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सरकारी जमीन हडपने के लिए बने अवैध मैदानों की जांच करने की मांग

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दर्शन नायक ने मुख्यमंत्री, खेल मंत्री और जिला कलेक्टर को दिया ज्ञापन

सूरत। सूरत जिले में सरकारी जमीन पर बने अवैध खेल मैदानों की जांच करने और ऐसे मैदानों का प्रबंधन सरकार अपने हाथ में ले या खेल प्राधिकरण बनाकर एक ट्रस्ट को आवंटित करे। सरकारी जमीन पर खेल मैदान बनाने के साथ व्यावसायिक गतिविधियों की जांच कराने के लिए किसान एवं सहकारिता नेता तथा गुजरात प्रदेश कांग्रेस महासचीव दर्शन नायक द्वारा मुख्यमंत्री, खेल मंत्री और जिला कलेक्टर को ज्ञापन दिया।
एक ओर राज्य सरकार “रमशे गुजरात, खेलशे गुजरात”, खेल महाकुंभ जैसी सरकारी गतिविधियों का आयोजन करके गुजरात के युवाओं की प्रतिभा को सामने लाने और युवाओं को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही है। दूसरी ओर, सूरत जिले के नौ तहसिलों के कई गांवों में योग, बिना किसी अनुमति के सरकारी जमीन पर क्रिकेट मैदान का निर्माण किया गया है। सरकारी जमीनों का प्रबंधन मामलतदार और ग्राम पंचायत की जिम्मेदारी है, लेकिन कुछ गांवों में खेल मैदानों के नाम पर सरकारी जमीन पर क्रिकेट मैदान का निर्माण कर दिया गया है। जिन पंचायतों को सरकारी जमीन पर अतिक्रमण रोकना चाहिए, वे भी इस मुद्दे पर चुप्पी साधे बैठी हैं और सरकारी जमीन पर हो रहे कब्जे के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रही हैं। सूरत जिले में सरकारी जमीन पर दबाव की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। एक ओर जहां कई शिक्षण संस्थानों के पास सरकारी नियमानुसार मैदान नहीं है, वहीं दूसरी ओर खेल के नाम पर जबरन सरकारी जमीन देकर आर्थिक लाभ उठाया जा रहा है।

पहले के समय में जब क्रिकेट मैच खेले जाते थे तो अलग-अलग गांवों की टीमें खेलती थीं और कोई किराया या शुल्क नहीं लिया जाता था। लेकिन आज, सूरत जिले के गांवों में अवैध रूप से कब्जे वाले क्रिकेट मैदानों पर व्यावसायिक क्रिकेट टूर्नामेंट आयोजित किए जा रहे हैं और प्रवेश या मैदान शुल्क के रूप में हजारों रुपये वसूले जा रहे हैं। इससे गांव की संस्थाओं या ग्रामीणों को कोई फायदा नहीं होता और कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी अपनी खराब आर्थिक स्थिति के कारण आगे नहीं आ पाते। सरकारी जमीन पर कब्जा कर मैदान का निर्माण कर कुछ शरारती तत्व अपने फायदे के लिए इस तरह की गतिविधि को बढ़ावा दे रहे हैं। ऐसी गतिविधि से किसी भी समुदाय, गांव या तालुक को लाभ नहीं होता है बल्कि खेल गतिविधियों के माध्यम से युवाओं की भावनाओं का उपयोग करके पूरी व्यवस्था अवैध रूप से चलाई जा रही है। पूरे सूरत जिले में ऐसे अवैध आधारों की जांच होनी चाहिए। इससे होने वाली आय की भी जांच की जानी चाहिए और ऐसी आय को जनहित में सरकारी खजाने में जमा किया जाना चाहिए।

सूरत जिले में क्रिकेट सहित अन्य खेलों के कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं, युवाओं को खेलों के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, लेकिन ऐसा लगता है कि सरकार सूरत जिले में खेलों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रही है। यदि सरकार ऐसे प्रतिभावान खिलाड़ियों को सही ढंग से संगठित कर प्रोत्साहित करे तो वे राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर बहुत अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं। अगर सरकार खेलों के लिए प्रोत्साहन दे रही है तो सूरत जिले के तालुका और जिला खेल अधिकारी इस मामले पर ध्यान क्यों नहीं दे रहे हैं? खेल के मैदान के मामले में जिले और तालुका के अधिकारी रुचि क्यों नहीं ले रहे हैं?

सरकारी भूमि पर बने सभी मैदानों को सरकार ने तालुका, जिला और राज्य खेल प्राधिकरण बनाकर सरकारी भूमि पर बने सभी मैदानों को अपने कब्जे में ले लेना चाहिए। खेल गतिविधियों में शामिल गाँव के युवाओं का एक ट्रस्ट बनाकर जिसमें सरकारी अनुदान आवंटित कर या सरकारी लाभ देकर विशिष्ट नीतियां बनानी चाहिए। जिसमें हर प्रकार के टूर्नामेंट को मामूली शुल्क पर आयोजित किया जाना चाहिए। तालुका और जिला खेल विभाग के अधिकारियों के समन्वय से ऐसी खेल गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए और युवाओं को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से टूर्नामेंट आयोजित किए जाने चाहिए। ताकि युवाओं के अंदर की प्रतिभा को सामने लाया जा सके, साथ ही सरकार का उद्देश्य भी पूरा हो सके और सरकारी जमीनों की सुरक्षा भी हो सके।

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