके सिर पर गंभीर चोट के निशान होने और कमरे में जगह-जगह खून के छींटे मिलने की बात सामने आई है। घटनास्थल की स्थिति को देखते हुए पुलिस हत्या की आशंका सहित विभिन्न पहलुओं पर जांच कर रही है। पुलिस ने घटनास्थल का पंचनामा कर शव को पोस्टमार्टम के लिए नई सिविल अस्पताल भेज दिया है। मौत का वास्तविक कारण और समय पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद स्पष्ट होगा।

दशहरे के बाद से तीन रूममेट्स का पता नहीं

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कमरे में मृतक समेत चार लोग रहते थे। इनमें एक महिला, एक युवक और एक युवती भी शामिल थे। बताया जा रहा है कि दशहरे के बाद से ये तीनों कमरे या सोसायटी के आसपास दिखाई नहीं दिए। कमरे के बाहर ताला लगा होने के कारण किसी को अंदर की स्थिति का पता नहीं चला। अब पुलिस इन तीनों की तलाश और उनकी भूमिका से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है। हालांकि, उनकी संलिप्तता को लेकर अभी कोई निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

तीन महीने पहले किराए पर आए थे, मृतक की पहचान बाकी

पुलिस के अनुसार, कमरे में रहने वाले अन्य तीन लोग मूल रूप से मध्य प्रदेश के निवासी बताए जा रहे हैं और करीब तीन महीने पहले यहां किराए पर रहने आए थे। फिलहाल मृतक की पहचान नहीं हो सकी है। पुलिस ने पहचान स्थापित करने और लापता बताए जा रहे तीनों लोगों का पता लगाने के लिए जांच शुरू की है।

पुलिस जांच जारी: मौत की असली वजह, घटना का समय और मामले से जुड़े अन्य तथ्यों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट तथा पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगा।

टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस: सूरत से 2 हथियार और 10 कारतूस बरामद

टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस: सूरत से 2 हथियार और 10 कारतूस बरामद

सूरत | क्रांति समय

बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ से जुड़े फायरिंग मामले की जांच में मुंबई क्राइम ब्रांच ने सूरत में बड़ी कार्रवाई करते हुए दो कथित अवैध हथियार और 10 जिंदा कारतूस बरामद किए हैं। बताया जा रहा है कि हथियार सूरत रेलवे स्टेशन से करीब एक किलोमीटर दूर छिपाए गए थे। 23 अक्टूबर को की गई इस कार्रवाई के बाद मामले के तार सूरत से जुड़ने पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आरोपियों को हथियार उपलब्ध कराने और उन्हें छिपाने में किसने मदद की?

आरोपी की निशानदेही पर हथियार बरामद

मिली जानकारी के अनुसार, मुंबई क्राइम ब्रांच ने मामले में गिरफ्तार आरोपी रेहान को साथ लेकर सूरत में गुप्त कार्रवाई की। आरोपी की निशानदेही पर कथित तौर पर छिपाए गए दो हथियार और 10 जिंदा कारतूस बरामद किए गए। इसके बाद टीम हथियारों को लेकर मुंबई रवाना हो गई।

पुलिस अब बरामद हथियारों और कारतूसों को फॉरेंसिक एवं बैलिस्टिक जांच के जरिए परख रही है। जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि क्या इन हथियारों का इस्तेमाल फायरिंग की घटना में हुआ था।

बस नहीं मिली तो ऑटो रिक्शा से पहुंचे, फिर छिपाए हथियार

जांच से जुड़े विवरणों के मुताबिक, वारदात के बाद आरोपी कैब से सूरत पहुंचे थे। सेंट्रल बस स्टैंड पर कैब छोड़ने के बाद उनका इरादा दिल्ली जाने वाली बस पकड़ने का था। हालांकि, समय पर बस नहीं मिलने के कारण उन्हें इंतजार करना पड़ा।

इसी दौरान आरोपियों ने कथित तौर पर ऑटो रिक्शा लिया और बस स्टैंड से करीब एक किलोमीटर दूर एक स्थान पर हथियार छिपा दिए। इसके बाद वे सूरत रेलवे स्टेशन पहुंचे और ट्रेन से रवाना हो गए।

पुलिस इस पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़कर आरोपियों के आने-जाने के रास्ते और संभावित मददगारों की भूमिका की जांच कर रही है।

मुंबई क्राइम ब्रांच का ऑपरेशन, सूरत पुलिस को जानकारी क्यों नहीं?

