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बिहार में रुक नहीं रहा मौत का तांडव, दिमागी बुखार के खौफ से ग्रामीणों का पलायन

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पटना (ईएमएस)। बिहार में फैले जानलेवा दिमागी बुखार का कहर लगातार बढ़ता ही जा रहा है। देखते ही देखते इस बीमारी ने महामारी का रूप ले लिया है। बिहार में अब तक 144 से अधिक बच्चों की मौत हो चुकी है। दिमागी बुखार का खौफ इतना फैल गया है कि ग्रामीणों ने बड़े पैमाने पर पलायन करना शुरू कर दिया है।स्थानीय लोग अपने बच्चों को लेकर भयभीत हो गए हैं। मां-बाप के मन में खौफ है कि कहीं उनके बच्चे भी इसी बीमारी का शिकार न हो जाएं। मुजफ्फरपुर के अलावा वैशाली के कई गांवों से भी लोग पलायन कर रहे हैं। ऐसी ही एक कहानी है वैशाली जिले के भगवानपुर ब्लॉक की, जहां हरवंशपुर गांव में चमकी बुखार की वजह से 6 बच्चों की मौत हो गई है।
लाश की उम्र जितनी कम होती है, उतना ही दर्द उसे कंधों पर उठाने में होता है। हरवंशपुर गांव में 6 बच्चे दम तोड़ चुके हैं, लेकिन प्रशासन की तरफ से कोई अभी तक सुध लेने नहीं आया है। इसी गांव के चतुरी सहनी के दो बेटों को ये बीमारी हुई, पहले बड़ा बेटा बीमार हुआ और फिर छोटा, और दोनों ने ही दम तोड़ दिया।
इनके बगल में रहने वाले राजेश सहनी का दर्द भी कुछ ऐसा ही है। उनकी 7 वर्ष की बेटी का जीवन भी इसी तरह खत्म हो गया। मुजफ्फरपुर के मेडिकल कॉलेज में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। इस गांव में एक-एक कर छह बच्चों की मौत होने के बाद गांव में मातम पसर गया है। लोग अपने परिवारवालों को दूसरे गांव में भेज रहे हैं, ताकि वे इस बीमारी के शिकार न हो जाएं। कुछ लोग मजबूरी में हैं, उनके पास इतने साधन नहीं हैं कि गांव छोड़ पाएं, इस लिए मजबूरी में गांव में ही बने हुए हैं।
वैशाली जिले में दिमागी बुखार से 17 बच्चों की मौत हो चुकी है। इनमें से कई बच्चों को दिमागी बुखार से मरने वाले बच्चों की सूची में शामिल नहीं किया गया है। हरवंशपुर गांव के लोगों ने बताया कि इन्हें इस बीमारी की पहले कोई जानकारी नहीं दी गई थी। जब ये घटनाएं होने लगीं तब आंगनबाड़ी की सेविकाएं उन्हें इस बीमारी के बचाव के बारे में बताने आईं।

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