इस कार्रवाई को लेकर एक अहम सवाल यह भी उठ रहा है कि मुंबई क्राइम ब्रांच ने सूरत में आकर हथियार बरामद किए, लेकिन स्थानीय पुलिस को इसकी जानकारी थी या नहीं।

बताया जा रहा है कि महिधरपुरा और वराछा पुलिस थानों के साथ सूरत क्राइम ब्रांच को भी इस कार्रवाई की पूर्व सूचना नहीं दी गई थी। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि और संबंधित पुलिस अधिकारियों का पक्ष सामने आना जरूरी है।

यदि स्थानीय पुलिस को वास्तव में जानकारी नहीं थी, तो सवाल उठता है कि दूसरे राज्य की पुलिस टीम ने सूरत में इतना महत्वपूर्ण ऑपरेशन किस समन्वय के तहत पूरा किया?

19 अक्टूबर को दर्ज हुआ था मामला

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मुंबई DCB-CID में 19 अक्टूबर को मामला दर्ज किया गया था। इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109(1), 3(5) और आर्म्स एक्ट की धारा 3 व 25 के तहत कार्रवाई का उल्लेख है।

जांच एजेंसियां अब हथियारों के स्रोत, उनकी सप्लाई करने वालों और आरोपियों के संपर्कों की पड़ताल कर रही हैं। बैलिस्टिक जांच के नतीजे इस मामले में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

फायरिंग के बाद सोशल मीडिया पर कथित धमकी

रिपोर्टों के अनुसार, 17 अक्टूबर को मुंबई के जुहू स्थित पुष्पा पार्क के पास टाइगर श्रॉफ की कार पर बाइक सवार हमलावरों ने पांच राउंड फायरिंग की थी। घटना के समय टाइगर फुटबॉल खेलकर लौट रहे थे।

बताया गया कि टाइगर को गोली नहीं लगी, जबकि उनके दाहिने हाथ में कांच के टुकड़ों से चोट आई थी। घटना में उनके ड्राइवर और एक अन्य व्यक्ति को गोली लगने की जानकारी भी सामने आई थी।

फायरिंग के बाद सोशल मीडिया पर एक कथित पोस्ट और ऑडियो वायरल हुआ, जिसमें लॉरेंस गैंग से जुड़े अनिल पंडित द्वारा घटना की जिम्मेदारी लेने और सलमान खान के साथ काम करने वालों को धमकी देने का दावा किया गया।

हालांकि, इस दावे और वायरल सामग्री की प्रामाणिकता की पुष्टि आधिकारिक जांच के आधार पर ही की जानी चाहिए।

जांच के केंद्र में तीन बड़े सवाल

  1. बरामद हथियार किसने उपलब्ध कराए थे?
  2. आरोपियों को सूरत में हथियार छिपाने में किसने मदद की?
  3. मुंबई क्राइम ब्रांच की कार्रवाई के दौरान स्थानीय पुलिस के साथ समन्वय की क्या स्थिति थी?

फिलहाल जांच का मुख्य फोकस हथियारों के स्रोत, आरोपियों के संपर्कों और फायरिंग की घटना से उनके संभावित संबंध का पता लगाना है। जांच पूरी होने और आधिकारिक पुष्टि के बाद ही इन सवालों के स्पष्ट जवाब सामने आ सकेंगे।

सूरत नासीरनगर डिमोलिशन पर हाईकोर्ट सख्त: कमिश्नर को फटकार, विस्थापितों के पुनर्वास और आपराधिक अवमानना पर सवाल

सूरत नासीरनगर डिमोलिशन पर हाईकोर्ट सख्त: कमिश्नर को फटकार, विस्थापितों के पुनर्वास और आपराधिक अवमानना पर सवाल

सूरत के नासीरनगर डिमोलिशन मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने SMC कमिश्नर और स्टैंडिंग कमेटी चेयरमैन से जवाब मांगा। अगली सुनवाई 27 नवंबर को।

सूरत | क्रांति समय

सूरत के नासीरनगर डिमोलिशन मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने सूरत महानगरपालिका (SMC) के रुख पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने नगर निगम आयुक्त राजकुमार बेनीवाल और स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर यह बताने का निर्देश दिया है कि प्रभावित परिवारों को वैकल्पिक आवास देने के आश्वासन से पीछे हटने पर उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही क्यों न की जाए।

23 अक्टूबर 2026 को हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सवाल उठाया कि जब राज्य के एडवोकेट जनरल के माध्यम से प्रभावित लोगों को वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया था, तो नगर निगम ने अपना रुख क्यों बदल दिया?

अदालत ने इस बदलाव को प्रथम दृष्टया गंभीर मानते हुए अधिकारियों की जवाबदेही पर सवाल उठाए। मामले की अगली सुनवाई 27 नवंबर 2026 को निर्धारित की गई है।

‘प्रभावित लोग मवेशी नहीं, जिन्हें गौशाला में रख देंगे’

सुनवाई के दौरान अदालत ने विस्थापित परिवारों की स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत की टिप्पणी का आशय था कि जिन लोगों के घर तोड़े गए हैं, वे आखिर कहां रहेंगे? क्या उन्हें खुले आसमान के नीचे रात बिताने के लिए छोड़ दिया जाएगा? क्या वे देश के नागरिक नहीं हैं और क्या उनके अधिकार नहीं हैं?

अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रभावित लोग मवेशी नहीं हैं, जिन्हें उठाकर गौशाला में रख दिया जाए।

हाईकोर्ट की इस टिप्पणी ने डिमोलिशन के बाद प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और वैकल्पिक आवास की व्यवस्था को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है।

अधिकारियों से सवाल- कर्मचारियों की कथित अनियमितताओं की जिम्मेदारी कौन लेगा?

अदालत ने नगर निगम आयुक्त और स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन से पूछा कि यदि डिमोलिशन की कार्रवाई में कर्मचारियों की ओर से अनियमितताएं हुई हैं, तो उनकी जिम्मेदारी कौन लेगा?

अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि प्रभावित परिवारों को वैकल्पिक व्यवस्था देने का आश्वासन दिए जाने के बाद नगर निगम अपने रुख से पीछे क्यों हट रहा है।

मामले में याचिकाकर्ताओं ने डिमोलिशन की वैधता और अपनाई गई प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। इन आरोपों पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष आना अभी बाकी है।

प्रधानमंत्री आवास योजना की प्रतीक्षा सूची का तर्क

सुनवाई के दौरान नगर निगम की ओर से प्रधानमंत्री आवास योजना में लंबी प्रतीक्षा सूची और प्रभावित लोगों को आवास आवंटित करने के लिए विशेष नीति नहीं होने का तर्क सामने आया।

अदालत ने इस बात पर सवाल उठाया कि जब वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया जा चुका था, तो बाद में यह कहकर पीछे कैसे हटा जा सकता है कि ऐसी स्थिति के लिए कोई योजना मौजूद नहीं है?

हाईकोर्ट ने अधिकारियों को अपने बदले हुए रुख के पीछे के कारण स्पष्ट करने के लिए व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया।

निजी तीसरे पक्ष की भूमिका पर भी उठे सवाल

नासीरनगर डिमोलिशन मामले में याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना की गई और इसमें किसी निजी तीसरे पक्ष की भूमिका हो सकती है।

याचिका में यह आशंका भी जताई गई कि मकानों को हटाने से संबंधित निजी पक्ष को लाभ मिल सकता है। हालांकि, इस आरोप को अभी सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता। मामले की न्यायिक जांच और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर ही इसकी वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

हाईकोर्ट ने मामले को असाधारण बताते हुए अधिकारियों के आचरण और अदालत के समक्ष दिए गए आश्वासन से पीछे हटने के मुद्दे पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

27 नवंबर को फिर अदालत में पेश होंगे अधिकारी

हाईकोर्ट ने नगर निगम आयुक्त और स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। उन्हें यह स्पष्ट करना होगा कि प्रभावित परिवारों को वैकल्पिक आवास देने के आश्वासन से पीछे हटने का निर्णय क्यों लिया गया और उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही क्यों न की जाए।

अदालत ने आदेश पर रोक लगाने की मांग स्वीकार नहीं की, हालांकि संबंधित आदेश को चुनौती देने की छूट दी गई है।

क्या है नासीरनगर डिमोलिशन विवाद?

सूरत में वेड दरवाजा के पास नासीरनगर क्षेत्र में मई 2026 के दौरान भारी पुलिस बंदोबस्त के बीच मकानों को ध्वस्त करने की कार्रवाई की गई थी। इसके बाद प्रभावित परिवारों ने कार्रवाई की वैधता और पुनर्वास को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया।

मामले में मुख्य सवाल यह है कि डिमोलिशन की कार्रवाई के दौरान कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया था या नहीं और जिन परिवारों के मकान पूरी तरह ध्वस्त हुए, उन्हें वैकल्पिक आवास कैसे उपलब्ध कराया जाएगा।

अब हाईकोर्ट की निगाह इस बात पर है कि नगर निगम अपने पहले के आश्वासन से पीछे क्यों हटा और प्रभावित परिवारों के आवास के मुद्दे पर जिम्मेदारी किसकी बनती है।

27 नवंबर की सुनवाई में अधिकारियों के जवाब और अदालत के अगले निर्देश इस मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

मुंबई के जुहू में टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग, ड्राइवर और ऑटो रिक्शा चालक घायल

मुंबई के जुहू में टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग, ड्राइवर और ऑटो रिक्शा चालक घायल

टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस: सूरत में मुंबई क्राइम ब्रांच का गुप्त ऑपरेशन

15 पुलिस टीमों का गठन, वारदात में इस्तेमाल मोटरसाइकिल बरामद; लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं

मुंबई के जुहू इलाके में अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार के पास फायरिंग की घटना सामने आई है। बताया जा रहा है कि जब अभिनेता अपनी कार में मौजूद थे, तभी कुछ अज्ञात हमलावरों ने कई राउंड गोलियां चलाईं। इस घटना में टाइगर श्रॉफ सुरक्षित बताए जा रहे हैं, जबकि उनके ड्राइवर और पास में मौजूद एक ऑटो रिक्शा चालक घायल हो गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुंबई पुलिस ने जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी है। पुलिस ने फायरिंग में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल बरामद कर ली है। अब मोटरसाइकिल की नंबर प्लेट और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है।

फायरिंग में इस्तेमाल मोटरसाइकिल बरामद

मुंबई पुलिस के मुताबिक, यह घटना जुहू पुलिस स्टेशन की सीमा में पुष्पा पार्क के पास हुई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, अज्ञात हमलावरों ने अभिनेता और उनके मित्र के आसपास कई राउंड फायरिंग की। घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है, जिसमें एक व्यक्ति कार पर गोली चलाता दिखाई देता है। हालांकि, वीडियो की प्रामाणिकता और उसमें दिखाई देने वाले व्यक्ति की पहचान की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। पुलिस ने आरोपियों की तलाश के लिए 15 टीमें गठित की हैं। घटनास्थल और आसपास के इलाकों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। इसके अलावा, मौके से मिले कारतूस और अन्य साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है।

टाइगर श्रॉफ के ड्राइवर और ऑटो चालक घायल

फायरिंग की घटना में टाइगर श्रॉफ को चोट नहीं आने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, उनके ड्राइवर फिरदौस के बाएं हाथ में चोट लगी। वहीं, पास में मौजूद ऑटो रिक्शा चालक चौहान भी घायल हो गए।दोनों घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दोनों की हालत खतरे से बाहर बताई गई है। टाइगर श्रॉफ के पिता और अभिनेता जैकी श्रॉफ ने भी अपने बेटे के सुरक्षित होने की बात कही। बताया गया है कि टाइगर पुलिस की जांच में सहयोग कर रहे हैं।

सलमान खान के घर की सुरक्षा बढ़ाई गई

इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट सामने आईं, जिनमें लॉरेंस बिश्नोई गैंग की ओर से फायरिंग की जिम्मेदारी लेने का दावा किया गया। हालांकि, मुंबई पुलिस की ओर से इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।इसी बीच, अभिनेता सलमान खान के बांद्रा स्थित गैलेक्सी अपार्टमेंट की सुरक्षा बढ़ाए जाने की जानकारी भी सामने आई है। इससे पहले भी सलमान खान को कथित तौर पर धमकियां मिलने की खबरें सामने आ चुकी हैं।

मुख्यमंत्री ने कार्रवाई का भरोसा दिया

घटना को लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा पुलिस आयुक्त और टाइगर श्रॉफ से बातचीत किए जाने की जानकारी सामने आई है। मुख्यमंत्री ने आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी और कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया है। एकनाथ शिंदे ने भी टाइगर श्रॉफ से मुलाकात की।दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं और सरकार की आलोचना की है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। हमलावरों की पहचान, फायरिंग के पीछे का मकसद और कथित गैंग कनेक्शन की पुष्टि जांच के महत्वपूर्ण पहलू हैं। आरोपियों की गिरफ्तारी और जांच के आधिकारिक निष्कर्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

सूरत रेलवे स्टेशन के CCTV में संदिग्धों की हलचल दिखने का दावा मुंबई क्राइम ब्रांच की टीम ने सूरत रेलवे स्टेशन पहुंचने के बाद CCTV फुटेज की जांच की। खबर के अनुसार, फायरिंग मामले में संदिग्ध तीन व्यक्तियों की गतिविधियां स्टेशन के कैमरों में दिखाई देने की बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि फुटेज में तीनों व्यक्ति स्टेशन परिसर के बाहर से तेजी से दौड़ते हुए अंदर आते दिखाई दिए। हालांकि, फुटेज के आधार पर उनकी पहचान और फायरिंग की घटना में उनकी कथित भूमिका की स्वतंत्र पुष्टि आधिकारिक जानकारी से होना जरूरी है।

दौड़कर पुणे-जयपुर एक्सप्रेस में चढ़ने की आशंका रिपोर्ट के मुताबिक, प्लेटफॉर्म नंबर-1 के CCTV फुटेज में तीन संदिग्धों की गतिविधियां दिखाई दीं। इनमें दो व्यक्तियों के दौड़कर ट्रेन पकड़ने की कोशिश करने और तीसरे व्यक्ति के भी उनके पीछे चलती ट्रेन में चढ़ने का दावा किया गया है। बताया जा रहा है कि यह ट्रेन पुणे-जयपुर एक्सप्रेस थी। हालांकि, संदिग्धों ने जानबूझकर पुलिस से बचने के लिए ऐसा किया था या नहीं, इसकी पुष्टि जांच के निष्कर्षों के बिना नहीं की जा सकती।

मुंबई क्राइम ब्रांच के DCP ने CCTV फुटेज की जांच की खबर के अनुसार, संदिग्धों के सूरत रेलवे स्टेशन की ओर जाने की सूचना मिलने पर मुंबई क्राइम ब्रांच के DCP अपनी टीम के साथ सूरत पहुंचे। इसके बाद उन्होंने सूरत क्राइम ब्रांच के अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर जांच आगे बढ़ाई। बताया गया है कि शुरुआती चरण में मुंबई पुलिस ने स्टेशन के CCTV फुटेज की जांच स्वयं की। इसके बाद संदिग्धों की गतिविधियों से संबंधित सुराग मिलने पर स्थानीय पुलिस और RPF को सतर्क किया गया तथा आवश्यक कार्रवाई की गई। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मुंबई पुलिस के पास संदिग्धों की तस्वीरें थीं, लेकिन गोपनीयता और सुरक्षा संबंधी कारणों से शुरुआत में स्थानीय RPF कर्मियों के साथ तस्वीरें साझा नहीं की गईं। इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध होना आवश्यक है।

क्राइम ब्रांच के पहुंचने से पहले ट्रेन रतलाम पहुंच चुकी थी रिपोर्ट के अनुसार, पुणे-जयपुर एक्सप्रेस रात करीब 1:35 बजे सूरत रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-1 पर आई थी। आशंका जताई गई कि संदिग्ध इसी ट्रेन में सवार हुए थे। बताया गया है कि जब मुंबई क्राइम ब्रांच की टीम जांच के लिए सूरत स्टेशन पहुंची, तब तक ट्रेन सूरत से आगे निकलकर रतलाम पहुंच चुकी थी। स्थानीय रेलवे पुलिस को मामले की जानकारी सुबह करीब 11 बजे मिलने की बात भी कही गई है। हालांकि, संदिग्ध वास्तव में सूरत से ही ट्रेन में सवार हुए थे या नहीं, इसकी स्पष्ट पुष्टि स्थानीय पुलिस के पास होने की जानकारी सामने नहीं आई है।

रात करीब डेढ़ बजे की CCTV फुटेज की जांच रिपोर्ट के अनुसार, क्राइम ब्रांच ने रात करीब डेढ़ बजे के आसपास पुणे-जयपुर एक्सप्रेस के जनरल कोच की ओर जाने वाले यात्रियों की CCTV फुटेज की विशेष रूप से जांच की। इस जांच का उद्देश्य संदिग्धों की गतिविधियों और ट्रेन में सवार होने से संबंधित संभावित सुराग जुटाना बताया गया है। पूरे मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच एजेंसियों की ओर से जुटाए गए साक्ष्य और आधिकारिक बयान महत्वपूर्ण होंगे।

कोटा रेलवे स्टेशन से तीन संदिग्धों को हिरासत में लेने की खबर इस मामले में आगे की कार्रवाई के संबंध में खबर है कि टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग करने के संदेह में तीन व्यक्तियों को राजस्थान के कोटा रेलवे स्टेशन से पकड़ा गया। बताया गया है कि घटना के करीब 15 घंटे के भीतर उन्हें हिरासत में लिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, रविवार देर रात हुई फायरिंग के बाद मुंबई पुलिस से मिली सूचना पर कोटा पुलिस ने तेजी से कार्रवाई की। कोटा की पुलिस अधीक्षक तेजस्विनी गौतम के हवाले से बताया गया कि तीनों व्यक्ति पुणे-जयपुर एक्सप्रेस के जनरल कोच में यात्रा कर रहे थे और उन्हें सुबह करीब 10:30 बजे हिरासत में लिया गया। यह भी बताया गया कि शुरुआती तलाशी में उनके पास से कोई हथियार बरामद नहीं हुआ। हथियार नहीं मिलने और अन्य साक्ष्यों के संबंध में जांच की आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण होगी।

लाजपोर जेल में 14 मोबाइल का खेल, विजिलेंस छापे से खुली पोल

लाजपोर जेल में 14 मोबाइल का खेल, विजिलेंस छापे से खुली पोल

बाथरूम, वॉश बेसिन और कैदी की जेब से मिले मोबाइल-सिम कार्ड

जेल से गैंग ऑपरेशन के आरोपों के बीच सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

सूरत की सचिन स्थित लाजपोर मध्यस्थ जेल एक बार फिर कुख्यात गतिविधियों और गंभीर लापरवाही को लेकर चर्चा के केंद्र में आ गई है। जेल की चारदीवारी के पीछे बैठकर कुख्यात आरोपियों द्वारा हत्या और फिरौती की सुपारी दिए जाने तथा अंदर से ही गैंगवार संचालित किए जाने के गंभीर आरोपों के बीच जेल से करीब 14 मोबाइल फोन बरामद होने से पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। एक ओर जेल प्रशासन ऐसे खतरनाक कैदियों को सुरक्षा कारणों से दूसरी जेल में स्थानांतरित करने के लिए कोर्ट का रुख कर रहा है, वहीं दूसरी ओर खुद जेल के भीतर से खुलेआम प्रतिबंधित मोबाइल और सिम कार्ड बरामद होने से सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुल गई है।

लाजपोर जेल में विजिलेंस का सरप्राइज चेक, सुरक्षा व्यवस्था कटघरे में

गांधीनगर स्थित पुलिस महानिदेशक (जेल एवं सुधारात्मक प्रशासन) के मौखिक आदेश के बाद विजिलेंस तलाशी दस्ते ने देर रात जेल परिसर में अचानक छापा मारा। अहमदाबाद से पहुंची टीम के जेलर देवशीभाई करंगिया और उनकी टीम ने विभिन्न बैरकों की गहन तलाशी शुरू की।

विजिलेंस टीम के जेल के अंदर पहुंचते ही स्थानीय जेल स्टाफ में अफरा-तफरी मच गई और उन्होंने भी तत्काल चेकिंग शुरू कर दी। इसी दौरान स्थानीय स्टाफ को भी अंदर से 3 मोबाइल फोन मिले होने की जानकारी सामने आई है। डीजी विजिलेंस की इस कार्रवाई में स्थानीय जेल अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

जेल में कैदी, बाहर गैंग? लाजपोर की सुरक्षा पर फिर गंभीर सवाल

सूरत में पहले हुए चर्चित सतीश मराठा हत्याकांड से लेकर भाजपा के युवा नेता जय दलाल की हत्या तक, कई हाई-प्रोफाइल अपराधों के तार सचिन सब-जेल से जुड़े होने की बात सामने आई थी। आरोप है कि जेल में बंद कुछ दबंग और कुख्यात तत्व जेल के अंदर से ही अपने साथियों से संपर्क कर बाहरी आपराधिक नेटवर्क संचालित करते रहे हैं। जेल से ही सुपारी किलिंग और गैंगवार को अंजाम देने के लिए नेटवर्क चलाए जाने के आरोप भी लगते रहे हैं। इतनी गंभीर परिस्थितियों के बावजूद जेल प्रशासन द्वारा सुरक्षा व्यवस्था में मौजूद इन खामियों को गंभीरता से नहीं लिया गया। इसका नतीजा यह हुआ कि जेल के अंदर प्रतिबंधित संचार उपकरण आसानी से पहुंचते रहे।

बाथरूम से जेब तक: लाजपोर जेल में छिपे मिले मोबाइल

विजिलेंस की तलाशी के दौरान जेल के अंदर छिपाकर रखे गए मोबाइल फोन जिस तरह बरामद हुए, वह चौंकाने वाला है। यार्ड नंबर सी-8 की बैरक-1 के बाथरूम में बाल्टी के नीचे प्लास्टिक की थैली में लपेटकर रखे गए नोकिया और केचोडा कंपनी के मोबाइल फोन मिले। वहीं वॉश बेसिन के बाहर चार्जिंग पर लगाए गए मोबाइल भी जब्त किए गए। इसके अलावा बैरक में बंद विचाराधीन आरोपी रमाकांत उर्फ भोला गहजे रईदास की व्यक्तिगत तलाशी लेने पर उसकी पहनी हुई पैंट की दाहिनी जेब से मोटोरोला कंपनी का मोबाइल फोन चालू हालत में बरामद हुआ। इसके अलावा यार्ड सी-3 और सी-11 की बैरकों से शौचालय के दरवाजे के पीछे तथा प्लास्टिक के डिब्बे के नीचे छिपाकर रखे गए मोबाइल फोन भी जब्त किए गए।

बाजार में हजारों, पंचनामे में ₹100—मोबाइल की कीमत पर सवाल

पूरी कार्रवाई के बाद दर्ज पुलिस शिकायत में सबसे हैरान करने वाली बात सामने आई है। मोटोरोला जैसे मोबाइल फोन और एक्टिव सिम कार्ड वाले प्रतिबंधित मोबाइल जब्त किए जाने के बावजूद सरकारी पंचनामा और रिकॉर्ड में इन मोबाइल फोन की कीमत प्रति नग मात्र 100 रुपये दर्शाई गई है।

यानी 11 मोबाइल फोन की कुल कीमत महज 1,100 रुपये दर्ज की गई।

बाजार में हजारों रुपये कीमत वाले मोबाइल को रिकॉर्ड में केवल 100 रुपये का फोन दर्शाए जाने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। अधिकांश मोबाइल फोन में VI और BSNL कंपनी के एक्टिव सिम कार्ड मिले हैं। वहीं कुछ मोबाइल पासवर्ड लॉक होने के कारण उनकी जानकारी तत्काल सामने नहीं आ सकी।

मोबाइल बरामदगी के बाद बढ़ा शक, जेल स्टाफ की भूमिका की जांच

हाई-सिक्योरिटी जोन मानी जाने वाली जेल के अंदर इतनी बड़ी संख्या में मोबाइल फोन पहुंचने के मामले में जेल विभाग के ही किसी कर्मचारी या अधिकारी की मिलीभगत होने की आशंका जताई जा रही है। इन मोबाइल फोन के जरिए किन-किन कैदियों ने बाहर सुपारी दी, आपराधिक साजिश रची या अपने गिरोह के सदस्यों से संपर्क किया, इसकी जानकारी जुटाने के लिए सभी 11 मोबाइल फोन को फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) भेजने की कार्रवाई की जा रही है। पूरे मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS)-2023 की धारा 223 तथा प्रिजन एक्ट की धारा 42, 43 और 45 की उपधारा 12 के तहत मामला दर्ज कर कानूनी प्रक्रिया के अनुसार जांच शुरू कर दी गई है।

जैमर फेल या सुरक्षा में सेंध? लाजपोर जेल में मोबाइल बरामद

सूरत की इस जेल को अत्याधुनिक हाईटेक जेल के रूप में प्रचारित किया जाता है। तंत्र की ओर से बार-बार दावा किया जाता रहा है कि जेल के अंदर हाई-फ्रीक्वेंसी जैमर लगे हैं, जिसके कारण कोई मोबाइल नेटवर्क काम नहीं करता। लेकिन जेल के अंदर से लगातार मोबाइल फोन और एक्टिव सिम कार्ड बरामद होने की घटनाएं इन दावों पर सवाल खड़े करती हैं। इस कार्रवाई से यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर जैमर लगे होने के बावजूद जेल के अंदर मोबाइल फोन किस तरह सक्रिय थे? यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी इसी जेल से कई बार मोबाइल फोन, गांजा और अन्य प्रतिबंधित वस्तुएं बरामद हो चुकी हैं।

जैमर के बीच मोबाइल का खेल: लाजपोर जेल की हाईटेक सुरक्षा पर बड़ा सवाल

लाजपोर जेल को हाईटेक सुरक्षा और कड़ी निगरानी वाली जेल बताया जाता है। मोबाइल नेटवर्क रोकने के लिए जैमर सिस्टम होने के दावे भी किए जाते हैं। लेकिन विजिलेंस की अचानक कार्रवाई में जेल के भीतर से बड़ी संख्या में मोबाइल फोन और एक्टिव सिम कार्ड मिलने के बाद अब सवाल सिर्फ मोबाइल मिलने तक सीमित नहीं है—आखिर ये फोन जेल के अंदर पहुंचे कैसे और इनका इस्तेमाल कौन कर रहा था?

बाथरूम, शौचालय, वॉश बेसिन और यहां तक कि एक कैदी की पैंट की जेब से मोबाइल बरामद होने ने सुरक्षा व्यवस्था की कई परतों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि प्रतिबंधित मोबाइल जेल के भीतर पहुंच रहे थे, तो प्रवेश के दौरान होने वाली तलाशी और नियमित चेकिंग कितनी प्रभावी थी?

जैमर के बावजूद एक्टिव सिम ने बढ़ाई जांच की दिशा

जांच का अहम बिंदु यह भी है कि बरामद मोबाइल में VI और BSNL के एक्टिव सिम कार्ड मिले हैं। ऐसे में अब FSL और तकनीकी जांच से यह पता लगाने की कोशिश होगी कि इन मोबाइल का इस्तेमाल कब-कब हुआ, किन नंबरों पर संपर्क किया गया और क्या इनका इस्तेमाल जेल के बाहर मौजूद किसी आपराधिक नेटवर्क से संपर्क के लिए किया जा रहा था।

मोबाइल सिर्फ फोन नहीं, पूरे नेटवर्क की कड़ी?

यदि FSL जांच में मोबाइल से आपराधिक संपर्क या संदिग्ध गतिविधियों के प्रमाण मिलते हैं, तो जांच का दायरा जेल के भीतर मोबाइल रखने वाले कैदियों से आगे बढ़ सकता है। यह भी जांच का विषय होगा कि मोबाइल जेल के अंदर किस माध्यम से पहुंचे, किसने पहुंचाए और क्या किसी अंदरूनी व्यक्ति की मदद ली गई थी।

विजिलेंस की कार्रवाई ने फिलहाल एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है—हाईटेक सुरक्षा, जैमर और कड़ी निगरानी के दावों के बावजूद लाजपोर जेल के अंदर मोबाइल का यह नेटवर्क आखिर चल कैसे रहा था?

A To Z अस्पताल में आग: फायर ऑपरेशन के दौरान एलिवेशन से परेशानी, पहले भी सूचना देने का दावा

A To Z अस्पताल में आग: फायर ऑपरेशन के दौरान एलिवेशन से परेशानी, पहले भी सूचना देने का दावा

सूरत: सचिन-तलंगपुर रोड स्थित A To Z अस्पताल की छठी मंजिल के रेजिडेंट रूम में आग लगने की घटना के बाद फायर ऑपरेशन के दौरान सामने आई दिक्कतों को लेकर जानकारी सामने आई है। आग पर फायर ब्रिगेड ने कड़ी मशक्कत के बाद काबू पा लिया। घटना में किसी जनहानि की सूचना नहीं है।

फायर अधिकारी के अनुसार, आग बुझाने की कार्रवाई के दौरान अस्पताल के बिल्डिंग एलिवेशन के कारण फायर ब्रिगेड को आग वाले हिस्से तक पहुंचने और पानी की बौछार करने में कुछ परेशानी हुई। अधिकारी ने यह भी बताया कि इस संबंध में अस्पताल प्रबंधन को पहले भी जानकारी दी गई थी।

पहले दी गई सूचना की भी होगी जांच

फायर विभाग की ओर से पहले अस्पताल को किस प्रकार की सूचना या निर्देश दिए गए थे और उन पर क्या कार्रवाई हुई, यह रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों के आधार पर स्पष्ट किया जाना बाकी है। इसलिए फिलहाल अस्पताल की ओर से किसी नियम के उल्लंघन की पुष्टि मानकर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

आग की घटना के दौरान अस्पताल स्टाफ ने मरीजों को सुरक्षित बाहर निकाला। जिस रेजिडेंट रूम में आग लगी थी, वहां मौजूद दो महिलाएं और एक बच्चा भी समय रहते बाहर निकल गए थे।

आगे की कार्रवाई फायर विभाग की जांच पर निर्भर

घटना के बाद अस्पताल की फायर एक्सेस, बिल्डिंग एलिवेशन और अन्य संबंधित फायर सेफ्टी व्यवस्थाओं की जांच की जा सकती है। साथ ही, यदि पहले कोई सूचना या निर्देश जारी किए गए थे तो उनके अनुपालन की स्थिति भी जांच का हिस्सा हो सकती है।

फिलहाल आग पर काबू पा लिया गया है और कूलिंग की कार्रवाई पूरी की जा रही है। फायर विभाग की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आगे कौन-सी कार्रवाई की जाएगी।

सचिन में A to Z अस्पताल के ऊपर मकान में भीषण आग: फायर ब्रिगेड की 5 गाड़ियां और पुलिस ने संभाला मोर्चा, कोई जनहानि नहीं

सचिन में A to Z अस्पताल के ऊपर मकान में भीषण आग: फायर ब्रिगेड की 5 गाड़ियां और पुलिस ने संभाला मोर्चा, कोई जनहानि नहीं

सूरत के सचिन इलाके में आज अचानक आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। सचिन स्थित A to Z अस्पताल के ऊपर बने मकान की टॉप फ्लोर पर अचानक आग भड़क उठी। दोपहर के समय लगी आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया।

अस्पताल के ठीक ऊपर आग लगने की सूचना मिलते ही मरीजों, उनके परिजनों और आसपास के स्थानीय लोगों में डर का माहौल पैदा हो गया। पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत फायर कंट्रोल रूम और पुलिस को सूचना दी।घटना की गंभीरता को देखते हुए फायर ब्रिगेड का काफिला करीब 5 गाड़ियों के साथ कुछ ही मिनटों में घटनास्थल पर पहुंच गया।

फायर फाइटरों ने लगातार पानी की बौछार कर आग को और फैलने से रोकने का प्रयास किया। कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया।

दूसरी ओर, सचिन पुलिस स्टेशन का काफिला भी तत्काल मौके पर पहुंच गया। पुलिस ने अस्पताल के आसपास जमा हुई लोगों की भारी भीड़ को हटाया और यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाया, ताकि राहत और बचाव कार्य में किसी तरह की बाधा न आए। प्राथमिक जांच के अनुसार, मकान की टॉप फ्लोर पर शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगने का अनुमान लगाया जा रहा है। राहत की सबसे बड़ी बात यह रही कि फायर ब्रिगेड और स्थानीय लोगों की तत्परता के चलते आग नीचे स्थित अस्पताल तक नहीं पहुंची।

इस पूरी घटना में किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई, जिससे प्रशासन और स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली। फिलहाल फायर विभाग द्वारा कूलिंग की कार्रवाई पूरी कर नुकसान का आकलन किया जा रहा है।